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क्या है ईशनिंदा कानून जिसकी वजह से पाकिस्तान में शख्स को जिंदा जलाया, भारत में भी है जायज ?
पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कुरान का अपमान करने पर गुस्साई भीड़ ने ईशनिंदा कानून का हवाला देते हुए उस शख्स को जिंदा जला दिया। अब इसे लेकर दुनियाभर में इस घटना की खूब आलोचना हो रही है। ये पहली दफा नहीं है ईशनिंदा से जुड़ा कोई मामला सामने आया है।
समय-समय पर पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामले सामने आते रहे हैं। पाकिस्तान ही नहीं कई मुस्लिम देश इस कानून को लेकर काफी सख्त हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या है ईशनिंदा कानून और भारत में कितना जायज है ये कानून?

क्या है ईशनिंदा?
अब आपको बताते हैं कि आखिर ये ईशनिंदा कानून है क्या। ईशनिंदा का मतलब है ईश्वर की निंदा। अगर कोई इंसान जानबूझकर पूजा करने की जगह को नुकसान पहुंचाता है, धार्मिक कार्य में बाधा पहुंचाता है, धार्मिक भावनाओं का अपमान करता है या इन्हें ठेस पहुंचाता है तो यह ईशनिंदा के दायरे में आता है।
ईशनिंदा कानून के मुताबिक, इस्लाम या पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कुछ भी बोलने या करने पर मौत की सजा का प्रावधान है। अगर मौत की सजा नहीं दी जाती है तो आरोपी को जुर्माने के साथ आजीवन कारावास झेलना पड़ सकता है। इस कानून की नींव ब्रिटिश शासनकाल में पड़ी थी।

पाकिस्तान में क्या है सजा?
शुरुआती दौर में पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामलों में 10 साल की सजा और जुर्माना का प्रावधान था। लेकिन 1980 में इसमें और धाराएं जोड़ी गईं। यहां का कानून कहता है कि अगर कोई इस्लाम से जुड़े किसी इंसान के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करता है तो उसे 3 साल की जेल की सजा हो सकती है। वहीं, कुरान को अपवित्र करने पर उम्रकैद की सजा दी जाती है। वहीं, पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ ईशनिंदा करने पर मौत या उम्र कैद की सज़ा दी जाएगी।
किस मुस्लिम देश में कितनी सजा?
ईरान: यहां ईशनिंदा को लेकर सख्त सजा है, यहां धर्म का अपमान करने वाले शख्स को मौत की सजा का सुनाई जाती है और पैगंबर की निंदा करने पर मौत की सजा दी जाती है।
सऊदी अरब: यहां शरिया कानून लागू है। ईशनिंदा करने वाले शख्स को मुर्तद यानी धर्म को न मानने वाला घोषित किया जाता है, जिसकी सजा मौत है।
मिस्र: मिस में 2014 में हुए संविधान संशोधन के बाद इस्लाम को राष्ट्रीय दर्जा दिया गया और दूसरे धर्मों को मान्यता दी गई। यहां ईशनिंदा पर प्रतिबंध है। इसका उल्लंघन करने पर कम से कम 6 माह और अधिकतम पांच साल की सजा हो सकती है।
इंडोनेशिया: दुनियाभर में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया है। इस देश में इस्लाम, क्रिश्चियन, हिन्दू और बौद्ध धर्म का अपमान करना ईशनिंदा के दायरे में आता है। जिसकी अधिकतम सजा पांच साल है। यहां धर्म विरोधी किताब पढ़ने पर भी मुकदमा चल सकता है।
अफगानिस्तान: इस देश पर भी ईशनिंदा पर फांसी या पत्थरों से मारने की सजा दी जाती है।
मलेशिया: यहां किसी धर्म का अपमान करने या धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने पर तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा धर्म विरोधी किताब या साहित्य पढ़ने पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
भारत में क्या है कानून?
हमारे यहां ईशनिंदा यानी ब्लासफेमी को लेकर कोई अलग से कानून का प्रावधान नहीं है। आईपीसी की धारा 295 के तहत अगर कोई धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता तो उसे दो साल की कैद या जुर्माना देना पड़ सकता है।
संविधान के अनुच्छेद 19A में हमें फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन मिला हुआ है, जिसके तहत हम आलोचना करने के लिए आजाद हैं, जब तक कि किसी की धार्मिक भावनाओं का आघात न पहुंचे।



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