बेगूसराय के डिप्टी कमिश्नर ने भतीजी से किया सपिंड विवाह, क्‍यों कानून और साइंस नहीं देता है इसकी इजाजत?

What is sapinda Marriage : बिहार में बेगूसराय नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर शिव शक्ति ने अपने ही गांव की रिश्ते में भतीजी सजल से प्रेम विवाह कर लिया है। इसके बाद से ही यह मामला मीड‍िया में सुर्खियां बटोर रहा है। दोनों एक ही परिवार और एक ही जाति से संबंध रखते हैं। ये मामला तब सामने आया जब सजल के घर वालों ने शिव शक्ति पर अपहरण का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद सजल ने सोशल मीड‍िया पर व‍ीड‍ियो शेयर कर शादी का सच बताया।

अब इन दोनों की शादी सवालों के कठघरे में खड़ी हो गई है, क्योंकि न तो समाज ऐसी शादी को मान्यता देता है और न ही कानून। साइंस भी इस तरह की शादी करने के पक्ष में नहीं है। आइए जानते है क्‍या कहता सप‍िंड विवाह के बारे में भारतीय कानून और साइंस का नजर‍िया भी समझते हैं।

What is sapinda marriage as begusarai deputy commissioner shiv shakti

सप‍िंड विवाह को नहीं है कानूनी मान्‍यता

हिंदू मैरिज एक्ट में, शिव शक्ति और सजल की शादी को सपिंड माना जाएगा। एक्ट की धारा 3 में नियम दिए गए हैं। धारा 3(f)(ii) के मुताबिक, 'अगर दो लोगों में से एक दूसरे का सीधा पूर्वज हो और वो रिश्ता सपिंड के श्रेणी में आएगा, या फिर दोनों का कोई एक ऐसा पूर्वज हो जो दोनों के लिए सपिंड रिश्ते की सीमा के अंदर आए, तो दो लोगों के ऐसे विवाह को सपिंड विवाह कहा जाएगा।

हिंदू मैरिज एक्ट के हिसाब से, एक लड़का या लड़की अपनी मां की तरफ से तीन पीढ़ियों तक किसी से शादी नहीं कर सकते है और पिता की तरफ से ये पाबंदी पांच पीढ़ियों तक लागू होती है।

पर ये लोग कर सकते हैं सप‍िंड विवाह

अगर लड़के और लड़की दोनों क‍िसी ऐसे समुदाय से आते हैं, जिनके यहां पहले से सपिंड शादी का रिवाज है, तो वो ऐसी शादी कर सकते हैं। दक्षिण भारत के कुछ हिन्दू समुदायों में चचेरे भाई, मामा और भतीजी के साथ शादी आम बात है। ये समुदाय इस कानून के दायरे में नहीं आता है।

सपिंड शादी से आने वाली नस्‍ल को खतरा

दरअसल सपिंड विवाह को रोकने के ल‍िए पुराने जमाने में गोत्र व्‍यवस्‍था थी। जिसके तहत लड़का या लड़की समान गोत्र में शादी नहीं कर सकते थे। इसके पीछे का तर्क ये था क‍ि आने वाली पीढ़ी को जन्‍मदोष से बचाया जा सकें।

समान पूर्वज होने के कारण दंपति अपने बच्चों को घातक जीन विरासत में दे सकते हैं। ऐसी शादियों से जन्मे कई बच्चों में आनुवंशिक विकार होने की संभावना बढ जाती है। इन आनुवंशिक विकारों में इम्युनोडेफिशिएंसी, बीटा-थैलेसीमिया, हाई बीपी, प्रोटीन-सी और प्रोटीन-एस की कमी, फेनिलकीटोन्यूरिया और कम वजन आदि हैं। गर्भपात, मेडिटरेनीयन फीवर, थैलेसीमिया और सेरेब्रल पाल्सी जैसी बीमारियां भी इसी से जुड़ी हुई होती हैं।

Story first published: Friday, August 23, 2024, 19:50 [IST]
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