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Happy New Year 2024 : क्या है ग्रेगोरियन कैलेंडर? जिसे 200 से ज्यादा देश करते हैं फॉलो
Gregorian calendar History and Fact : नया साल आने को अब केवल कुछ ही दिन बाकी हैं और देश दुनिया में नये साल के जश्न की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अब हम साल 2024 में प्रवेश करने वाले हैं। जिस नये साल को हम 1 जनवरी से मनाते हैं वो असल में ग्रेगोरियन कैलेंडर का नया साल है। जिसे दुनियाभर के 200 से अधिक देश फॉलो करते हैं। दुनिया में कैलेंडर का इतिहास बहुत पुराना है।
ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरूआत सन् 1582 में हुई थी। इससे पहले रूस का जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था जिसमें साल में 10 महीने होते थे और क्रिसमस एक निश्चित दिन आता था।

क्रिसमस को एक दिन तय करने के लिए 15 अक्टूबर 1582 को अमेरिका के एलॉयसिस लिलिअस ने ग्रेगोरियन कैलेंडर शुरू किया। इस कैलेंडर के हिसाब से जनवरी साल का पहला महीना है और साल का अंत दिसंबर में क्रिसमस के गुजरने के बाद होता है। इस कैलेंडर में क्रिसमस हर वर्ष 25 दिसंबर को निश्चित हो गया।
यूरोपीय व्यापार के वजह से पूरी दुनिया में पहुंचा
18वीं और 19वी सदी के आते आते यूरोपीय शक्ति खासतौर से ईसाई धर्म के शासकों का पूरी दुनिया पर वर्चस्व हो गया जिसकी वजह से ग्रेगोरियन कैलेंडर दुनिया के अधिकांश देशों में अलग अलग समय पर अपनाया जा चुका था। 20वीं सदी में दुनिया के देशों का आपस में व्यापार बढ़ता गया और इसके लिए उन्हें ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाना सुविधाजनक लगने लगा।
भारत में 1752 में पहुंचा
भारत में ब्रिटेन ने यह कैलेंडर 1752 में लागू किया था। तब से सभी सरकारी कामकाज ग्रेगोरियन कैलेंडर में ही हो रहे हैं। वहीं आजादी के समय भी कैलेंडर को जारी रखने या उसकी जगह हिंदू कैलेंडर को अपनाए जाने पर गहन मंथन हुआ। लेकिन अंततः भारत सरकार ने ग्रेगोरियन के साथ- हिंदू विक्रम संवत को भी अपना लिया, पर सरकारी कामकाज ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार ही होते हैं।
सूर्य चक्र पर आधरित है ग्रेगोरियन कैलेंडर
कोई भी कैलेंडर सूर्य चक्र या चंद्रमा चक्र की गणना पर आधारित होता है. सूर्य चक्र पर आधारित कैलेंडर में 365 दिन होते हैं जबकि चंद्रमा चक्र पर आधारित कैलेंडर में 354 दिन होते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर सूर्य चक्र पर आधारित है। इस कैलेंडर में हर महीने में बराबर दिन भी नहीं हैं। 4 महीनों में 30, 6 महीनों में 31 तथा 1 महीने में 28 दिन के स्थान पर 29 दिन होते हैं।
4 साल बाद लीप ईयर आने की वजह
दरअसल पृथ्वी को सूर्य का चक्कर लगाने में 365 दिन और करीब 6 घंटे लगते हैं और तब जाकर एक सूर्य वर्ष पूरा होता है और नया साल शुरू होता है। ये 6-6 घंटे की अवधि जुड़ते हुए 4 सालों में पूरे 24 घंटे की हो जाती है और 24 घंटे का एक पूरा दिन होता है। इस तरह हर चौथे साल की गणना में एक एक्सट्रा दिन जुड़ जाता है और वो साल 366 दिनों का हो जाता है। इस एक्सट्रा दिन को फरवरी में जोड़ दिया जाता है। यही वजह है कि हर चौथे साल में फरवरी 29 दिनों की होती है।
पहले थे 10 महीने
ग्रेगोरियन कैलेंडर से पहले जूलियन कैलेंडर चलन में था। ये रोमन सौर कैलेंडर था। जूलियन कैलेंडर में साल का पहला महीना मार्च और आखिरी फरवरी था।इसी कैलेंडर में लीप ईयर की व्यवस्था की गई थी। उस समय लीप ईयर के एक्सट्रा दिन को आखिरी महीने में जोड़ दिया गया था। जब जूलियन कैलेंडर की जगह ग्रेगोरियन कैलेंडर आया तो पहला महीना जनवरी हो गया, लेकिन फिर भी एक्सट्रा दिन को फरवरी में ही जोड़ा गया क्योंकि पहले से ये क्रम चलता आ रहा था और फरवरी का महीना सबसे छोटा था।



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