Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
ये आदिवासी महिलाएं शादी के बाद भी दूसरे से बना सकती हैं संबंध, पति खुद चुनता है दूसरा मर्द
पति-पत्नी का रिश्ता दुनिया का सबसे पवित्र बंधन माना जाता है, लेकिन कुछ परंपराएं इसे चौंकाने वाली नई परिभाषा देती हैं। एक जनजाति ऐसी है, जहां पति खुद अपनी पत्नियों को टूरिस्ट्स के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए भेजते हैं। उनका मानना है कि यह प्रथा न केवल आर्थिक लाभ पहुंचाती है बल्कि उनके सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देती है। इसके अलावा उनका मानना है कि इससे उनके वैवाहिक रिश्ते में जलन की भावना खत्म हो जाती है।
यह परंपरा दुनिया भर में लोगों को हैरान कर देती है। ये जनजाति जिसे हिम्बा कहा जाता है यह अफ्रीका उत्तरी नामीबिया से ताल्लुक रखती है। आइए इनके बारे में डिटेल में जानते हैं।

कौन हैं हिंबा जनजाति
हिंबा जनजाति खानाबदोश जीवन जीने के लिए जानी जाती है और रेगिस्तान की कठोर जलवायु में रहने की अभ्यस्त है। बाहरी दुनिया से अलग, ये लोग मुख्य रूप से दलिया खाते हैं, जो मक्के या बाजरे (महांगू) के आटे से बनता है। महांगू नामीबिया में आसानी से उपलब्ध है। शादी या विशेष अवसरों पर ये लोग मीट खाना पसंद करते हैं। अफ्रीका के अन्य आदिवासी समुदायों की तरह हिंबा लोग भी गायों पर अत्यधिक निर्भर हैं। गाय न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक सम्मान का प्रतीक है। मवेशी पालने में गायों के साथ बकरी और भेड़ भी शामिल होती हैं। गायों का दूध निकालने और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी महिलाओं पर होती है।
ऐसे चलती है इनकी परांपरा
हिम्बा जनजाति की जीवनशैली नामीबियाई समाज से काफी अलग और पारंपरिक है। करीब 50,000 लोग इस जनजाति से जुड़े हैं, जहां पुरुषों के लिए एक से अधिक पत्नियां रखना आम है। एक अध्ययन के अनुसार, 70% से अधिक हिम्बा पुरुष ऐसे बच्चों का पालन करते हैं, जिनके जैविक पिता वे नहीं होते। यह सच्चाई जानते हुए भी वे अपनी पत्नियों के साथ मधुर संबंध बनाए रखते हैं। हिम्बा महिलाओं के लिए तलाक लेना बेहद आसान माना जाता है, और विवाहेतर संबंध या विवाह से बाहर जन्म लेने वाले बच्चे कोई बड़ी बात नहीं मानी जाती। हर बच्चे का पालन-पोषण एक "सामाजिक पिता" द्वारा किया जाता है, जो इस समुदाय के परांपरा का हिस्सा है।
साल में एक बार नहाती हैं हिंबा महिलाएं
नामीबिया में रहने वाली लगभग 50 हजार जनसंख्या वाली इस जनजाति में महिलाओं के नहाने पर पाबंदी है। हैरानी की बात यह है कि ये महिलाएं अपने जीवन में केवल एक बार, शादी के समय, नहाती हैं। इसके बाद, उन्हें दोबारा कभी नहाने की अनुमति नहीं होती। हालांकि, ये महिलाएं जड़ी-बूटियों का उपयोग करके शरीर की सफाई और बदबू को नियंत्रित करती हैं। वे जड़ी-बूटियों को जलाकर निकलने वाले धुएं से खुद को शुद्ध करती हैं।
खतरे में इनका अस्तित्व
इस परांपरा पर कई डॉक्यूमेंट्री भी बन गई है। हिम्बा जनजाति में पत्नियों की अदला-बदली की परंपरा सदियों पुरानी है। इस प्रथा के तहत पति अपनी पत्नियों को अनजान पुरुषों के साथ रात बिताने की अनुमति देते हैं। जब कोई मेहमान या अनजान पुरुष महिला के साथ होता है, तो महिला के पति से उम्मीद की जाती है कि वह दूसरे कमरे में रात बिताए। हालांकि, अब हिम्बा जनजाति की परंपराएं और जीवनशैली धीरे-धीरे बदल रही हैं। पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव के कारण इस जनजाति के बच्चे अपने पारंपरिक तरीकों पर शर्म महसूस करने लगे हैं। हिम्बा समुदाय के ओवेन काटापारो ने बीबीसी से कहा कि पारंपरिक कपड़ों में उन्हें लोग अजीब नजरों से देखते हैं, जबकि पश्चिमी परिधान पहनने पर लोग उन्हें अधिक गंभीरता से लेते हैं। इससे जनजाति की पहचान संकट में है।



Click it and Unblock the Notifications