कैंची धाम नहीं...द‍िल्‍ली से 160 क‍िमी दूर है नीम करोली बाबा का समाधि स्थल, क्‍या आपको पता है ये जगह?

baba neem karoli maharaj : नीम करोली बाबा, जो हनुमान जी के परम भक्त और सिद्ध महापुरुष के रूप में जाने जाते हैं, दुनियाभर में अपने चमत्कारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध हैं। उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम को उनका प्रमुख आश्रम माना जाता है, जिसे उन्होंने स्वयं स्थापित किया था। यह आश्रम उनकी तपोभूमि है, जहां उन्होंने वर्षों तक ध्यान और साधना की थी। हर साल 15 जून को यहां आश्रम की स्थापना दिवस के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

लेकिन एक आम भ्रांति यह है कि कैंची धाम ही नीम करोली बाबा का समाधि स्थल है, जबकि यह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। दरअसल, नीम करोली बाबा का समाधि स्थल उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित है।

बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में ही अपने शरीर का त्याग किया था। उनके अंतिम समय के दिन भी वहीं बीते और वहीं पर उन्होंने अंतिम सांस ली थी। इसीलिए वृंदावन में ही उनका समाधि मंदिर स्थापित किया गया है, जो अब उनके भक्तों के लिए एक अत्यंत पावन तीर्थ बन चुका है।

baba neem karoli maharaj

वृंदावन में स्थित समाधि स्‍थल

वृंदावन में स्थित उनका आश्रम परिक्रमा मार्ग पर है, जहां उनकी समाधि बनी हुई है। इस स्थान के बारे में आम लोगों को अधिक जानकारी नहीं होती, क्योंकि कैंची धाम को अधिक प्रचार मिला है। परन्तु जो श्रद्धालु वास्तव में बाबा के समाधि स्थल के दर्शन करना चाहते हैं, उन्हें वृंदावन आना चाहिए, ना कि केवल कैंची धाम तक सीमित रहना चाहिए।

15 जून और 11 सितंबर को लगती है भीड़

कैंची धाम में बाबा का जीवन और उनकी साधना से जुड़ी कई स्मृतियां आज भी जीवित हैं। यहां भव्य हनुमान मंदिर भी है, जहां बाबा स्वयं पूजा किया करते थे। यह स्थान उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है और यहां आने वाले भक्तों को शांति और संतोष की अनुभूति होती है।

किन्तु अगर आप बाबा के वास्तविक समाधि स्थल के दर्शन करना चाहते हैं, तो वृंदावन अवश्य जाएं। यहां भी 15 जून और 11 सितंबर जैसे विशेष अवसरों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि उनकी समाधि के दर्शन मात्र से ही भक्तों की अनेक मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

इस प्रकार, नीम करोली बाबा का समाधि स्थल उत्तराखंड के कैंची धाम में नहीं बल्कि वृंदावन (उत्तर प्रदेश) में स्थित है। दोनों ही स्थान आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन समाधि दर्शन के लिए वृंदावन जाना ही उचित है।

Story first published: Saturday, June 14, 2025, 12:42 [IST]
Desktop Bottom Promotion