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कौन हैं मेजर ऋषभ संब्याल? राष्ट्रपति के रहे ADC, अब क्यों लिया सेना से प्रीमेच्योर रिटायरमेंट
Who Is Major Rishabh Singh Sambyal: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी के रूप में जिम्मेदारी संभाल चुके मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने भारतीय सेना से समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया है। राष्ट्रपति के साथ कई मौकों पर उनकी तस्वीरें सामने आती रही हैं, जिसके चलते वह सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे। अपनी सादगी और ड्यूटी के प्रति समर्पण के चलते मेजर सांब्याल को इंटरनेट पर 'नेशनल क्रश' तक कहा गया। आइए, जानते हैं कि मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल कौन हैं, उनका संबंध कहां से है और उनका सैन्य करियर कैसा रहा।

कौन हैं मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल?
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल भारतीय सेना की 4 पैरा स्पेशल फोर्स में अधिकारी रहे हैं। बाद में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी की जिम्मेदारी दी गई। मेजर ऋषभ का संबंध जम्मू कश्मीर के सांबा जिले से है। वह डोगरा राजपूत परिवार से आते हैं और उनके परिवार का सेना से पुराना रिश्ता रहा है।
कहां से हुई है पढ़ाई?
मेजर ऋषभ ने शुरुआती पढ़ाई सैनिक स्कूल कपूरथला से की। इसके बाद उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी यानी NDA से सैन्य प्रशिक्षण लिया। साल 2018 में उन्हें भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में कमीशन मिला। 2021 में गणतंत्र दिवस परेड के दौरान उन्होंने कैप्टन रहते हुए जाट रेजिमेंट की टुकड़ी का नेतृत्व किया। उनके नेतृत्व वाली टुकड़ी को बेस्ट मार्चिंग कंटिजेंट की ट्रॉफी भी मिली थी।
राष्ट्रपति के साथ तस्वीरें होती थीं वायरल
मेजर ऋषभ ने कड़े प्रशिक्षण और जरूरी परीक्षणों को पूरा करने के बाद 4 पैरा स्पेशल फोर्स में जगह बनाई। उन्हें प्रतिष्ठित बलिदान बैज भी मिला। इसके बाद वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी के तौर पर तैनात रहे। राष्ट्रपति के साथ ड्यूटी के दौरान उनकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रही हैं।
क्यों लिया समय से पहले रिटायरमेंट?
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया कि सेना की वर्दी पहनना बचपन से उनका सपना था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इसे समय से पहले छोड़ना पड़ेगा। हालांकि, जिंदगी में कुछ ऐसे हालात आए, जिनकी वजह से उन्हें अपनी दिशा बदलने का फैसला लेना पड़ा। उन्होंने सेना से प्रीमेच्योर रिटायरमेंट लेने के पीछे व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का हवाला दिया है। उनके इस फैसले में परिवार भी उनके साथ है। मेजर सांब्याल ने यह भी कहा कि सेना से अलग होने के बाद भी वह किसी न किसी रूप में देश के लिए अपना योगदान देते रहेंगे।



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