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85 साल उम्र, रामलल्ला के लिए 31 साल से मौन, कौन हैं मौनी माता जो 22 जनवरी को तोड़ेंगी व्रत
Who is Saraswati Devi Lord Ram devotee : अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कार्यक्रम के लिए देशभर में उत्साह है। अब राम मंदिर निर्माण को लेकर कई कहानियां भी सामने आ रही हैं। झारखंड की 85 वर्षीय बुजुर्ग सरस्वती देवी बीते 31 साल से मौन व्रत ली हुई हैं।
अब जब सरस्वती देवी का सपना पूरा होने जा रहा है तो वो इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनते हुए 22 जनवरी को तीन दशक से जारी अपना 'मौन व्रत' तोड़ देंगी।

मौनी माता के नाम से मशहूर हैं
सरस्वती देवी के परिजन बताते हैं कि अयोध्या में वे मौनी माता के नाम से मशहूर हैं। हम लोगों से वे इशारों में बात करती हैं। कोई कठिन बात कहनी हो तो लिखकर बताती हैं।
परिवारवालों ने ये भी बताया कि 1992 से 2020 तक वे दोपहर में एक घंटा बोलती थीं। जिस दिन (5 अगस्त 2020) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखी, तब से वे पूरी तरह मौन हैं।
1992 से धारण किया मौन
सरस्वती देवी के 55 साल के बेटे राम अग्रवाल कहते हैं- 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाने के दिन मां ने प्रण लिया कि जब तक राम मंदिर बनकर तैयार नहीं हो जाएगा, तब तक मौन रहेंगी। जब से मंदिर के उद्घाटन की तारीख की घोषणा हुई है, तब से वह बेहद खुश हैं।
पति की मुत्यु के बाद राम लल्ला को जीवन किया समर्पित
परिवार के सदस्यों ने कहा कि चार बेटियों सहित आठ बच्चों की मां देवी ने 1986 में अपने पति देवकीनंदन अग्रवाल की मृत्यु के बाद अपना जीवन भगवान राम को समर्पित कर दिया और अपना अधिकांश समय तीर्थयात्राओं में बिताया।
22 जनवरी तोड़ेंगी मौन व्रत
8 जनवरी की रात को सरस्वती देवी धनबाद से गंगा-सतलुज एक्सप्रेस से अयोध्या के लिए निकल चुकी हैं। 22 जनवरी को वे मौन व्रत तोड़ेंगी।



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