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कौन हैं सोनम वांगचुक जिन पर बन चुकी हैं 3 Idiots, लेह में जिनके लिए सड़कों पर उतरे Gen-Z
बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म 3 इडियट्स आपने जरूर देखी होगी। इस फिल्म का किरदार फुंसुख वांगडू, जिसे आमिर खान ने निभाया था, असल जिंदगी में लद्दाख के रहने वाले सोनम वांगचुक से प्रेरित था। वे सिर्फ एक इंजीनियर या शिक्षक नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण के रक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और युवाओं के मार्गदर्शक भी हैं। हाल ही में लद्दाख में हुई हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में भी उनका नाम चर्चा में रहा।

शुरुआती जीवन और शिक्षा
सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के उले टोकपो गांव (अलची के पास) में हुआ था। उनका बचपन आसान नहीं रहा क्योंकि उनके गांव में स्कूल नहीं था। शुरुआती शिक्षा उनकी मां ने ही मातृभाषा में दी। आगे चलकर उन्होंने श्रीनगर के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीटेक किया। इसके बाद वे फ्रांस के क्राटेर स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में Earthen Architecture की पढ़ाई के लिए भी गए।
शिक्षा व्यवस्था में क्रांति
लद्दाख की खराब शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सोनम वांगचुक ने 1988 में SECMOL (Students' Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की। इसका मकसद ग्रामीण बच्चों को कम संसाधनों के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था।
साल 1994 में उन्होंने ऑपरेशन न्यू होप शुरू किया, जिसके तहत स्थानीय सरकार और ग्रामीण समाज को जोड़कर शिक्षा व्यवस्था को नया स्वरूप दिया गया। उन्होंने पासिव सोलर बिल्डिंग और मिट्टी से बने भवन तैयार किए, जो ठंडे इलाकों में भी गर्म बने रहते हैं।
नवाचार और पर्यावरण संरक्षण
सोनम वांगचुक की पहचान उनके नवाचारों से भी जुड़ी है। उनका सबसे चर्चित प्रयोग है आइस स्तूपा। यह ठंड के मौसम में जमा पानी से बनी बर्फ की कृत्रिम संरचना है, जिसमें पानी लंबे समय तक जमा रहता है। गर्मियों में यह बर्फ पिघलकर पानी की कमी को पूरा करती है और खेतों की सिंचाई में मदद करती है। इस इनोवेशन को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली।
सामाजिक आंदोलन और युवाओं का समर्थन
आजकल सोनम वांगचुक चर्चा में इसलिए हैं क्योंकि वे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने 10 सितंबर 2025 से भूख हड़ताल शुरू की। उनका कहना है कि लद्दाख के प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय संस्कृति की रक्षा करना जरूरी है।
युवाओं का समर्थन उन्हें इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि लद्दाख में बेरोजगारी, संसाधनों की कमी और राजनीतिक अधिकारों की कमी की समस्याएं बढ़ रही हैं। कई लोग मानते हैं कि सोनम वांगचुक ने युवाओं को नेपाली जेन-ज़ी आंदोलन से प्रेरित किया है, इसी कारण प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए।



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