Latest Updates
-
कहीं आप भी तो नहीं पी रहे डिटर्जेंट वाला दूध? FSSAI के बताए इस सिंपल टेस्ट से मिनटों में करें चेक -
Indira Ekadashi 2026: 5 या 6 अक्टूबर, कब है इंदिरा एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
DHT: क्या है डायरेक्ट हेयर ट्रांसप्लांटेशन? जानें बालों की रिग्रोथ के लिए कितनी कारगर है यह तकनीक -
Captain Smit Machchhar: कैप्टन 'स्मित मच्छर' के सरनेम का क्या है मतलब? जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी -
नुसरत भरूचा की रीढ़ की हड्डी में हुआ फ्रैक्चर, एयरलिफ्ट कर बाली से लाई गईं मुंबई, वीडियो देख फैंस हुए परेशान -
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय -
Jitiya Vrat Katha: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत में जरूर करें इस कथा का पाठ, पूरे साल सुरक्षित रहेगी संतान -
Jitiya Vrat 2026 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि
Telangana Thalli : कौन हैं तेलंगाना थल्ली? जिनकी मूर्ति को लेकर तेलंगाना में हुआ विवाद?
Telangana Thalli : तेलंगाना में रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार एक बार फिर विवादों में घिर गई है। राज्य की पहचान मानी जाने वाली 'तेलंगाना थल्ली' की नई मूर्ति का डिजाइन चर्चा और विरोध का कारण बन गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने आरोप लगाया कि सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से 'तेलंगाना थल्ली' की पारंपरिक छवि को बदलने की कोशिश की है।
रेवंत रेड्डी ने नई 'तेलंगाना थल्ली' प्रतिमा राज्य सचिवालय में लगवाने का निर्णय लिया है, जिसका लोकार्पण 9 दिसंबर को सोनिया गांधी के जन्मदिन पर किया जाएगा। बीजेपी और बीआरएस दोनों ने इसका विरोध किया है, आरोप लगाते हुए कि कांग्रेस सरकार तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान से छेड़छाड़ कर रही है। 'तेलंगाना थल्ली' राज्य के लिए प्रतीक है, जो राज्य की मातृभूमि और संस्कृति को दर्शाता है। नई मूर्ति की डिजाइन पुरानी छवि से अलग होने पर विवाद खडा हो गया है।

कौन हैं तेलंगाना थल्ली?
तेलंगाना थल्ली तेलंगाना के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक मूर्ति है, जिसे स्थानीय देवी के रूप में पूजा जाता है। तेलगू क्षेत्र में पहले से समृद्धि देने वाली देवी को आंध्र माता के नाम से जाना जाता था। जब तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हुआ, तो लोगों ने देवी का स्थानीय स्वरूप 'तेलंगाना थल्ली' दिया। आंदोलन के दौरान, लगभग सभी विरोध समूहों में इस प्रतिमा की तस्वीरें थीं, और राज्य की पहचान को लेकर देवी का हवाला दिया जाता था। इस प्रतिमा को सबसे पहले निर्मल जिले के बी वेंकटरमण ने डिजाइन किया था और 2003 में हैदराबाद में बीआरएस (तब टीआरएस) मुख्यालय में स्थापित किया गया था।
क्या है नई और पुरानी मूर्ति में अंतर
पुरानी 'तेलंगाना थल्ली' मूर्ति में मुकुट और एक हाथ में मक्का था, जो राज्य की समृद्धि का प्रतीक था। दूसरी ओर, उनके पास वथकम्मा कलश था, जो तेलंगाना के प्रमुख त्योहार का सांस्कृतिक प्रतीक है। मूर्ति को गुलाबी रेशम की साड़ी पहनाई गई थी, जो पोचमपल्ली के प्रसिद्ध रेशम का प्रतिनिधित्व करती थी। पैर की अंगूठियां विवाहित महिलाओं का प्रतीक थीं और करीमनगर के चांदी के आभूषणों को दर्शाती थीं। इसके अलावा, तेलंगाना थल्ली ने सोने का कमरबंद भी पहना था।
नई मूर्ति में मुकुट को हटा दिया गया है, वथकम्मा कलश भी नहीं है, और साड़ी का रंग हरा कर दिया गया है। इसके अलावा, नए डिजाइन में कमरबंद भी नहीं जोड़ा गया है, जिससे यह पुरानी मूर्ति से स्पष्ट रूप से अलग है।



Click it and Unblock the Notifications
