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कौन हैं वो मुसलमान जिनके हज करने पर है प्रतिबंध, पकड़े जानें पर होता है ये हश्र
Who are Ahmadiyya Muslims : हज इस्लाम का पांचवां स्तंभ है, जिसे हर आर्थिक रूप से सक्षम और स्वस्थ मुसलमान को जीवन में कम से कम एक बार करना जरूरी माना जाता है। हर साल दुनियाभर से लाखों मुसलमान सऊदी अरब के मक्का शहर पहुंचते हैं, जहां स्थित काबा को इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल माना गया है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ मुसलमान ऐसे भी हैं जिन्हें हज की इजाजत नहीं मिलती? दरअसल, ये मुसलमान अहमदिया समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिन्हें कई इस्लामी देश, खासकर सऊदी अरब और पाकिस्तान, "ग़ैर-मुसलमान" घोषित कर चुके हैं।

कौन हैं अहमदिया मुसलमान?
अहमदिया मुसलमानों की शुरुआत 1889 में पंजाब (भारत) के कादियान गांव से हुई थी। इनके संस्थापक मिर्जा गुलाम अहमद थे, जिन्होंने खुद को पैगंबर मोहम्मद का अनुयायी और अल्लाह द्वारा भेजा गया मसीहा घोषित किया। अहमदिया समुदाय का मानना है कि गुलाम अहमद को ईश्वर की ओर से विशेष आदेश मिले थे ताकि वे दुनिया में शांति स्थापित कर सकें और धार्मिक कट्टरता को खत्म करें।
इस समुदाय के अनुयायियों की संख्या करीब 2 करोड़ है, जो 200 से ज्यादा देशों में फैले हुए हैं। अहमदिया मुसलमान कुरान, नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात जैसे इस्लाम के सभी बुनियादी सिद्धांतों को मानते हैं, लेकिन कुछ अन्य मुसलमानों के अनुसार अहमदिया मुस्लिम नहीं हैं, क्योंकि वे मिर्जा गुलाम अहमद को नबी (Prophet) मानते हैं।
क्यों नहीं मिलती अहमदिया मुसलमानों को हज की अनुमति?
अहमदिया मुसलमानों को सऊदी अरब हज करने की अनुमति नहीं देता क्योंकि सऊदी सरकार अहमदिया समुदाय को इस्लाम का हिस्सा नहीं मानती। पाकिस्तान में 1974 में संविधान संशोधन कर अहमदिया को 'गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक' घोषित कर दिया गया। वहां यदि कोई अहमदिया व्यक्ति हज या उमरा के लिए आवेदन करता है, तो उससे एक फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाया जाता है जिसमें मिर्जा गुलाम अहमद को झूठा पैगंबर कहना अनिवार्य है। ज़ाहिर है, कोई भी अहमदिया अनुयायी इस बात को स्वीकार नहीं करेगा, इसलिए उन्हें वीजा नहीं दिया जाता।
क्या अहमदिया मुसलमान हज करते हैं?
हालांकि जिन अहमदिया मुसलमानों के पास पाकिस्तानी पासपोर्ट नहीं होता या जिनके पास किसी अन्य देश की नागरिकता होती है, वे अक्सर हज पर चले जाते हैं। लेकिन अगर पहचान सामने आ गई तो उन्हें सऊदी अरब से डिपोर्ट भी किया जा सकता है। अहमदिया समुदाय के बहुत से लोग चुपचाप हज करते हैं ताकि वे धार्मिक प्रतिबंधों से बच सकें।
अहमदिया समुदाय की स्थिति
अहमदिया समुदाय की सबसे बड़ी आबादी पाकिस्तान में रहती है (लगभग 40 लाख), लेकिन वहां उन्हें तरह-तरह के भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उनकी मस्जिदों पर हमले होते हैं, कब्रिस्तानों में दफनाने से रोका जाता है और यहां तक कि धार्मिक गतिविधियों पर भी रोक है। हालांकि, विश्व स्तर पर अहमदिया समुदाय तेजी से फैल रहा है और उन्होंने कुरान का अनुवाद 65 से ज्यादा भाषाओं में करवा दिया है।



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