Latest Updates
-
Akshaya Tritiya Vrat Katha: अक्षय तृतीया के दिन जरूर पढ़ें यह कथा, मिलेगा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद -
Parshuram Jayanti 2026 Wishes: अधर्म पर विजय...इन संदेशों के साथ अपनों को दें परशुराम जयंती की शुभकामनाएं -
Akshaya Tritiya 2026 Wishes: सोने जैसी हो चमक आपकी...अक्षय तृतीया पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Akshaya Tritiya Wishes For Saasu Maa: सासु मां और ननद को भेजें ये प्यार भरे संदेश, रिश्तों में आएगी मिठास -
Aaj Ka Rashifal 19 April: अक्षय तृतीया और आयुष्मान योग का दुर्लभ संयोग, इन 2 राशियों की खुलेगी किस्मत -
Akshaya Tritiya 2026 Upay: अक्षय तृतीया पर करें ये 5 उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा से सुख-संपत्ति में होगी वृद्धि -
World Liver Day 2026: हर साल 19 अप्रैल को क्यों मनाया जाता है विश्व लिवर दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और थीम -
Nashik TCS Case: कौन है निदा खान? प्रेग्नेंसी के बीच गिरफ्तारी संभव या नहीं, जानें कानून क्या कहता है -
कश्मीर में भूकंप के झटकों से कांपी धरती, क्या सच हुई बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी? -
चेहरे से टैनिंग हटाने के लिए आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिनटों में मिलेगी दमकती त्वचा
Scientific Reason : अपने हाथों से हमें क्यों नहीं होती है गुदगुदी, जानिए इसके पीछे का लॉजिक
Why Can't You Tickle Yourself Know Reason : जब कोई किसी को गुदगुदी करता है तो इंसान बहुत जोर से हंसने लगता है। मगर क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी और के गुदगुदी करने से तो हम खूब हंसते हैं वहीं उसके विपरीत जब हम अपने ही हाथों से खुद को ही गुदगुदी करते हैं तो हमें बिल्कुल हंसी नहीं आती है। आपने कभी इस तरफ गौर किया है। नहीं, तो आज यहां जानते है कि इसके पीछे का लॉजिक।
ये होती है वजह
गुदगुदी को समझने के लिए मस्तिष्क के दो हिस्से जिम्मेदार होते हैं, पहला है सोमेटोसेंसरी कॉर्टेक्स (Somatosensory cortex)। ये हिस्सा स्पर्श को समझता है। दूसरा है एंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स (Anterior cingulate cortex)। ये खुशी या किसी दिलचस्प अहसास को समझता है। जब हम खुद को गुदगुदी लगाने की कोशिश करते हैं तो मस्तिष्क का सेरिबेलम हिस्सा पहले ही इसका अंदाजा लगा लेता है और कॉर्टेक्स को इस बारे में सूचित कर देता है। ऐसे में गुदगुदी के लिए तैयार कॉर्टेक्स इसके लिए पहले ही सचेत हो जाते हैं और हमें गुदगुदी नहीं लगती।
क्या है गुदगुदी के पीछे का विज्ञान
वैज्ञानिकों के अनुसार गुदगुदी दो तरह से होती है। पहली है निसमेसिस। इसमें शरीर को हल्के से स्पर्श किया जाए तो उस जगह पर त्वचा की बाहरी परत जिसे एपिडर्मिस कहते हैं, ये नसों के जरिए दिमाग तक संदेश भेजता है। इससे हल्की खुजलाहट का अहसास होता है। दूसरी है गार्गालेसिस, इसके कारण पेट, बगल या गले पर छूने से इंसान बेहताशा हंसता है।
हम हंसते क्यों हैं?
गुदगुदी करना कभी कभी खतरे का भी संकेत होता है। हमारे शरीर के जिन हिस्सों में ज्यादा न्यूरॉन होते हैं जैसे पेट, और जांघ और पेट के बीच का हिस्सा, वो गुदगुदी को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं। जब दिमाग को लगता है कि गुदगुदी किया जाना खतरनाक नहीं है तो वह हंसकर तनाव दूर करता है। हंसने से तनाव भी कम होता है सेहत भी अच्छी होती है।
कई लोगों को बस गुदगुदी की सोचने भर से भी हंसी आती है. कभी-कभी गुदगुदी किए जाने से पहले भी हंसी आने लगती है! वैज्ञानिकों का मानना है कि खेल खेल में लड़ने से पहले भी दिमाग को ऐसे ही सिग्नल मिलते हैं। इसलिए तब भी हंसी आती है।

तनाव हंसी के रुप में बाहर निकलती है
खुद को गुदगुदी करने पर हम अपने दिमाग को पर्याप्त चेतावनी नहीं दे पाते हैं। गुदगुदी के हंसाने जितनी प्रभावशाली होने के लिए नेरफेनकित्सेल की जरूरत होती है। नेरफेनकित्सेल जर्मन में डर के रोमांच को कहा जाता है जो दूसरे द्वारा की गई गुदगुदी से होता है। गुदगुदी किए जाने पर हमारा दिमाग एक साथ खुशी और हल्का दर्द महसूस करता है। इससे दिमाग तनाव में आ जाता है। यह तनाव अनियंत्रित हंसी के रूप में बाहर आता है।



Click it and Unblock the Notifications











