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Chhath Puja 2024 : बिहार में सुहागिनें क्यों लगाती हैं नाक तक नारंगी सिंदूर, रामायण से हैं कनेक्शन
हिंदू धर्म में सिंदूर का विशेष महत्व है, जो सदियों से सुहागन स्त्रियों की पहचान रही है। रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। सिंदूर केवल एक प्रतीक मात्र नहीं है, बल्कि इसके रंग और प्रकार का भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है।

भारत में अधिकांश शादियों में जहाँ लाल रंग का सिंदूर प्रयोग होता है, वहीं बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में नारंगी और गुलाबी रंग के सिंदूर, जिसे "भखरा सिंदूर" भी कहा जाता है, का विशेष रूप से उपयोग होता है। इस भखरा सिंदूर का प्रयोग न केवल शादी के दौरान सिंदूरदान के लिए किया जाता है बल्कि मांगलिक कामों और छठ पूजा पर महिलाएं जरूर इस सिंदूर को लगाती है।

शक्ति का प्रतीक
नारंगी रंग हिंदू धर्म में शक्ति, समर्पण और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। शादी में नारंगी रंग का सिंदूर भरना इस शक्ति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, जो शादीशुदा महिला को नए जीवन में आत्मनिर्भर और सशक्त होने की प्रेरणा देता है।
सेहत को मिलता है लाभ
पारंपरिक रूप से, नारंगी सिंदूर में हल्दी और केसर मिलाई जाती है, जो शरीर के लिए लाभकारी मानी जाती है। हल्दी में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं और केसर में औषधीय गुण होते हैं, जिससे यह शादी के दौरान सौभाग्य और स्वास्थ्य का प्रतीक बनता है।
रामायण से है इस सिंदूर का कनेक्शन
कथाओं के मुताबिक एक दिन हनुमान जी ने देखा कि माता सीता अपनी मांग में सिंदूर भर रही हैं। जब उन्होंने इसका कारण पूछा, तो सीता ने बताया कि सिंदूर लगाने से श्रीराम प्रसन्न होते हैं और उनके लिए यह शुभ भी है।
यह सुनकर हनुमान जी ने भी प्रभु राम को खुश करने के लिए अपने पूरे शरीर को नारंगी सिंदूर से रंग लिया। यह बात भगवान के प्रति भक्त का समर्पण और प्रेम को दर्शाता है। महिलाए अपने पति के प्रति समर्पण और प्रेम का भाव रखें इस वजह से बिहार में महिलाएं ये सिंदूर लगाती हैं।
सुखद दापंत्य का प्रतीक है भखरा सिंदूर
शादी की रस्में अक्सर देर रात शुरू होती हैं और सिंदूरदान का समय पौ फटने, यानी सुबह होने के करीब आता है। इस वक्त आकाश में सूर्योदय के समय हल्की नारंगी और लालिमा की रंगत छा जाती है। नारंगी रंग के इस सिंदूर को सूरज की पहली किरणों की इस लालिमा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि जैसे सूरज की किरणें हर सुबह नई ऊर्जा, सकारात्मकता और खुशहाली फैलाती हैं, वैसे ही यह सिंदूर भी नवविवाहिता के जीवन में एक नई शुरुआत, दिव्य ऊर्जा और खुशियों का प्रतीक बने।
नाक तक क्यों लगाती हैं बिहारी महिलाएं सिंदूर
छठ पूजा में नाक से सिंदूर लगाकर महिलाएं भगवान सूर्य और मां छठी से अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करती हैं। यह मान्यता है कि इस तरह नाक से सिंदूर लगाने से मां छठी की विशेष कृपा बनी रहती है और सुहाग की लंबी उम्र होती हैं।



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