Latest Updates
-
Pitru Paksha 2026: बेटा न हो तो क्या बेटी कर सकती है श्राद्ध और पिंडदान? अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने दिया जवाब -
World Lung Day 2026: शरीर में दिखें ये 7 लक्षण तो समझ जानें आपके फेफड़े हो रहे हैं खराब -
Anant Chaturdashi 2026: अनंत सूत्र में 14 गांठें ही क्यों बांधी जाती हैं? जानें इसका धार्मिक महत्व -
Mushtaq Khan Family: 'वेलकम' फेम मुश्ताक खान ने दुनिया को कहा अलविदा, जानिए एक्टर के परिवार में कौन-कौन? -
डायबिटीज में चावल और रोटी खाने का सही समय क्या है? जानें कब खाने से नहीं बढ़ेगा ब्लड शुगर -
Anant Chaturdashi Vrat Katha: अनंत चतुर्दशी के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर हो जाएंगे सारे कष्ट -
Anant Chaturdashi 2026 Wishes: श्री हरि का आशीष...इन संदेशों के साथ अपनों को दें अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं -
Hurun India Rich List 2026: ये हैं भारत के टॉप 10 सबसे अमीर लोग, जानिए किसके पास है कितनी दौलत -
Bhadrapada Purnima 2026: कब है भाद्रपद पूर्णिमा? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और पूजा विधि -
बढ़े हुए प्रोस्टेट का मतलब कैंसर नहीं, जानें बढ़े हुए प्रोस्टेट, प्रोस्टेटाइटिस और प्रोस्टेट कैंसर में अंतर
Gobar Holi In MP : ग्वालियर में क्यों गोबर से खेलते हैं साधु-संत होली, भगवान कृष्ण से है इसका कनेक्शन?
Cow Dung Holi in Gwalior :भारत में होली का त्योहार खेलने के कई अजब से गजब परांपरा हैं। लेकिन क्या आपने ग्वालियर की गोबर होली के बारे में सुना है। यहां सदियों से गौशाला में गोबर से अनोखी खेलने की परांपरा रही है। इस होली को खेलने के लिए गौ और कृष्ण भक्त यहां दूर-दूर से आते हैं।
खास बात यह है कि यहां रंग का प्रयोग नहीं होता है, बल्कि गाय के गोबर से होली खेली जाती है। बस इसे हर्बल और सुगंधित बनाने के लिए गंगाजल और इत्र का उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं इस गोबर होली के बारे में-

ऐसे तैयार होता है खास गोबर का मिश्रण
यहां गाय के साधारण गोबर को विशेष प्रकार से तैयार किया जाता है। यहां गोबर को पहले तरल कर इसे बड़े-बड़े चलनों से छान लिया जाता है। इसके बाद इसमें हर्बल तरीके से बनाए गए पेड़ पौधे के पत्तों से तैयार रंगो के मिश्रण को इस गोबर के घोल में मिलाया जाता है। फिर गोबर की दुर्गंध को दूर करने के लिए इसमें इत्र और गंगाजल भी मिलाया जाता है। फिर इस गोबर के घोल से साधु संत होली खेलते हैं।
यह है मान्यता
यहां होली खेलने आने वाले कृष्ण भक्तों का कहना है कि इस होली को खेलने की परम्परा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने की शुरु की थी। श्रीकृष्ण खुद गौ सेवक थे। यह पूरी तरह से हर्बल होली होती है। यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है क्योंकि इसमें केमिकल का जरा सा भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। आजकल बाजारों केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल होता है।



Click it and Unblock the Notifications
