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Gobar Holi In MP : ग्वालियर में क्यों गोबर से खेलते हैं साधु-संत होली, भगवान कृष्ण से है इसका कनेक्शन?
Cow Dung Holi in Gwalior :भारत में होली का त्योहार खेलने के कई अजब से गजब परांपरा हैं। लेकिन क्या आपने ग्वालियर की गोबर होली के बारे में सुना है। यहां सदियों से गौशाला में गोबर से अनोखी खेलने की परांपरा रही है। इस होली को खेलने के लिए गौ और कृष्ण भक्त यहां दूर-दूर से आते हैं।
खास बात यह है कि यहां रंग का प्रयोग नहीं होता है, बल्कि गाय के गोबर से होली खेली जाती है। बस इसे हर्बल और सुगंधित बनाने के लिए गंगाजल और इत्र का उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं इस गोबर होली के बारे में-

ऐसे तैयार होता है खास गोबर का मिश्रण
यहां गाय के साधारण गोबर को विशेष प्रकार से तैयार किया जाता है। यहां गोबर को पहले तरल कर इसे बड़े-बड़े चलनों से छान लिया जाता है। इसके बाद इसमें हर्बल तरीके से बनाए गए पेड़ पौधे के पत्तों से तैयार रंगो के मिश्रण को इस गोबर के घोल में मिलाया जाता है। फिर गोबर की दुर्गंध को दूर करने के लिए इसमें इत्र और गंगाजल भी मिलाया जाता है। फिर इस गोबर के घोल से साधु संत होली खेलते हैं।
यह है मान्यता
यहां होली खेलने आने वाले कृष्ण भक्तों का कहना है कि इस होली को खेलने की परम्परा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने की शुरु की थी। श्रीकृष्ण खुद गौ सेवक थे। यह पूरी तरह से हर्बल होली होती है। यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है क्योंकि इसमें केमिकल का जरा सा भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। आजकल बाजारों केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल होता है।



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