Latest Updates
-
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
APJ Abdul Kalam Death Anniversary: सपनों को पूरा करने का हौसला देते हैं डॉ. कलाम के ये 10 प्रेरणादायक विचार -
Jaya Parvati Vrat Katha: जया पार्वती व्रत में जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद -
Jaya Parvati Vrat 2026: जया पार्वती व्रत आज से शुरू, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व -
National Parents Day 2026 Wishes: आपकी उंगली पकड़कर चलना सीखा...पेरेंट्स डे पर माता-पिता को भेजें ये खास संदेश -
Kargil Vijay Diwas 2026 Wishes: तिरंगे की शान...कारगिल विजय दिवस के मौके पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
छात्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, जानें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के बारे में सबकुछ -
CJP प्रोटेस्ट में शामिल होने के बाद शबाना आजमी को हुआ स्वाइन फ्लू, जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय
Gobar Holi In MP : ग्वालियर में क्यों गोबर से खेलते हैं साधु-संत होली, भगवान कृष्ण से है इसका कनेक्शन?
Cow Dung Holi in Gwalior :भारत में होली का त्योहार खेलने के कई अजब से गजब परांपरा हैं। लेकिन क्या आपने ग्वालियर की गोबर होली के बारे में सुना है। यहां सदियों से गौशाला में गोबर से अनोखी खेलने की परांपरा रही है। इस होली को खेलने के लिए गौ और कृष्ण भक्त यहां दूर-दूर से आते हैं।
खास बात यह है कि यहां रंग का प्रयोग नहीं होता है, बल्कि गाय के गोबर से होली खेली जाती है। बस इसे हर्बल और सुगंधित बनाने के लिए गंगाजल और इत्र का उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं इस गोबर होली के बारे में-

ऐसे तैयार होता है खास गोबर का मिश्रण
यहां गाय के साधारण गोबर को विशेष प्रकार से तैयार किया जाता है। यहां गोबर को पहले तरल कर इसे बड़े-बड़े चलनों से छान लिया जाता है। इसके बाद इसमें हर्बल तरीके से बनाए गए पेड़ पौधे के पत्तों से तैयार रंगो के मिश्रण को इस गोबर के घोल में मिलाया जाता है। फिर गोबर की दुर्गंध को दूर करने के लिए इसमें इत्र और गंगाजल भी मिलाया जाता है। फिर इस गोबर के घोल से साधु संत होली खेलते हैं।
यह है मान्यता
यहां होली खेलने आने वाले कृष्ण भक्तों का कहना है कि इस होली को खेलने की परम्परा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने की शुरु की थी। श्रीकृष्ण खुद गौ सेवक थे। यह पूरी तरह से हर्बल होली होती है। यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है क्योंकि इसमें केमिकल का जरा सा भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। आजकल बाजारों केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल होता है।



Click it and Unblock the Notifications