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15 अगस्त की जगह 14 अगस्त 1947 को रात 12 बजे ही क्यों मिली भारत को आजादी, जानें समय का रहस्य
Independence at midnight India Secret: 15 अगस्त 1947, आधी रात का वह ऐतिहासिक पल जब भारत ने ब्रिटिश हुकूमत से आजादी हासिल की। जैसे ही 14 अगस्त 1947 की रात 12 बजे घड़ी की सुइयां आपस में मिली वैसे ही आजादी का ऐलान हुआ। ये रात कोई आम रात नहीं थी बल्कि जश्न की रात थी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि स्वतंत्रता का समय रात 12 बजे ही क्यों तय किया गया? जबकि पाकिस्तान को तो 14 अगस्त 1947 को तो दिन में ही आजादी मिल गई थी। फिर ऐसा क्या हुआ जो भारत को आधी रात का इंतजार करना पड़ा।
इसके पीछे सिर्फ एक संयोग नहीं, बल्कि एक बड़ी और अहम वजह थी। इस साल 79वां स्वतं6ता दिवस मनाया जाएगा। आइए जान लेते हैं कि रात 12 बजे ही क्यों देश को आजादी मिली। आजादी के समय के इस रहस्य को सुलझाया है दो विदेशी इतिहासकारों डॉमिनिक लैपियर और लैरी कॉलिंस ने, उन्होंने आजादी के कुछ समय बाद अपनी किताब 'फ्रीडम एट मिडनाइट' में इस बात का जिक्र किया है।

ज्योतिषों ने बताया था आजादी का समय
'फ्रीडम एट मिडनाइट' में बताया था कि आजादी के समय को चुनने के पीछे ज्योतिषियों का मत था। दरअसल, 14 अगस्त 1947 को दिन में ज्योतिषीय दृष्टि से "अमंगल मुहूर्त" था। उस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ऐसी थी कि स्वतंत्रता की घोषणा किसी और समय पर होती, तो उसे अशुभ माना जाता। पंडितों के अनुसार, आधी रात के बाद "अभिजीत मुहूर्त" शुरू हो रहा था, जो बेहद शुभ और सफलता का प्रतीक है। यही वजह रही कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और अन्य नेताओं ने स्वतंत्रता की घोषणा आधी रात को करने का निर्णय लिया।
ब्रिटिश कानून का प्रभाव
ब्रिटिश संसद ने Indian Independence Act 1947 पारित किया, जिसमें साफ लिखा था कि भारत को 15 अगस्त से स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिलेगा। ब्रिटेन के समयानुसार जब 14 अगस्त की रात लंदन में आधी रात पार हो रही थी, तब भारत में 15 अगस्त की शुरुआत हो रही थी। इसलिए आधी रात का समय कानूनी रूप से भी सही माना गया।

प्रतीकात्मक नया सवेरा
रात 12 बजे का समय पुराने अंधकारमय युग के अंत और नए उजाले की शुरुआत का प्रतीक है। स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का क्षण माना, जो पूरी तरह आजादी के भाव को दर्शाता था।
पंडित नेहरू का ऐतिहासिक भाषण
15 अगस्त 1947 को ही देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में अपना प्रसिद्ध भाषण "Tryst with Destiny" दिया था। यह भाषण भारतीय स्वतंत्रता के संकल्प, बलिदान और भविष्य की दिशा को समर्पित था।
राजनीतिक सहमति
भारत के नेताओं और ब्रिटिश अधिकारियों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि स्वतंत्रता का क्षण न केवल शुभ समय में हो, बल्कि यह ऐतिहासिक रूप से यादगार भी बने। आधी रात का समय इसके लिए बिल्कुल उपयुक्त माना गया।



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