Latest Updates
-
योगिनी एकादशी की शुभकामनाएं संस्कृत में भेजें, देवभाषा के इन मंत्रों और सूक्तियों से अपनों का दिन बनाएं मंगलमय -
इस कथा के बिना अधूरा है योगिनी एकादशी व्रत, मिलता है 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य -
Yogini Ekadashi 2026 Wishes: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', इन भक्तिमय संदेशों से अपनों को दें शुभकामनाएं -
बारिश का पानी स्किन के लिए अच्छा या खराब, जानें मानसून में इसके फायदे और नुकसान -
AC कोच बना 'हनीमून सुइट', फूलों-गुब्बारों से सजाया ट्रेन का डिब्बा, वायरल हुआ वीडियो, जानें रेवले के नियम -
Kiara Advani ने यश संग 'तबाही' में दिए दिए इंटीमेट सीन, जानें कैसे शूट किए जाते हैं बोल्ड सीन? -
एक्टर राजेश शर्मा को जहरीले कीड़े ने काटा, हालत नाजुक, जानें मानसून में क्यों बढ़ता है सांप कीड़ों का खतरा -
Yogini Ekadashi 2026: कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? इस दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम -
Varalakshmi Vrat 2026: सावन के आखिरी शुक्रवार को करें ये 5 उपाय, मां लक्ष्मी बरसाएंगी धन-दौलत -
पंजाब की पहली महिला ड्राइवर और पायलट थीं शेफ विकास खन्ना की मां बिंदु खन्ना, राजीव गांधी के साथ ली थी ट्रेनिंग
Manmohan Singh: हमेशा नीली पगड़ी ही क्यों पहनते थे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह?
Manmohan Singh: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का दिल्ली के एम्स अस्पताल में 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे एक प्रख्यात अर्थशास्त्री और देश के पहले सिख प्रधानमंत्री थे।
2004 से 2014 तक दस वर्षों तक प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी पहचान हमेशा नील पगड़ी पहनने वाले एक सौम्य और विद्वान नेता के रूप में रही।

मनमोहन सिंह हमेशा क्यों पहनते थे नील पगड़ी?
2006 में, जब डॉ. मनमोहन सिंह को केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से "डॉक्टरेट ऑफ लॉ" की उपाधि दी गई, तो उन्होंने नील पगड़ी पहनने का कारण साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे केम्ब्रिज में पढ़ाई कर रहे थे, तो नील पगड़ी उनकी पहचान बन गई थी। उनके दोस्तों ने उन्हें "ब्लू टर्बन" नाम दिया था। यह रंग उन्हें बेहद प्रिय था, और इसीलिए उन्होंने इसे हमेशा अपनाया।
एक उत्कृष्ट करियर की कहानी (Dr. Manmohan Singh's Career and Contributions)
डॉ. मनमोहन सिंह का पेशेवर और राजनीतिक सफर शानदार रहा। वे एक सम्मानित अर्थशास्त्री, शिक्षक और प्रशासक थे।
- शिक्षा और प्रारंभिक करियर:
1957 से 1959 तक वे अर्थशास्त्र के वरिष्ठ व्याख्याता और 1963 से 1965 तक प्रोफेसर रहे।
1966 में वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मानद प्राध्यापक बने।
- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सेवा:
1966-69 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के UNCTAD में काम किया।
1972 में वे भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार बने।
1982 से 1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे।
1985-87 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष का पद संभाला।
1991 में, उन्होंने देश के वित्त मंत्री के रूप में ऐतिहासिक आर्थिक सुधार लागू किए।
- राजनीतिक जीवन:
2004 से 2014 तक उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी सेवाएँ दीं।
लेखन और योगदान
डॉ. सिंह ने 1964 में "इंडियाज एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रॉस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ-सस्टेन्ड ग्रोथ" नामक पुस्तक लिखी। इसके अलावा, उन्होंने अर्थशास्त्र पर कई महत्वपूर्ण लेख लिखे, जो प्रमुख जर्नल्स में प्रकाशित हुए।
एक सादगी भरा जीवन
डॉ. मनमोहन सिंह न केवल एक कुशल नेता थे, बल्कि उनकी सादगी और निष्ठा भी सभी के लिए प्रेरणा थी। उनकी नील पगड़ी और शांत व्यक्तित्व उनकी पहचान बने रहे। उनका यह अनोखा स्टाइल और उनका योगदान भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में हमेशा याद रखा जाएगा।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications