Latest Updates
-
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश
Manmohan Singh: हमेशा नीली पगड़ी ही क्यों पहनते थे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह?
Manmohan Singh: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का दिल्ली के एम्स अस्पताल में 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे एक प्रख्यात अर्थशास्त्री और देश के पहले सिख प्रधानमंत्री थे।
2004 से 2014 तक दस वर्षों तक प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी पहचान हमेशा नील पगड़ी पहनने वाले एक सौम्य और विद्वान नेता के रूप में रही।

मनमोहन सिंह हमेशा क्यों पहनते थे नील पगड़ी?
2006 में, जब डॉ. मनमोहन सिंह को केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से "डॉक्टरेट ऑफ लॉ" की उपाधि दी गई, तो उन्होंने नील पगड़ी पहनने का कारण साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे केम्ब्रिज में पढ़ाई कर रहे थे, तो नील पगड़ी उनकी पहचान बन गई थी। उनके दोस्तों ने उन्हें "ब्लू टर्बन" नाम दिया था। यह रंग उन्हें बेहद प्रिय था, और इसीलिए उन्होंने इसे हमेशा अपनाया।
एक उत्कृष्ट करियर की कहानी (Dr. Manmohan Singh's Career and Contributions)
डॉ. मनमोहन सिंह का पेशेवर और राजनीतिक सफर शानदार रहा। वे एक सम्मानित अर्थशास्त्री, शिक्षक और प्रशासक थे।
- शिक्षा और प्रारंभिक करियर:
1957 से 1959 तक वे अर्थशास्त्र के वरिष्ठ व्याख्याता और 1963 से 1965 तक प्रोफेसर रहे।
1966 में वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मानद प्राध्यापक बने।
- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सेवा:
1966-69 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के UNCTAD में काम किया।
1972 में वे भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार बने।
1982 से 1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे।
1985-87 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष का पद संभाला।
1991 में, उन्होंने देश के वित्त मंत्री के रूप में ऐतिहासिक आर्थिक सुधार लागू किए।
- राजनीतिक जीवन:
2004 से 2014 तक उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी सेवाएँ दीं।
लेखन और योगदान
डॉ. सिंह ने 1964 में "इंडियाज एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रॉस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ-सस्टेन्ड ग्रोथ" नामक पुस्तक लिखी। इसके अलावा, उन्होंने अर्थशास्त्र पर कई महत्वपूर्ण लेख लिखे, जो प्रमुख जर्नल्स में प्रकाशित हुए।
एक सादगी भरा जीवन
डॉ. मनमोहन सिंह न केवल एक कुशल नेता थे, बल्कि उनकी सादगी और निष्ठा भी सभी के लिए प्रेरणा थी। उनकी नील पगड़ी और शांत व्यक्तित्व उनकी पहचान बने रहे। उनका यह अनोखा स्टाइल और उनका योगदान भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में हमेशा याद रखा जाएगा।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications