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Women's Day 2025 :पति ने बेघर किया तो बेटियों की खातिर बन गई कैब ड्राइवर, मजबूत इरादों से बदली तकदीर
Women's Day 2025 : जयपुर की रहने वाली गंगा मंडल (35) अपनी दो बेटियों के साथ रहती हैं और घर में अकेली कमाने वाली हैं। पहले वे हाउसवाइफ थीं, लेकिन बेटियों के जन्म के बाद पति ने उन्हें घर से निकाल दिया। मजबूरी में उन्होंने अलग-अलग छोटे काम किए-कभी सिक्योरिटी गार्ड बनीं, तो कभी घरों में झाड़ू-पोछा किया। बेटियों की परवरिश और पढ़ाई के लिए उन्होंने ड्राइविंग सीखी और आज कैब ड्राइवर के रूप में काम कर रही हैं। उन्हें गर्व है कि इस पेशे के जरिए वे अपनी बेटियों को अच्छी जिंदगी दे पा रही हैं।
गंगा कहती हैं, "मैं चाहती हूं कि मेरी बेटियां पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनें, ताकि कभी घरेलू हिंसा का शिकार न हों और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और अपना भविष्य संवारे।" इंटरनेशनल वूमेन्स डे के मौके पर हम आपको आज बता रहे हैं लेडी ड्राईवर गंगा मंडल की प्रेरणादायक काहानी।

लोगों से मिले खूब ताने
मैंने सिलाई और दूसरे छोटे-मोटे काम करके कमाना शुरू किया। तभी मुझे आजाद फाउंडेशन के बारे में पता चला, ये संस्था बेसहारा महिलाओं को ड्राइविंग सिखाती है और महिलाओं को संबल बनाने का काम करती है। 2016 में मैंने ड्राइविंग सीखी इसके बार 2017 से कैब सर्विस में आ गई। मेरे परिवार में कोई नहीं था, जो मुझे रोकता, लेकिन पड़ोस के लोग ताने देने लगे। किसी ने कहा, "कैब चलाना पुरुषों का काम है, तुम्हें शोभा नहीं देता।" कुछ महिलाएं भी बोलीं, "सिलाई-बुनाई छोड़कर मर्दों वाला काम क्यों कर रही हो?" लेकिन मैं डगमगाई नहीं। मैंने जवाब दिया, "यह मेरी जिंदगी है, और मैं अपने तरीके से जीऊंगी!" समाज के तानों की परवाह किए बिना, मैंने अपने सपनों को सच करने की राह चुनी।
लेडी ड्राइवर देखकर कैंसिल कर देते थे बुकिंग
गंगा आगे कहती हैं, 'बहुत से लोग लेडी ड्राइवर देखकर ही बुकिंग कैंसि कर देते हैं। गंगा बताती है कि जहां मर्द पैसेंजर बुकिंग के दौरान मेरी काबिलयत को शक की निगाहों से देखते थे, वहीं मेरी गाड़ी में जो महिलाएं बैठती हैं, वो काफी खुश होती हैं और कहती हैं कि हमें आप पर गर्व है। इसके अलावा अगर लेट नाइट लेडीज पैसेंजर को लेडी ड्राइवर मिल जाए तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता।
बेटियां बनी शक्ति
गंगा बताती हैं कि उन्होंने अपनी मेहनत से खुद की गाड़ी खरीदी और लोन पर घर भी ले लिया। वे अपनी दोनों बेटियों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने देतीं। बड़ी बेटी होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रही है, जबकि छोटी बेटी 12वीं के बाद ब्यूटीशियन कोर्स करना चाहती है। गंगा कहती हैं कि उनके अब तक के संघर्ष में उनकी बेटियां ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहीं, जिनकी वजह से वे आज इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं।
दिल से निकाल दिया डर
गंगा कहती हैं कि इस पेशे ने उनके अंदर का डर निकाल दिया। शुरुआत में रात के समय सवारी लेते हुए उन्हें डर लगता था, लेकिन उन्होंने अपने मन में ठान लिया कि डरना नहीं है। फिर जब भी बुकिंग लेती, चाहे अंदर से कितनी भी डरी होतीं, चेहरे पर वो डर दिखने देतीं और धीरे-धीरे उनमें कॉन्फिडेंस आने लगा और वो अपने पेशे में ढल गईं।



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