Latest Updates
-
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क -
बिना मारे चूहों को घर से भगाने का देसी तरीका! आटे में मिलाकर रख दें ये एक चीज, फिर कभी नहीं आएंगे नजर -
Pahadi Crispy Snack Singal Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और कुरकुरा स्वाद -
कौन हैं पंकज त्रिपाठी के भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी? आखिर क्यों हुआ जानलेवा हमला, गंभीर हालत में AIIMS में भर्ती -
Swapna Shastra: सपने में किन्नर को देखना होता है शुभ और अशुभ संकेत? जानिए इसका मतलब -
Cooling Summer Lunch Curd Rice Recipe: गर्मियों में पेट को ठंडक देने वाली सबसे आसान रेसिपी -
काले धब्बों वाले प्याज खाना चाहिए या नहीं? सेहत पर क्या होगा असर, यहां जानें इसका सही जवाब -
Ambubachi Mela 2026: कामाख्या मंदिर में शुरू हुआ अंबुबाची मेला, 3 दिनों तक बंद रहेंगे कपाट, जानें इसका महत्व -
Soft Dahi Paratha Recipe: घर पर बनाएं एकदम नरम और स्वादिष्ट दही का पराठा -
Aaj Ka Rashifal 22 June 2026: सोमवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी महादेव की कृपा, धन लाभ के प्रबल योग
Hiroshima की वो सुबह जब हर तरफ मचा मौत का तांडव, कैसे 6 अगस्त बन गया 'ब्लैक डे'
Hiroshima Day 2025: 6 अगस्त 1945... एक ऐसी तारीख जिसे सुनते ही रूह कांप उठती है। ये वो सुबह थी जब इंसान ने ही इंसानियत को आग के हवाले कर दिया। हिरोशिमा में उगता सूरज तबाही और मौत की गर्मी लेकर आया, और पल भर में एक जिंदा, सांस लेते शहर को खामोश मलबे में तब्दील कर दिया। ये सुबह सिर्फ हिरोशिमा के लिए नहीं बल्कि पुरी दुनिया के लिए मनहूस थी। इस काली सुबह ने भविष्य और मानवता को झकझोर कर रख दिया। हम बात कर रहे हैं हिरोशिमा पर हुए परमाणु हमले की जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर 'लिटिल बॉय' नामक परमाणु बम गिराया।
इस हमले ने कुछ ही सेकंड में करीब 70 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली। हजारों घायल हुए, और कई पीढ़ियों तक इसका असर देखने को मिला क्योंकि भविष्य में होने वाले बच्चे अपंग पैदा हुए।
80 साल पहले का दर्द आज भी ताजा
6 अगस्त का दिन दुनिया के इतिहास में काले दिवस के रुप में लिखा जाता है। ये वही दिन था जब जापान के हिरोशिमा में उगता सूरज तबाही लेकर आया था। 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर 'लिटिल ब्वॉय' परमाणु बम गिराया जिसने पूरे हंसते-खेलते शहर को लाशों के ढेर में बदल दिया। समय था करीब सुबह से 8:15, कुछ लोग सोए हुए थे तो कुछ काम पर निकलने की तैयारी कर रहे थे। मासूम बच्चे स्कूल जाने के लिए बस्ता सजा रहे थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि पल भर में वो मौत के आगोश में जाने वाले हैं। फिर अमेरिका ने गिराया परमाणु बम और शहर बन गया कब्रिस्तान।

70 हजार से ज्यादा लोग मारे गए
इस हमले की भयावता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पल भर में ही शहर तबाह हो गया और करीब 70 हजार से ज्यादा लोग मारे गए। हजारों लोग घायल हो गए और जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। पूरे परिवार तबाह हो गए तो किसी ने अपना भाई खो दिया किसी के पिता का साया सिर से उठ गया। बच्चे अनाथ हो गए और महिलाएं विधवा हो गईं। द्वितीय विश्व युद्ध अपने चरम पर था। अमेरिका ने जापान को युद्ध रोकने की चेतावनी दी थी, लेकिन जब जापान पीछे नहीं हटा, तो अमेरिका ने दुनिया के पहले परमाणु बम का इस्तेमाल करने का फैसला लिया।
सालों तक हरा रहा जख्म
इस परमाणु हमले का दर्द सालों बाद तक हर रहा क्योंकि लिटिल ब्वॉय' परमाणु के रेडिएशन का असर लंबे समय तक रहा। वहां पैदा होने वाले बच्चे अपंग पैदा हुए। वर्षों बाद तक कैंसर, जन्म दोष, और मानसिक रोग जैसे दुष्प्रभाव सामने आते रहे। मिट्टी, पानी और हवा में रेडिएशन का असर आज भी महसूस किया जा सकता है। हिरोशिमा और उसके बाद नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों ने दुनिया को दिखा दिया कि युद्ध में जीत कैसी भी हो, इंसानियत हमेशा हारती है। यह हमला न केवल एक शहर की तबाही थी, बल्कि यह सवाल था क्या विज्ञान का इस्तेमाल विनाश के लिए होना चाहिए?



Click it and Unblock the Notifications