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Youtuber अंकुश बहुगुणा को 40 घंटे तक रखा डिजिटल अरेस्ट, जानें क्या है ये ठगी का नया तरीका
Ankush Bahuguna Digital Arrest : यूट्यूबर अंकुश बहुगुणा, जिनके यूट्यूब पर 7.45 लाख सब्स्क्राइबर हैं और जो अपने कॉमेडी व मेकअप टिप्स के लिए मशहूर हैं, हाल ही में एक डिजिटल स्कैम का शिकार हुए। अंकुश ने एक वीडियो पोस्ट कर बताया कि उन्हें 40 घंटे तक "डिजिटल अरेस्ट" झेलना पड़ा। उन्होंने कहा, "मैं अभी भी सदमे में हूं। मैंने पैसे और मानसिक शांति खो दी। यह वीडियो पोस्ट कर रहा हूं ताकि अन्य लोग सतर्क रहें।"
अंकुश ने बताया कि स्कैमर्स किस हद तक लोगों को धोखा देने के लिए जा सकते हैं। उन्होंने अपनी कहानी साझा कर लोगों को सतर्क रहने की अपील की, क्योंकि कई बार स्कैम का तुरंत पता चल जाता है, लेकिन यदि आप उनके झांसे में आ जाएं, तो यह मुश्किलें बढ़ा सकता है। उनके इस वीडियो ने दर्शकों को ऑनलाइन फ्रॉड के प्रति जागरूक किया। आइए इस मामले से समझते हैं कि आखिर क्या है डिजिटल अरेस्ट जिसके बाद कई लोगों को लग चुका है करोड़ों का चूना।

डिजिटल हाउस अरेस्ट क्या है?
डिजिटल हाउस अरेस्ट साइबर ठगी का एक उभरता हुआ तरीका है, जिसमें ठग लोगों को ऑडियो या वीडियो कॉल के माध्यम से फंसाते हैं। वे खुद को पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), या कस्टम अधिकारी बताते हैं।
साइबर एक्सपर्ट के अनुसार, ठग पीड़ितों को फंसाने के लिए कई हथकंडे अपनाते हैं। वे दावा करते हैं कि आपने चाइल्ड पोर्न देखा है या आपके आधार/पैन नंबर का इस्तेमाल किसी ड्रग्स बुकिंग में हुआ है। इसके बाद वे वीडियो कॉल पर पूछताछ के बहाने बुलाते हैं।
ठग एक नकली पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप तैयार करते हैं, जहां वे पुलिस वर्दी में होते हैं, जिससे सब कुछ असली लगता है। वे धमकी देते हैं कि यदि पीड़ित ने परिवार या दोस्तों को बताया, तो गंभीर परिणाम होंगे। इस तरह, ठग पीड़ित को मानसिक दबाव डालकर डिजिटल स्पेस में घंटों तक "हिरासत" में रखते हैं और उनसे पैसे वसूलने की कोशिश करते हैं।इसलिए, सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
कैसे करते हैं आपको डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से वीडियो कॉल करते हैं। कॉल के दौरान वे पीड़ित को किसी अपराध जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या अन्य अवैध गतिविधियों में फंसने का आरोप लगाते हैं। वीडियो कॉल का बैकग्राउंड पुलिस स्टेशन जैसा बनाया जाता है, जिससे यह असली लगने लगे। ठग पीड़ित को धमकाते हैं कि वे इस मामले के बारे में परिवार या किसी और को न बताएं। इस झांसे में फंसा व्यक्ति सोचता है कि यह पुलिस की पूछताछ है। ठग धमकी देकर लगातार वीडियो कॉल पर बनाए रखते हैं और केस बंद करने या गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर मोटी रकम की मांग करते हैं।
डिजिटल अरेस्ट की पहचान कैसे करें?
डिजिटल अरेस्ट के ठगों से बचने के लिए सतर्कता जरूरी है। मुंबई पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार, अगर आपके पास अनजान नंबर से फोन या व्हाट्सएप कॉल आती है, तो इन बिंदुओं को याद रखें:
- पुलिस अधिकारी कभी वीडियो कॉल के जरिए अपनी पहचान नहीं बताते।
- पुलिस आपको कभी कोई एप डाउनलोड करने के लिए नहीं कहेंगे।
- पहचान पत्र, FIR की कॉपी या गिरफ्तारी वारंट ऑनलाइन नहीं साझा किया जाता।
- पुलिस अधिकारी वॉयस या वीडियो कॉल पर बयान नहीं लेते।
- पुलिस किसी को पैसे या पर्सनल जानकारी देने के लिए धमकाती नहीं है।
- पुलिस कॉल के दौरान अन्य लोगों से बात करने से नहीं रोकती।
- डिजिटल अरेस्ट का कानूनी प्रावधान नहीं है, और असली गिरफ्तारी होती है।
यदि इन में से कोई बात हो रही हो, तो यह ठगी हो सकती है।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?
भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सीईआरटी-एन) ने डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए निम्नलिखित सलाह दी है:
सतर्क रहें: सरकारी एजेंसियां वॉट्सएप या स्काइप का इस्तेमाल नहीं करतीं, ऐसे कॉल पर शक होने पर तुरंत फोन काटें।
इग्नोर करें: साइबर ठग मनी लॉन्ड्रिंग या चोरी के आरोपों के तहत कॉल करते हैं, ऐसे संदेशों पर ध्यान न दें।
घबराएं नहीं: गिरफ्तारी की धमकी देने वाले ठगों से घबराएं नहीं, न ही पर्सनल जानकारी दें।
जल्दबाजी से बचें: ठगों के सवालों का जवाब शांतिपूर्वक दें, निजी जानकारी साझा न करें।
साक्ष्य जुटाएं: कॉल के स्क्रीनशॉट या रिकॉर्डिंग सेव करें।
फिशिंग से बचें: अविश्वसनीय ई-मेल्स से सावधान रहें।
रिपोर्ट करें: संदिग्ध गतिविधि को 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।



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