Latest Updates
-
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश
Zero Shadow Day: जानें क्या होता है जीरो शैडो डे और क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण
25 अप्रैल 2023, मंगलवार के दिन बेंगलुरु के लोग एक दुर्लभ खगोलीय घटना का अनुभव करेंगे। कुछ पल के लिए होने वाली इस घटना के तहत शहर में खड़ी वस्तुओं की छाया नहीं रहेगी।
कर्नाटक की राजधानी में यह घटना दोपहर 12 बजकर 17 मिनट पर घटित होगी और इसे जीरो शैडो डे का नाम दिया गया है। इसे 'नो शैडो डे' भी कहा जाता है।

जीरो शैडो डे क्या है?
जीरो शैडो डे एक ऐसी घटना है जो साल में दो बार होती है। इस दौरान जब सूरज सीधे सिर के ऊपर होता है तब कोई छाया नहीं बनती है। इसके पीछे यह तथ्य है कि सूर्य पृथ्वी की सतह के बिल्कुल लंबवत है, जिससे छाया का निर्माण नहीं होता है।
इस घटना के दौरान, सूर्य पूरे वर्ष के किसी भी अन्य दिन के मुकाबले आकाश में अपने उच्चतम बिंदु पर होता है, जिससे सूर्य का एक अबाधित दृश्य देखा जा सकता है।
जीरो शैडो डे आमतौर पर साल में दो बार होता है और यह खगोलविदों और अन्य वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। यह उनके लिए सूर्य की गति और आकाश में इसकी स्थिति के अध्ययन के लिए एक सुनहरा मौका मुहैया कराता है। इस खगोलीय घटना को कुछ देशों में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में भी मनाया जाता है।
जीरो शैडो डे के पीछे का विज्ञान क्या है?
जीरो शैडो डे का विज्ञान सूर्य की तरफ पृथ्वी के झुकाव पर आधारित है। पृथ्वी के झुकाव के कारण ही हम विभिन्न ऋतुओं का अनुभव करते हैं। इससे यह भी निर्धारित होता है कि किसी भी समय सूर्य की किरणें हम तक कितनी पहुंचती हैं।
एक जीरो शैडो डे अर्थात शून्य छाया दिवस पर सूर्य सीधे सिर के ऊपर होता है, और छाया की लंबाई 0 होती है। ऐसा इस वजह से होता है क्योंकि सूर्य की किरणें पृथ्वी से लंबवत कोण पर टकराती हैं।
इस झुकाव को क्रांतिवृत्त की तिर्यकता (obliquity of the ecliptic) के रूप में जाना जाता है और यही कारण है कि इन अक्षांश क्षेत्रों में सूर्य वर्ष में केवल दो बार सीधे सिर के ऊपर होता है।
जीरो शैडो डे के समय में भौगोलिक स्थिति के आधार पर पूरे वर्ष में थोड़ा सा बदलाव आता है। जीरो शैडो डे की तारीख दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दिन की लंबाई के साथ-साथ पृथ्वी के झुकाव के कारण भी अलग-अलग होती है।
जीरो शैडो के दिन कैसा मौसम होता है?
नो शैडो घटना का मौसम पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता है। अगर स्थानीय मौसमी प्रभावों को नजरअंदाज किया जाए तो आमतौर पर यह दिन उस इलाके का तेज गर्मी का दिन ही होता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications