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रामायण जैसी सुबह और गीता जैसी सांझ में साहित्य साधक मंच ने किया साहित्यकारों का सम्मान!
बैंगलोर की अग्रणी साहित्यिक संस्था 'साहित्य साधक मंच' जो पिछले 15 वर्षों से अनवरत हर माह साहित्यिक कार्यक्रमों को आयोजन करती आ रही है, ने अपना 190 वां कार्यक्रम कानपुर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार श्री हरि नारायण तिवारी की अध्यक्षता, कानपुर के लब्ध प्रतिष्ठ गीतकार डा.राधेश्याम मिश्र के मुख्य आतिथ्य एवं शाहजहांपुर की सुप्रसिद्ध कवयित्री डा. सरिता बाजपेई के विशिष्ठ आतिथ्य में आयोजित किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ पद्मा श्रीनिवासन वसुधा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में श्री हरि नारायण तिवारी जी को भारतेन्दु हरिश्चंद्र, डा राधेश्याम मिश्रा को पद्मश्री गोपालदास नीरज और डा. सरिता बाजपेई को महादेवी वर्मा सम्मान से विभूषित किया गया। सम्मान स्वरूप अंग वस्त्र, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिह्न और नकद राशि प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के द्वितीय चरण में उपस्थित रचनाकारों ने अपनी श्रेष्ठ प्रस्तुतियों से समय को बाँध दिया। डॉ राधेश्याम मिश्र ने 'ज़िन्दगी में सभी की एक ही कहानी है,प्यार करले वो पगले क्या आनी क्या जानी है ' हरि नारायण तिवारी ने 'द्वेष राग अहम को मिटा के मिलता है यदि, तीर्थराज पावन प्रयाग बन जाता है' डा सरिता बाजपेई ने 'वही पुराना पनघट गागर, जन्म- जन्म ये तन रीता, सुबह हुई रामायण जैसी, साँझ हुई जैसे गीता, सुरेंद्र कोहली सूरी ने 'हमारे बाद इस महफ़िल में दीवाने कहां होंगे,न होंगे हम तो क्या इस दिल के अफ़साने बयाँ होंगे ग़ज़ल से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वहीं रचना उनियाल ने 'मौन माँ है नेत्र कब हैं बोलते, झुर्रियों में अनुभवों को जोहते' गीता चौबे गूंज ने सरस सुवास समीर बहे यह रम्य प्रदेश सुमंगल है ,सहज विनोद घुले उर में यह भाव सदैव सुनिर्मल है' अर्जुन सिंह ने ' मुझे मेरी जिन्दगी कहां ले के आई, अरे मै हूँ उससे वो मुझ में समाई' और सुधा आहलुवालिया ने चंद्रमुख से आवरण सरकाईये,रश्मि घट भर चांदनी बरसाईये सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर विवस कर दिया।

इनके अलावा उर्मिला श्रीवास्तव ,पूनम बेलानी ,वसंत दास ,पद्मा श्रीनिवासन वसुधा ,मृदुला सिंह चौहान,बापू गौड़ा पाटिल,श्रीलाल जोशी,ज्ञानचंद मर्मज्ञ,मणि बेन द्विवेदी,राही राज,अंजू भारती ,प्रीति राही एच आर नरसिम्हन,प्रभात रंजन,और मंजू वेंकट ने अपनी उत्कृट रचनाओं से श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। कार्यक्रम का सञ्चालन मंच के अध्यक्ष ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने किया।



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