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AIIMS ने खोली पोल, 34 फीसदी स्कूली बच्चों में बढ़ रही है डिस्लिपिडेमिया, जानें कितनी गंभीर है ये बीमारी?
What is Dyslipidemia : देश की राजधानी दिल्ली के प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 34 फीसदी बच्चे डिसलिपिडेमिया (Dyslipidemia) नामक बीमारी से ग्रसित पाए गए हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा एम्स (AIIMS) की हालिया रिसर्च में सामने आया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक गंभीर संकेत है कि बच्चों की सेहत और जीवनशैली तेजी से बिगड़ रही है, जो कि चिंता का विषय है।
आइए इसी रिसर्च को मद्देनजर रखते हुए आपको बताते हैं कि आखिर ये डिसलिपिडेमिया क्या है और बच्चों के लिए कितनी खतरनाक हैं ये बीमारी?

क्या होता है डिसलिपिडेमिया?
डिसलिपिडेमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में लिपिड्स (वसा जैसे कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स) का संतुलन बिगड़ जाता है। जयपुर स्थित इंटरनल अस्पताल के वरिष्ठ शिशु विशेषज्ञ डॉक्टर विवेक शर्मा कि इस स्थिति में LDL यानी 'खराब कोलेस्ट्रॉल' बढ़ जाता है, जबकि HDL यानी 'अच्छा कोलेस्ट्रॉल' घट सकता है। इससे दिल की बीमारियों, ब्रेन स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चों में क्यों बढ़ रही है यह बीमारी?
रिसर्च के मुताबिक बच्चों में पेट की चर्बी भी काफी बढ़ रही है। इसका सीधा संबंध खराब खानपान, फास्ट फूड की अधिकता और फिजिकल एक्टिविटी की कमी से है। आजकल के बच्चे ज्यादातर समय मोबाइल, टीवी या लैपटॉप पर बिताते हैं, जिससे उनका शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है।
भविष्य में क्या होंगे इसके परिणाम?
कम उम्र में डिसलिपिडेमिया होना एक चेतावनी है कि आने वाले समय में इन बच्चों को मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और हाई बीपी जैसी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का संकेत है, जिस पर तुरंत ध्यान देना आवश्यक है।
कैसे करें बचाव?
शिशु विशेषज्ञ डॉक्टर विवेक शर्मा सलाह देते हैं कि बच्चों की डाइट में ताजे फल, हरी सब्जियां, प्रोटीन और विटामिन शामिल किए जाने चाहिए। फास्ट फूड को बिल्कुल सीमित कर दें। बच्चों को खेलने-कूदने और नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम के लिए प्रेरित करें। साथ ही यह भी जरूरी है कि वे मोबाइल और गैजेट्स पर अनावश्यक समय न बिताएं।



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