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जाने दूध के दांतों के आठ तथ्य
बच्चों की गोंददार मुस्कान बहुत प्यारी लगती है! उतना ही प्यारा है, उनके मुँह में दिखाई देने वाला मोती जैसे पहला सफेद दांत। इससे पहले की आप जान पाएं, आपके बच्चे के पूरे दूध के दांत आ चुके होंगे। हालांकि, माता पिता अक्सर बच्चे के दूध के दांतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि ये दांत "नित्य" नहीं रहने वाले और जल्द ही "टूट जाएंगे"। तो, यहाँ हम आपको दूध के दांतों से संबंधित कुछ तथ्यों के बारे में बताएंगे और उम्मीद करते हैं कि ये छोटे बच्चों के माता - पिता में जागरूकता को बढ़ाएंगे।
पहला तथ्य
बच्चों के 20 दूध के दांत होते हैं। ये 6 महीनों से लेकर 1 वर्ष की आयु के बीच किसी भी समय आने शुरु हो सकते हैं। जब बच्चा 3 या 4 साल का हो जाता है तो उसके सारे दूध के दांत निकल आते हैं।
दूसरा तथ्य
दूध के दांत तब गिरते हैं जब उनके नीचे स्थित नए दांत फूटने के लिए पूरी तरह तैयार हों। केवल सामने के निचले दो दांत 6 वर्ष की आयु में गिरते हैं। फिर हर साल, बच्चे के दो से चार दूध के दांत टूटते हैं। दूध की दाढ़ें 10 से 13 साल की उम्र के बीच टूटती हैं।

तीसरा तथ्य
पहली बार दंत चिकित्सक के पास तब जाएं जब आपके बच्चे के मुंह में पहला दूध का दांत आ जाए या वह एक साल का हो जाए। वे आपको उचित मौखिक स्वच्छता और बच्चों के खाना खाने की आदतों के बारे में सलाह देंगे। ये सलाह बच्चों के दांतों को सड़ने से रोकने में काफी मददगार साबित होंगी।
चौथा तथ्य
जब बच्चों के दूध के दांत निकलने लगते हैं तो उनके मसूड़ों में दर्द होता है, वे अधिक लार टपकाते हैं, उन्हें भूख नहीं लगती तथा रात को ठीक से सो नहीं पाते। वे चिड़चिड़े हो जाते हैं और राहत पाने के लिए किसी खिलौने को या अपनी उंगलियों को चबाना चाहते हैं। गंदी वस्तुओं को या उंगलियों को चबाने से दस्त या बुखार हो सकता है। इन बीमारियों का कारण दांतों का निकलना नहीं होता और अगर आपका बच्चा बीमार है तो उसे किसी चिकित्सक के पास ले जाएं।
पांचवां तथ्य
जितनी जल्दी आप अपने बच्चों के दांतों की सफाई पर ध्यान देंगे, उतना बेहतर होगा! जन्म से लेकर एक साल की उम्र तक, दांतों और मसूड़ों को साफ एवं गीले कपड़े से साफ करें। एक साल की आयु के बाद बच्चों के दांतों को एक नरम ब्रश के साथ साफ करना शुरु करें।
छठा तथ्य
बाल फ्लोराइड़ टूथपेस्ट (500 पीपीएम) का इस्तेमाल दो साल की आयु में किया जा सकता है। जब आपका बच्चा थूकना एवं कुल्ला करना सीख आए, और टूथपेस्ट के स्वाद को स्वीकारने लगे तो आप 1000 पीपीएम वाले फ्लोराइड़ से युक्त फ्लोराइड़ टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना शुरु करें। यह सलाह उन लोगों के लिए सही है जो बिना फ्लोराइड़ वाले पानी का सेवन करते हैं। देश के अधिकांश भागों में पीने के पानी में प्राकृतिक फ्लोराइड़ नहीं होता। भारत के नगर निगम का पानी भी फ्लोराइड़ युक्त नहीं होता। अगर आप एक ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहां के पीने के पानी में फ्लोराइड़ मौजूद होता है, तो अपने बच्चे को 6 साल की आयु में फ्लोराइड़ टूथपेस्ट से ब्रश करना सिखाएं।
सातवां तथ्य
जब बच्चा दूध पीते सो जाता है, तो वह स्तन या बोतल के दूध की आखिरी घूंट को उसी समय नहूीं निगलता। यह दूध उसके दांतों के आसपास जमा हो जाता है और क्षय का कारण बन सकता है। इससे सबसे अधिक प्रभावित उसके सामने के ऊपरी दाँत और दाढ़ें होती हैं।
आठवां तथ्य
साल में दो बार अपने बच्चों के दांतों की जांच कराएं। नियमित रुप से की गई दंत चिकित्सा आपके बच्चों के दांतों को कैविटी मक्त रखने में मदद करेगी। अक्सक कई बच्चों को दंत चिकित्सा की अधिक जरुरत पड़ती है और इसके कारण दंत क्षय का बढ़ता खतरा, असामान्य विकास प्रणाली और खराब मौखिक स्वच्छता हो सकते हैं।



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