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नए पैरेंट्स ना हों परेशान, ऐसे करें नवजात शिशु की देखभाल
नवजात शिशु की देखभाल शिशु के जन्म के साथ ही शुरू हो जाती है। नए जन्मे बच्चे को बड़ी नाजुकता के साथ संभालना पड़ता है। नवजात शिशु के आने से परिवार में ख़ुशी का माहौल बन जाता है।
नवजात शिशु की देखभाल शिशु के जन्म के साथ ही शुरू हो जाती है। नए जन्मे बच्चे को बड़ी नाजुकता के साथ संभालना पड़ता है। नवजात शिशु के आने से परिवार में ख़ुशी का माहौल बन जाता है।
परिवार में नए सदस्य का हर्षोल्लास से स्वागत होता है। बच्चे के जन्म के साथ ही माता पिता का भी एक नया जन्म होता है।
शिशु की देखभाल करके उसे स्वस्थ रखने की नई जिम्मेदारी माता पिता पर आ जाती है। जानिए नवजात शिशु की देखभाल सम्बन्धी जरुरी बातें।

जितना हो सके बच्चे को गोद में लें
माँ की गोद में बच्चा अपने आपको हमेशा सुरक्षित पता है। नौ महीने माँ के पेट में रहने के बाद अचानक वह बाहर की दुनिया देखता है जिसे समझने के लिए उसे माँ या पिता की गोद चाहिए। जहाँ रहे कर वह बाहर की दुनिया को देख सकता है। साथ ही बच्चे का माँ बाप की गोद में रहना उसके लिए सकारात्मक होता है।

सही नींद लें
24 घंटों में औसत नवजात 16 घंटों तक सोता है। नींद का चक्र कितना लंबा रहेगा, यह आपके शिशु पर निर्भर करता है। वह शायद दिन में दो-दो घंटों के लिए सोए और रात में चार से छह घंटों के लिए। इसके लिए आपको बच्चे को दिन और रात का अंतर समझना होगा। इसके लिए बच्चे के कमरे में दिन में रौशनी ज्यादा और रात में कम रखें। यही नहीं बच्चे को किसी भी तरह के शोर से दूर रखें।

कंगारू मदर केयर
इसमें बच्चा माँ की छाती से कम से कम दो घंटों के लिए चिपका रहता है। कंगारू मदर केयर से बच्चे को अच्छी नींद आती है यही नहीं इससे वजन में सुधार और न्यूरोकिजिकिटिव जैसे दिक्कतें भी ठीक होती है।

सही डायपर
नवजात शिशु की त्वचा बहुत नाज़ुक और नरम होती है। इसलिए उसे शुरूआती कुछ सालों तक अतिरिक्त सावधानी और देखभाल की जरूरत होती है। डाइपर भी अगर बच्चे को सही से ना पहनाया जाए तो वह भी नुक्सान कर सकता है। इसीलिए बच्चे का डायपर बदलने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से साफ कर लें। अपने बच्चे का गन्दा डायपर निकालें। यदि वह गीला है तो, अपने बच्चे को पीठ के बल लिटाएं और डायपर निकालें और साफ़ करें। यदि कोई चकत्ते दिखे तो, उस पर थोड़ा जिंक ऑक्साइड डायपर क्रीम और पेट्रोलियम जेली लगाएं।

सही से नहलाएं
बच्चे को टब में नहलाना सही रहता है। बस इतना ध्यान दें कि टब बहुत गहरा नहीं होना चाहिए। साथ ही टब को किसी खुली जगह पर रखें, ताकि आपको उसे नहलाने में दिक्कत न हो। अगर मौसम में ठंडक है तो बच्चे को हमेशा गुनगुने पानी से नहलाएं। पानी को चेक करने के लिए अपनी कोहनी को पानी में डालें। अगर आपको गरम नहीं लगता है तो आप बच्चे को आराम से नहला सकती हैं। सबसे पहले बच्चे के हाथ-मुंह धुलें। एकदम से उस पर पानी ना डालें। बच्चे को कभी भी रेगुलर सोप से न नहलाएं। बाजार में बेबी सोप मिलते हैं, उनसे नहलाएं। आप चाहें तो बेबी लिक्विड वाश को घोल लें और उससे बेबी को नहला दें।
बच्चे को नहलाने के बाद टब से निकाल लें और तौलिये से अच्छी तरह पोंछ लें। इसके बाद उसे लोशन लगा दें और स्तनपान कराएं।



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