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सिंगल फादर, तुषार कपूर ने खोले पैरेटिंग से जुड़े ऐसे राज़ जो हर माता-पिता को जानने चाहिये
तुषार ने बताया कि पितृत्व से वे स्वयं को पूर्ण और संतोषी महसूस कर रहे हैं। आइये जानते हैं सिंगल पेरेंट, खुद तुषार भारत में सरोगेसी के नए नियमों और अन्य कई बातों के बारे में...
ठीक एक साल पहले तुषार की ज़िन्दगी में लक्ष्य का आगमन हुआ। सरोगेसी के माध्यम से सिंगल फादर (एकल पिता) बनकर उन्होंने सारी परंपराओं को तोड़ दिया। वे अपने बेटे का पहला जन्मदिन मनाने की तैयारी में हैं।
तुषार ने बताया कि पितृत्व से वे स्वयं को पूर्ण और संतोषी महसूस कर रहे हैं। आइये जानते हैं सिंगल पेरेंट, खुद तुषार भारत में सरोगेसी के नए नियमों और अन्य कई बातों के बारे में...

बच्चे के जन्म से कुछ घंटे पहले कैसा फील कर रहे थे?
हालाँकि मुझे पता था कि मैं क्या कर रहा हूँ, परन्तु उसके जन्म से पहले के कुछ घंटे दहला देने वाले थे। मैंने वैसा ही महसूस किया जैसा उस समय अन्य पिता महसूस करते हैं - बहुत ही घबराहट भरा उत्साह था। मुझे याद है जिस दिन इसका जन्म हुआ उस रात मैं सोया ही नहीं। दूसरे दिन जब डॉक्टर लक्ष्य को मेरे पास लेकर आई तब मैंने उनसे कहा कि मैं थोडा चिंतित था। उन्होंने मुझे शांत किया और कहा कि सब ठीक है। हालाँकि मैं पूरी तरह से तैयार था परन्तु जब यह होने का समय आता है तब थोड़ी घबराहट बढ़ जाती है।

उस दिन के बारे में क्या सोचते हैं तुषार?
मुझे लगता है कि मैंने बहुत ओवररिएक्ट किया। किसी पुरुष के जीवन में पितृत्व सबसे अच्छी चीज़ होती है। मैं उसे घुटनों के बल चलते हुए और बडबडाते हुए देखता हूँ और मैं जानता हूँ कि ये मेरे जीवन के सबसे अच्छे पल हैं जो वापस नहीं आयेंगे। वो बड़ा हो जाएगा और उसकी अपनी ज़िन्दगी होगी। तो जब तक वो मेरे हाथ में है उसे जितना हो सके उतना प्यार देना चाहता हूँ। मुझे पार्टियों में जाना पसंद नहीं है और मैं संतुलित जीवन जीता हूँ। तो सिंगल फादर होते हुए भी मैं अपने बच्चे के लिए वो कर रहा हूँ जो माता पिता दोनों मिलकर करते हैं।

इस निर्णय से लोंगा का क्या रिएक्शन था?
सच बताऊँ तो जब भी कोई मेरे निर्णय पर सहमत होता है तो मुझे शंका होने लगती है। आजकल बहुत अधिक ध्रुवीकरण हो रहा है - चाहे वह सरकार हो, लोग हों या फिल्म हों या यहाँ तक कि स्वतंत्रता के प्रति हमारा दृष्टिकोण। तो वास्तव में ऐसी सकारात्मक और उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिलना मेरे लिए बहुत आश्चर्य की बात थी। इसके अलावा मैं ऐसा नहीं हो जो अक्सर नियमों का उल्लंघन करता हूँ। मुझे अच्छा लगता है कि हम खुले दिमाग वाले लोग हैं।

क्या माता और पिता दोनों की भूमिका करना आसान है?
मैंने ऐसा कभी सोचा ही नहीं। मैं अपने बेटे जितना हो सके उतना समय देने की कोशिश करता हूँ। मैंने इंटरनेट और किताबों से पेरेंटिंग के बारे में कई बातें सीखी हैं। इसके अलावा मेरी कई दोस्त हैं जो मां बन चुकी हैं और जो मेरी शंकाओं को दूर करने के लिए और मेरे प्रश्नों का उत्तर देने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। हालाँकि शुरू से ही लक्ष्य के लिए हमने एक नेनी (आया) रखी है परन्तु मैं सब कुछ उसपर नहीं छोड़ता। मैं अपने बेटे के साथ हमेशा रहता हूँ। और यदि मुझे किसी काम से उसे छोड़कर जाना पड़ता है तो मैं कोशिश करता हूँ कि मैं जल्दी वापस आ जाऊं।

हमेशा पिताओं से पूछा जाता है कि क्या वे बच्चों के डाइपर बदलते हैं या उन्हें सुलाते हैं। ये वास्तव में एक पैमाने के समान लगता है जिससे पता चलता है कि वे कितने अच्छे पिता हैं....
केवल यही चीज़ें आपको ज़िम्मेदार माता पिता नहीं बनाती। केवल डाइपर बदलना, बच्चों को खाना खिलाना और उसके बाद गायब हो जाना, केवल इतना पर्याप्त नहीं है। बच्चे को आपके पास सुरक्षा की भावना अहसूस होनी चाहिए। लक्ष्य को मेरे पास रहने की आदत है। कभी कभी मैं दिन भर उसके साथ खेलता हूँ। मुझे पता होता है कि मेरा बच्चा क्या कर रहा है। उसके साथ के लिए मैं सुबह जल्दी उठ जाता हूँ। जब मैं शूटिंग नहीं कर रहा होता तो मैं अधिकतर समय उसके साथ बिताता हूँ और शाम को उसे घुमाने बाहर भी ले जाता हूँ।

आप अपने बेटे लक्ष्य में अपने पिता के क्या गुण देखना चाहेंगे?
अपने पिता के बारे में जो चीज़ मुझे अच्छी लगती है वह यह है कि वे बहुत मेहनती हैं। उन्होंने हमें आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के लिए समय के साथ समझौता किया। मैं भी अच्छा काम करना चाहता हूँ ताकि मेरे बेटे को मुझ पर गर्व हो सके। दूसरी आदत जो हमारे पिता ने हमें डाली वो है फिटनेस। उन्होंने हमें बचपन से ही फिटनेस की तरफ ध्यान देने को कहा और बताया कि ऐसा करने से हम जीवन में आगे आने
वाली परेशानियों से बचे रहेंगे। उन्होंने हमें कर एक का सम्मान करना सिखाया, चाहे वो हमारे साथ काम करता हो या हमारे लिए काम करता हो। मैं निश्चित रूप से ही अपने बच्चे को ये सब बातें सिखाना चाहूँगा।

क्या आप इस बात से नाराज़ हैं कि नए सेरोगेसी कानूनों से सिंगल फादर बनने की इच्छा रखने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा?
ये उन लोगों के लिए ठीक नहीं है जिनकी जीविका सरोगेसी पर निर्भर करती है या उन लोगों के लिए जो इस प्रक्रिया द्वारा बच्चा चाहते हैं। परन्तु सरकार को सबके बारे में सोचना पड़ता है। भारत एक बहुत बड़ा देश है और इसका सामाजिक और आर्थिक स्तर भी बहुत विस्तृत है। कानून को सबकी रक्षा समान रूप से करनी है। यह सरकार पर निर्भर करता है कि वह कोई बीच का रास्ता निकाले ताकि किसी का भी शोषण न हो तथा जो लोग सरोगेसी के माध्यम से बच्चा चाहते हैं उनकी मदद भी की जा सके।

क्या लक्ष्य को देखकर आपके माता पिता को आपके बचपन की याद आती है?
जी हाँ, मेरी मां कहती है कि वो बिलकुल मेरे जैसा है। वो कहती हैं कि वो मुझसे अधिक होशियार है। अर्थात जब उसकी उम्र का था तो मैं इतना होशियार नहीं था। मैंने उनसे कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि उसे बहुत अधिक एक्सपोज़र मिल रहा है।



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