Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख
इन वजहों से महिलाओं को प्रेगनेंट होने में आती है समस्या
माँ बनना हर महिला के जीवन में काफी अहमियत रखता है, लेकिन आजकल कुछ लाइफस्टाइल फैक्टर और हार्मोनल बदलाव की वजह से कई महिलाएं चाहकर भी मां बनने की खुशियों से वंचित रह जाती है। सिर्फ स्वास्थय और लाइफस्टाइल ही नहीं गर्भधारण न हो पाने की पीछे कई तरह की वजह होती है।
जिनके बारे में महिलाओं को मालूम होना चाहिए। अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही है तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए आइए जानते है कि किन कारणों के वजह से महिलाओं को कंसीव होने में समस्या होती है।

एन्डोमेट्रीओसिस
कई बार एन्डोमेट्रीओसिस की वजह से भी गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है। एन्डोमेट्रीओसिस में एंडोमेट्रियल की दीवारें गर्भाशय के अंदर नहीं बल्कि बाहर की तरफ विकसित होने लगती हैं, जिससे दर्दनाक मासिक धर्म होता है।

पीसीओ
पीसीओ में अंडाशय में मौजूद छोटे तरल पदार्थ से भरे सिस्ट हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं जिससे अनओव्यलैशन का खतरा रहता है। पीसीओ अभी महिलाओं में इन्फर्टिलिटी का सबसे मुख्य कारण है।

पेल्विक इन्फ्लैमटोरी डिजीज़
ये यौन संचारित रोगों से उत्पन्न संक्रमण होते हैं, जो महिला प्रजनन अंगों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे गर्भाधान में समस्या हो सकती है। इससे अंडाशय, गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अन्य महिला प्रजनन अंगों की क्षति हो सकती है। अगर आपको सेक्स या पेशाब के समय दर्द, खुजली और जलन होता है, तो टेस्ट कराएं।

थायराइड रोग
थायराइड के वजह से भी महिलाओं की फर्टिलिटी पर असर पड़ता है। थायराइड हार्मोन सेलुलर फंक्शन, ओव्यलैशन और प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं। इसलिए बच्चे की प्लानिंग से पहले थायराइड का टेस्ट ज़रूर करा लें।

दवाइयों के सेवन से
मार्केट में ऐसी कई दवाइयां उपलब्ध है जिनसे महिलाओं की फर्टिलिटी पर असर पड़ता है। उन्हीं में से एक हैं गर्भनिरोधक दवाइयां। महिलाएं अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए बहुत ज्यादा समय तक इस तरह की दवाइयों का सेवन करने लगती हैं। जिसके कारण बांझपन के होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए जरुरी है कि इस तरह की दवाइयों का नियंत्रित रूप से सेवन करें।

असामान्य पीरियड
असामान्य या अनियमित पीरियड एक संकेत है, जो महिला के बांझपन की ओर इशारा करता है। वास्तव में मासिक चक्र का अधिक लंबा यानि 35 दिन या उससे अधिक या फिर बहुत छोटा यानि 21 दिन से कम का होना ओव्यूलेशन की समस्या को दर्शाता है। कई बार स्वस्थ आहार, व्यायाम और दवा से पीरियड की अवधि को निमयित किया जा सकता है जिससे आपको कंसीव करने में मदद मिल सकती है।

फैलोपियल ट्यूब का ब्लॉक होना
फैलोपियल ट्यूब अंडों को अंडाशय से गर्भाशय तक जाने के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करती हैं। लेकिन, जब किसी कारणवश यह अंडे को गर्भाशय तक ले जाने में सफल न हो तब आप गर्भधारण करने में सक्षम नहीं होंगी। चाहे आप नियमित रूप से ओव्यूलेशन करती हों, फिर भी अवरुद्ध नलिकाएं गर्भावस्था को पूरी तरह से असंभव बना देती है। क्योंकि आपका डिंब या अंडे गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाता, और शुक्राणु (स्पर्म) भी आपके अंडे तक नहीं पहुंच सकता है, जिसके कारण आप गर्भवती नहीं हो पाती हैं।

आयु
डिंब की खराब गुणवत्ता और अनियमित डिंबोत्सर्जन, हॉर्मोन की कमी या असंतुलन, अनियमित पीरियड्स जैसी समस्याओं के चलते प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है। ये सभी समस्याएं अक्सर उम्र संबंधी होती हैं, खासकर की डिंब की घटती गुणवत्ता। गर्भधारण में उम्र बड़ी भूमिका निभाती है। इसलिए डॉक्टर महिलाओं को समय पर प्रेगनेंसी की सलाह देते हैं।

मेल इंफर्टिलिटी
एक शोध के अनुसार बीस से तीस प्रतिशत दंपति में गर्भधारण से जुड़ी समस्या के पीछे केवल पुरुषों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। इसलिए जरुरी नहीं कि आप ही इस समस्या से जूझ रही हैं, आपके साथी में भी बांझपन की समस्या हो सकती है। इसलिए उनसे बात करें और अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह लें, इस तरह की समस्या को आसानी से दूर किया जा सकता है।



Click it and Unblock the Notifications
