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Duck Walking During Pregnancy: प्रेगनेंसी के दौरान 'डक वॉकिंग' करने की डॉक्टर क्यों देती हैं सलाह, जानें यह
Duck Walking During Pregnancy : प्रेगनेंसी के तीसरे तिमाही लगते ही महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी के लिए जतन करना शुरु कर देती है। डॉक्टर भी प्रेग्नेंट महिलाओं को कुछ ऐसी एक्सरसाइज करने की सलाह देते है जो नॉर्मल डिलीवरी में मदद करते हैं। इन्हीं में से एक एक्सरसाइज है डक वॉक। अमूमन 8 वां महीने के आसपास डॉक्टर डक वॉक करने की सलाह देते हैं।
डक वॉकिंग प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए बहुत ही ज़रूरी एक्सरसाइज़ होती है। यह एक्सरसाइज उन महिलाओं के लिए और भी ज़्यादा फायदेमंद होती है जिनके बच्चे का सिर नीचे की तरफ हो। इससे नॉर्मल डिलीवरी में मदद मिलती है।
फर्टिलिटी कंसलटेंट डॉक्टर कविता वेंकटेशन ने इंस्टाग्राम वीडियो के ज़रिये बताया कि सिंपल एक्सरसाइज जैसे कि स्क्वाट्स, लंजिस और क्रैब वॉक डक वॉकिंग की केटेगरी में आती हैं। डक वॉकिंग से आपकी हेल्थ अच्छी होती है और लोअर बैक का दर्द भी ठीक होता है जो कि प्रेगनेंसी में काफी आम है।
लेकिन प्रेग्नेंट महिलाओं को इन एक्सरसाइज़ को अपने रूटीन में शामिल करने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट ज़रूर करना चाहिए ताकि उनकी प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कोई समस्या न आए।
क्या है डक वॉक?
डक वॉक एक्सरसाइज रिवर्स लंज, स्क्वैट्स, क्रैब वॉक, फॉरवर्ड लंज जैसी एक्सरसाइज के समान है, क्योंकि इसमें कुल्हों और जांघों पर जोर दिया जाता है। आमतौर पर ग्लूट्स और जांघ की मांसपेशियां बड़ी मांसपेशियां होती हैं, जिन पर काम करना आम तौर पर मुश्किल होता है और इसलिए डक वॉक एक्सरसाइज जैसे व्यायामों के लाभों में से एक लाभ मांसपेशियों पर ध्यान केंद्रित करना और उन्हें मजबूत बनाना होता है।

ऐसे करें डक वॉक
डक वॉक में आप स्क्वाट करने की स्थिति में होकर आगे की तरफ चलना होता है। दोनों बाजूओं को आगे की ओर ले जाकर हाथ बांध लें और फिर धीरे धीरे कदमों को आगे बढ़ाना शुरू करें। इसमें आपको धीमे-धामे चलना है। इस फॉर्म को डक वॉक कहा जाता है। ये एक्सरसाइज प्रेगनेंट महिलाओं के लिए भी काफी फायदेमंद है।
ये ध्यान रखें
पहली तिमाही में ज्यादा सीढियां चढ़ना-उतरना, भागना-दौड़ना न करें व तेजी से पैर रखकर न चलें। दूसरी तिमाही में झटके से उठने या बैठने के बजाय संभलकर चलने व 7-8 घंटे की नींद लेने के लिए कहते हैं ताकि पेट पर धीरे-धीरे बढ़ रहे प्रेशर से तनाव न हो। वहीं, तीसरी तिमाही में पेट का उभार ज्यादा होने से दबाव बढ़ता है। ऐसे में ज्यादातर बायीं तरफ करवट लेकर लेटें ताकि बच्चे तक ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो। लेटा न जाए तो कमर के पीछे तकिया लेकर बैठें।

7-8 दिन पूर्व डक वॉक
सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ाने के लिए वॉक व डक वॉक को प्रसव की तिथि से 7-8 दिन पहले शुरू करने के लिए कहते हैं। इसमें घुटनों को मोड़कर स्क्वैट की अवस्था में धीरे-धीरे चलें। इससे बच्चा नीचे खिसकता है। बीपी, मधुमेह, पहले अबॉर्शन, अधिक उम्र में आईवीएफ प्रेग्नेंसी है तो विशेषज्ञ की सलाह से करें।



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