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देबिना बनर्जी की तरह आप भी कुछ इस तरह दें बेबी को सॉलिड फूड
देबिना बनर्जी छोटे परदे का जाना-माना नाम है। स्क्रीन पर सीता का किरदार निभाकर उन्होंने दर्शकों का दिल जीता था। इतना ही नहीं, वह 'चिड़िया घर', 'संतोषी मां', 'तेनाली रामा', 'अलादीन - नाम तो सुना होगा' जैसे कई सीरियल में दिखाई दे चुकी हैं। इन दिनों देबिना मदरहुड पीरियड को एन्जॉय कर रही हैं। वह अपने बच्चों को काफी कुछ सिखा रही हैं और उनसे भी बहुत कुछ सीख रही हैं। इतना ही नहीं, वह अपनी इस जर्नी को अपने फैन्स के साथ शेयर करती हैं। दरअसल, वह व्लॉग के जरिए फैन्स के सवालों के जवाब देती हैं और अपने मदरहुड के एक्सपीरियंस के बारे में बताती हैं।
अधिकतर नई मांओं के मन में यह सवाल आता है कि वह अपने बेबी को ठोस आहार कब देना शुरू करें। वैसे तो पहले छह महीनों के लिए मां का दूध ही पोषण का मुख्य स्रोत होता है, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे बेबी को सॉलिड फूड देना चाहिए। मां की इस दुविधा को हल करने के लिए देबिना बनर्जी ने वीडियो के जरिए अपने एक्सपीरियंस शेयर किए हैं-

सेमी-लिक्विड फूड से किया शुरू
वीडियो में देबिना ने बताया कि उन्होंने अपने दोनों बच्चों को सॉलिड फूड देने की शुरुआत सेमी-लिक्विड फूड से की। उन्होंने अपनी बड़ी बेटी लियाना को फर्स्ट सॉलिड फूड के रूप में एवोकाडो दिया था। जिसे अच्छी तरह मैश किया गया था। प्रारंभ में, उन्होंने बच्चों को चम्मच से फूड नहीं खिलाया। बल्कि उसे खिलाने के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल किया क्योंकि उनकी जीभ खाना खाने की आदी नहीं होती है और हो सकता है कि वह उसे थूक दे। इसलिए वे उंगली के माध्यम से मैश्ड फूड उसे देते थे और फिर वह उसे चबाकर खाती थी।
बेबी को यूं दें नया टेस्ट
वहीं दिविशा के लिए उन्होंने अपने पहले सेमी-लिक्विड फूड के रूप में मसले हुए उबले चावल को चुना। देबिना शेयर करती हैं कि फूड सकर में आप ब्लूबेरी, केला, आम आदि डाल सकते हैं। हालांकि, देबिना ने अपने बेबी के लिए ब्लूबेरी फल को चुना। छोटे बच्चों के लिए फूड सकर का इस्तेमाल करना काफी अच्छा रहता है। इससे बच्चे को नए स्वादों के बारे में जानकारी होती है। जरूरी नहीं है कि आप बच्चे को हमेशा एक ही फल दें। हर दिन अलग-अलग फल भी उसे दिए जा सकते हैं।
इस बात का रखें ध्यान
• देबिना के अनुसार, आप बच्चे को जितना जल्दी अलग-अलग तरह के फल और अन्य फूड आइटम्स खाने को देते हैं तो इससे उनका टेस्ट उतना डेवलप होता है। इसका एक फायदा यह भी होता है कि बेबी बड़ा होने के बाद कई तरह की फूड आइटम्स से दूरी नहीं बनाता है। क्योंकि उसका टेस्ट पैलेट काफी बड़ा होता है।
• छोटे बच्चों को नमक, चीनी, गुड़ और शहद नहीं खिलाना चाहिए। दरअसल, जब बच्चे चीनी खाना शुरू करते हैं, तो इससे बच्चे के मस्तिष्क का विकास धीमा हो जाता है। देबिना ने भी डॉक्टर की सलाह पर इन फूड आइटम्स से दूरी बनाई।
• पहले छह महीनों के लिए ठोस आहार देने से बचना चाहिए। इस उम्र तक बेबी ठोस आहार खाने के लिए तैयार नहीं होता है। ऐसे में अगर उसे यह दिया जाता है तो इससे उसका फूड एक्सपीरियंस खराब हो सकता है।
• हर बच्चा स्वयं में अलग होता है और इसलिए बच्चे की ग्रोथ के आधार पर हमेशा डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही बेबी को ठोस आहार देना चाहिए।
• शुरूआत में बच्चे को थोड़ी मात्रा में ही ठोस आहार दें और फीडिंग करवाना पूरी तरह से बंद ना करें। आप एक मील में सॉलिड फूड तो दूसरे मील के रूप में बेबी को ब्रेस्टफीड करवा सकते हैं। इसके अलावा, नट्स, पॉपकॉर्न, अंगूर, या भोजन के बड़े टुकड़े जो मुंह में फंस सकते हैं, वह बच्चे को देने से बचें।



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