दर्द में बीते थे दीपिका पादुकोण के प्रेग्‍नेंसी के आखिरी 2 महीने, एक्‍ट्रेस ने शेयर की मडरहुड जर्नी

सितंबर 2024 में दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह एक प्यारी सी बेटी दुआ पादुकोण सिंह के माता-पिता बने। बेटी के जन्म के बाद दोनों पूरी तरह पैरेंटिंग में व्यस्त हो गए थे। हालांकि अब दीपिका ने काम पर वापसी कर ली है और हाल ही में मैरी क्लेयर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी और मदरहुड जर्नी पर खुलकर बात की।

एक्ट्रेस ने बताया कि पिछले साल सितंबर में जब उन्होंने अपनी बेटी 'दुआ' को जन्म दिया, तब से लेकर अब तक उनका पूरा फोकस बेटी की परवरिश पर है। दीपिका ने स्वीकार किया कि यह फेज उनके जीवन का सबसे सुंदर लेकिन चुनौतीपूर्ण समय रहा है। उनकी प्रेग्नेंसी के आखिरी दो महीने यानी आठवां और नवां महीना काफी मुश्किलों में बीता।

Deepika Padukone Breaks Silence on Pregnancy Struggle

थर्ड ट्राइमेस्टर में झेली काफी मुश्किलें

दीपिका ने गर्भावस्था के दौरान झेली गई शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि प्रेगनेंसी का अंतिम ट्राइमेस्टर उनके लिए बेहद तकलीफदेह रहा। उनकी बॉडी का लगभग हर हिस्सा दर्द से गुजर रहा था, यहां तक कि रीढ़ की हड्डी में भी असहनीय पीड़ा होती थी। उन्होंने बताया कि वह योग जैसे व्यायाम भी करती थीं, फिर भी दर्द से राहत नहीं मिली। इस फेज ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत कुछ सिखाया।

डिलीवरी भी रही चुनौतीभरा

दीपिका ने यह भी शेयर किया कि सिर्फ प्रेगनेंसी के आखिरी महीने ही नहीं, बल्कि डिलीवरी का समय भी बेहद चुनौतीपूर्ण था। लेकिन इस कठिन दौर में उनकी फैमिली और फ्रेंड्स ने उनका पूरा साथ दिया। उन्होंने बताया कि अपनों का साथ ही था जिसने उन्हें इस संघर्षपूर्ण सफर में हिम्मत और ताकत दी।

दीपिका का यह अनुभव कई नई मांओं के लिए प्रेरणा है जो प्रेगनेंसी के दर्द और बदलावों से जूझ रही हैं। उनकी यह स्वीकारोक्ति यह दर्शाती है कि भले ही एक्ट्रेस जैसे ग्लैमरस दिखने वाले जीवन के पीछे भी कई संघर्ष छिपे होते हैं, लेकिन मां बनना एक अनमोल अनुभव है।

क्‍यों होता है प्रेग्‍नेसी में बॉडी के हर पार्ट में दर्द

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर के हर हिस्से में दर्द होना एक सामान्य स्थिति है, जो हार्मोनल बदलावों, वजन बढ़ने और शरीर के बदलते संतुलन के कारण होती है। गर्भावस्था में हार्मोन रिलैक्सिन मांसपेशियों और लिगामेंट्स को ढीला करता है, जिससे पीठ, कमर, पैरों और जोड़ों में खिंचाव व दर्द महसूस हो सकता है। बढ़ता हुआ गर्भाशय आंतरिक अंगों पर दबाव डालता है, जिससे पेट, पीठ और पेल्विक एरिया अकंफर्टबेल फील होने लगता है। इसके अलावा नींद की कमी, थकान और पोषक तत्वों की कमी भी शरीर में दर्द को बढ़ा सकते हैं। नियमित व्यायाम और सही पोषण से राहत मिल सकती है।

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