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Father Son Relationship: हर बच्चा अपने पिता में देखता है सुपर हीरो, इसके पीछें हैं कई सारे कारण
जब आप एक छोटे बच्चे से ये पूछते हैं कि उसका फेवरेट सुपर हीरो कौन है तो सुपरमैन या फिर स्पाइडर मैन ना बताकर अपने डैड की तरफ इशारा करता है, क्योंकि बच्चा अपने पिता को ही सुपर हीरो की तरह देखता है। इसके पीछे एक पिता की मेहनत होती है जो वो अपने बच्चे पर करता है। वैसे तो बच्चे के जीवन में मां का सबसे अहम रोल होता है लेकिन सुपर हीरो तो उसका डैड ही बनता है। लाइफ में कैसी भी परिस्थिति आ जाए वो मुस्कुराते में उसको पार करता है और परिवार को सुरक्षित रखता है। बच्चा अपने पिता के साय में खुद को सेफ महसूस करता है। उसको इस बात का पता होता है कि जब भी उसके ऊपर किसी तरह की मुसीबत आएगी उसके पिता उसका सामने करने के लिए पहले से खड़े मिलेंगे।

ऐसा सिर्फ बचपन में ही नहीं है कि बच्चा पिता को सुपर हीरो मानें, बड़े हो जाने पर भी बच्चे पिता को अपना आइडियल मानते हैं। इसके पीछे भी बहुत सारे रीजन हैं जो काम करते हैं।
क्यों बच्चा पिता को मानता है सुपहर हीरो जानते हैं-
बच्चे को चोट लगती है तो वो सीधे अपने पापा के पास जाता है, कोई उसको परेशान करता है तो उसकी शिकायत भी वो डैडी से करता है, मॉम ने भी अगर उसे कुछ बोला होता है तो डैड के ऑफिस से आते ही मॉम की शिकायत उनसे की जाती है। बच्चे के लिए पिता वो सब कुछ होता है जो उसे अपने बेहतरी के लिए लगता है।

पिता अपना अनुभव बच्चे को देता है
एक पिता के तौर पर शख्स अपने बच्चे को वो हर चीज देने की कोशिश करता है जो उसके पास थी और जो उसके पास खुद मौजूद नहीं थी। लेकिन अपने बच्चे के लिए वो मेहनत करता है। पिता अपना अनुभव बच्चे को देता है जो उसने सालों से कमाया होता है। पिता अपने बच्चे को लाइफ में आने वाली परेशानियों से लड़ने और उससे पार पाने के बारें में सीखाता है। युवावस्था में तो पिता एक दोस्त से बढ़कर हो जाता है। उनकी भूमिका बड़ी हो जाती है।

बच्चों को अनुशासन सिखाता है
पिता अपने बच्चों को अनुशासन सिखाता है। इसमें वो सख्ती भी करता है। क्योंकि मां बच्चे पर ज्यादा सख्त नहीं हो पाती है, जिससे बच्चे लाड में बिगड़ने लग सकते हैं, लेकिन पिता की सख्ती ऐसा होने नहीं देती है। ये कहा जा सतता है कि पिता है जो अपने बच्चे के भविष्य को तराशरता है, एक शिल्पकार की तरह, उसे निखारता है।

बच्चों के कठोर आलोचक
पिता अपने बच्चों के कठोर आलोचक भी होते हैं, वो उनको सहारा तो देते हैं, लेकिन पिता ये भी चाहते हैं कि बच्चा बस वहीं ठहर ना जाए, आगे बढ़े, इसलिए वो उसके आलोचक भी बन जाते हैं। पिता कभी अपने बच्चे की कामयाबी से तब तक संतुष्ट नहीं होता जब तक उनको ये नहीं लगता कि हां अब उनका बच्चा जिंदगी की रेस में पीछे नहीं जाएगा।

पिता की आदतो का काफी प्रभाव बच्चों पर पड़ता है
बच्चों पर अपने पिता की आदतो का काफी प्रभाव पड़ता है, खासतौर से बेटों पर। बच्चे बहुत सी बातें अपने पिता की आदतों से सीखते हैं, उसपर अमल करते हैं। इसलिए पिता को बुरी आदतों को नहीं पालना चाहिए, जिससे बच्चे भी उस पर अमल ना करना शुरू कर दें। जो पिता अपनी पत्नी पर घरेलू हिंसा करते हैं, या फिर गाली देते हैं, नशा करते हैं, इसका प्रभाव भी बच्चों पर बहुत अधिक होता है। वहीं पढ़ाई-लिखाई, इमानदारी, सच्चाई बच्चे अपने पिता से ही सीखते हैं।



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