बेटी के 13 साल की होने से पहले पेरेंट्स को जरूर सिखा देनी चाहिए ये 5 बातें, जिंदगी भर आएंगी काम

What to teach your 13 year old daughter: बच्चों की परवरिश को लेकर हर माता-पिता काफी सजग और चिंतित रहते हैं। हर पेरेंट बस यही चाहता है कि उनके बच्चे को जीवन में किसी तरह की कोई परेशानी न हो। खासतौर पर, पेरेंट्स अपनी बेटियों की परवरिश को लेकर काफी सजग रहते हैं। आमतौर पर 12 से 13 साल की उम्र के आसपास लड़कियों में शारीरिक और मानसिक बदलाव शुरू हो जाते हैं। यही वह समय होता है जब वे बचपन से किशोरावस्था में कदम रखती हैं। ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि इस उम्र से पहले ही उन्हें कुछ जरूरी बातें सिखा दें, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। तो आइए, जानते हैं अपनी 13 साल की बेटी को क्या सिखाएं?

Good Parenting Tips

बेटों से नहीं है कम

बेटी को बचपन से ही यह समझाना जरूरी है कि वह किसी भी तरह से लड़कों से कम नहीं है। उसे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना सिखाएं, ताकि वह अपने फैसले खुद ले सके। जब वह घर से बाहर की दुनिया देखेगी, तो उसे महसूस होगा कि समाज में लड़के और लड़कियों के साथ कई बार अलग व्यवहार किया जाता है। ऐसे में पहले से ही उसके अंदर यह भरोसा पैदा करना जरूरी है कि वह हर काम कर सकती है और किसी से पीछे नहीं है। साथ ही, माता-पिता को चाहिए कि बेटी को भी वही मौके दें जो बेटे को मिलते हैं। उसे हर किसी का सम्मान करना सिखाएं और खुद पर विश्वास रखने के लिए प्रेरित करें।

ना कहने में हिचकिचाहट न हो

13 साल के बाद लड़कियां नई चीजों को समझने लगती हैं और उनकी दुनिया धीरे-धीरे बड़ी होती जाती है। ऐसे में उन्हें यह सिखाना बेहद जरूरी है कि अगर कोई चीज उन्हें गलत या असहज लगे, तो वे साफ तौर पर "ना" कह सकें। उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि अपने लिए सही फैसला लेना उनकी ताकत है। साथ ही, यह भी समझाएं कि विनम्र रहना जरूरी है, लेकिन गलत चीजों के सामने चुप रहना नहीं।

प्यूबर्टी है सामान्य

बेटी को यह समझाना जरूरी है कि प्यूबर्टी यानी किशोरावस्था में आने वाले शारीरिक बदलाव पूरी तरह सामान्य होते हैं। इस दौरान शरीर और मन दोनों में कई बदलाव आते हैं, जो हर लड़की के साथ होते हैं। माता-पिता का फर्ज है कि वे अपनी बेटी से खुलकर बात करें और उसे पहले से तैयार करें। उसे हार्मोनल बदलाव, मासिक धर्म (पीरियड्स), पर्सनल हाइजीन और साफ-सफाई के बारे में सही जानकारी दें, ताकि वह बिना डर या झिझक के इन चीजों को समझ सके।

खुद की रक्षा करना सिखाएं

माता-पिता हमेशा साथ नहीं रह सकते, इसलिए बेटियों को खुद मजबूत बनाना बहुत जरूरी है। उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनने के लिए प्रेरित करें, ताकि वे किसी भी मुश्किल स्थिति में खुद को संभाल सकें। उन्हें सेल्फ-डिफेंस की ट्रेनिंग दिलवाना एक अच्छा कदम हो सकता है। साथ ही सही और गलत स्पर्श (Good touch and Bad touch) के बारे में साफ-साफ समझाएं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे खुद को सुरक्षित रख पाएंगी।

आवाज उठाना गलत नहीं है

बेटी को शुरुआत से ही यह सिखाना जरूरी है कि अगर वह सही है, तो अपनी बात रखना बिल्कुल गलत नहीं है। उसे समझाएं कि उसकी आवाज की अहमियत है और उसे कभी दबाया नहीं जाएगा। इसकी शुरुआत घर से ही होनी चाहिए, जहां उसकी बात सुनी जाए और उसे सम्मान दिया जाए। इस उम्र में बच्चों का मन बहुत संवेदनशील होता है, इसलिए उन्हें प्यार और समझदारी से यह बात समझानी चाहिए कि अपनी बात रखना उनका हक है।

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