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IVF Myths & Facts :आईवीएफ के जरिए पैदा हुए बच्चे नॉर्मल होते हैं? जानें इससे जुड़े 6 मिथक और उसके सच
Myths and facts about IVF: नि:संतान दंपतियों के लिए आईवीएफ (In vitro fertilization) तकनीक किसी वरदान से कम नहीं हैं। इसको लेकर दुनियाभर में खासकर भारत में कई तरह के मिथक प्रचलित हैं। इस संबंध में जो सबसे बड़ा सवाल अक्सर पूछा जाता है, वह यही है कि क्या आईवीएफ के जरिए पैदा हुआ बेबी नॉर्मल होता है? यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि इसमें अंडों के फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया सामान्य नहीं होती। कई दशकों से नि:संतान दंपतियों की गोद भर चुकी आईवीएफ को लेकर
कुछ अन्य मिथक भी हैं। यहां जानते हैं उनका भी सच :

Myth: आईवीएफ से जन्मे बच्चे नेचुरली जन्म लेने वाले बच्चों से अलग होते हैं?
Fact: आईवीएफ से जन्मे बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से बिल्कुल सामान्य तरीके से जन्म लेने वाले बच्चों की तरह ही होते हैं। आईवीएफ से जन्मे बच्चों को टेस्ट ट्यूब बेबी भी कहा जाता है लेकिन इन बच्चों और दूसरे बच्चों में कोई अंतर नहीं होता। जन्म के बाद इन बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास बिल्कुल सामान्य बच्चों की तरह ही होता है।
Myth: आईवीएफ प्रेग्नेंसी में सिजेरियन से ही बच्चे का जन्म होता है?
Fact: आईवीएफ में भ्रूण को तैयार केवल बाहर किया जाता है। इसका विकास उसी तरह गर्भाशय में होता है, जैसा कि सामान्य प्रेग्नेंसी में होता है। इसलिए इसमें सिजेरियन की उतनी ही संभावना होती है, जितनी कि नॉमल प्रेग्नेंसी में होती है।
Myth: आईवीएफ से अबॉर्शन की संभावना ज्यादा होती हैं।
Fact: सामान्य तरीके से हुई प्रेग्नेंसी में भी अबॉर्शन की संभावना 10 फीसदी तक होती है। आईवीएफ में भी अबार्शन की संभावना इतनी ही होती है, ज्यादा नहीं। आईवीएफ केवल फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया है। बाद में इसमें सब वही फॉलो होता है, जो नॉर्मल तरीके से प्रेग्नेंसी में होता है।
Myth: यह केवल युवा दंपतियों के लिए उपयोगी है?
Fact: इस तकनीक में अधिक उम्र की महिलाएं यहां तक कि मेनोपॉज के बाद भी महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं। मेनोपॉज वाली महिलाओं को इसके लिए डोनर अंडों की जरूरत पड़ती है।
Myth:आईवीएफ में सभी अंडे खत्म हो जाते हैं और महिलाओं में मेनोपॉज जल्दी आता है?
Fact: हर महीने महिला की ओवरीज से 25 से 30 अंडे निकलते हैं। इनमें से फर्टिलाइजेशन के लिए केवल एक ही अंडा बड़ा होता है। बाकी सारे अंडे अपने आप खत्म हो जाते हैं। यह बड़ा अंडा भी अगर फर्टिलाइज नहीं होता है तो खत्म हो जाता है। आईवीएफ में ये सभी अंडे निकाल लिए जाते हैं। चूंकि ये वैसे भी खत्म होने हैं। इसलिए ऐसा बिल्कुल नहीं है कि अगर आईवीएफ के लिए अंडे निकाल लिए गए तो अगले महीने नहीं बनेंगे। ये अंडे अगले महीने फिर से बनेंगे। मेनोपॉज वाली धारणा भी गलत है।
Myth: आईवीएफ के बाद महिला को 9 महीने कम्पलीट बेड रेस्ट करना होता है?
Fact:आईवीएफ केवल प्रेग्नेंट होने की प्रक्रिया है। अगर एक बार भ्रूण गर्भाशय में आ गया तो इसके बाद बच्चे का विकास उसी तरह होता है, जैसा सामान्य प्रेग्नेंसी में होता है। यानी डॉक्टर जो काम सामान्य प्रेग्नेंसी में करना अलाऊ करता है, वही काम प्रेग्नेंट महिला अपने डॉक्टर की सलाह से आईवीएफ से हुई प्रेग्नेंसी के दौरान भी कर सकती है।
Myth: आईवीएफ तकनीक बहुत महंगी होती है।
Fact:आज से एक दशक पहले आईवीएफ का ख़र्च 3 से 5 लाख था जो अब महज़ 1 से 2 लाख रह गया है। लिहाज़ा इस मिथक में कोई सच्चाई नहीं है कि आईवीएफ तकनीक बहुत ही महंगी होती है। अब कोई भी निसंतान दंपत्ति आसानी से कम पैसे ख़र्च कर संतान सुख प्राप्त कर सकता है।



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