छोटे बच्‍चों को किस तरह शुरु करवाएं नॉन वेज खिलाना

By Super

छोटे बच्‍चों को कुछ भी पहले खिलाने में बड़ा ही डर सा लगता है। कई माता-पिता सोंचते हैं‍ कि छोटी उम्र में बच्‍चों को नॉन वेज देना सही रहेगा या नहीं।

पर आपको बता दें कि नॉन-वेजिटेरियन खाना बच्चों की मांसपेशियों और प्रारम्भिक स्तर के प्रोटीन के विकास का अच्छा स्त्रोत है। लेकिन जन्म के पहले वर्ष आपके बच्चे का पाचन तंत्र इसे पूरी तरह पचाने में सक्षम नहीं होता है।

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इसलिये आज हम आपको बच्चे को नॉन वेज आहार देने के कुछ नियम बता रहे हैं, तो ज़रा ध्‍यान दें...

1 अंडे से शुरुआत -

1 अंडे से शुरुआत -

ये प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत हैं और आपके बच्चे के पाचन तंत्र के विकास के अनुकूल है। फिर भी ये आप बच्चे को तब तक नहीं दे सकते जब तक कि वो 9 माह का ना हो जाये। आपके बच्चे को नॉन-वेज खाना पचाने के लिए पाचन तंत्र का परिपक्व होना बेहद जरूरी है।

2 यदि मछली और चिकन देना है तो एक साल के बाद दें

2 यदि मछली और चिकन देना है तो एक साल के बाद दें

यदि आप अपने बच्चे को मछ्ली और चिकन देना चाहते हैं तो बच्चे के 1 साल का होने तक का इंतजार करें। जब वह 13 या 14 माह हा हो जाये तब इसकी शुरुआत करें। लेकिन ध्यान रहे कि बच्चे को मछली और चिकन देने से पहले शोरबा या सूप के रूप में दें, शुरुआत में ही उसे चिकन के टुकड़े ना दें।

3 चिकन से पहले मछली दें

3 चिकन से पहले मछली दें

बच्चे को नॉन-वेज खाना देना शुरू करने से पहले ध्यान रखें कि उसे चिकन से पहले मछ्ली दें। इसका एक तरीका है जिसे आप फॉलो करें, पहले बच्चे को सूप या शोरबा दें, इसके बाद भाप में पका चिकन और सूप या शोरबा देने के 1 माह बाद बोइल्ड और ग्रिल्ड चिकन देना शुरू करें।

4 लाल मांस अभी ना दें

4 लाल मांस अभी ना दें

जहां तक लाल मांस का सवाल है, लैंब एक अच्छा विकल्प है बजाय कि सौसेज और रेड मीट के। लैंब के अलावा लाल मांस के अन्य विकल्पों में नाइट्रेट की मात्रा अधिक होती है जो कि आपके बच्चे के दिमागी विकास को प्रभावित कर सकता है। वैसे पाँच साल तक आप बच्चे को लाल मांस ना दे तो ही अच्छा है।

5 मीट को ज्यादा ना पकाए

5 मीट को ज्यादा ना पकाए

बच्चे को जो मछ्ली या चिकन दें उसे ज्यादा ना पकाएं। उन्हें तीन साल तक स्टीम्ड, बॉयल्ड और ग्रिल्ड मांस ही दें।

6 इसकी मात्रा ज्यादा ना दें-

6 इसकी मात्रा ज्यादा ना दें-

बच्चों को नॉन-वेज सप्ताह में दो बार ही दें। चूंकि ये पचने में कठिन है इसलिए मछ्ली और चिकन का ज्यादा सेवन आपके बच्चे की पाचन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। मछ्ली और चिकन बच्चे को डिनर में दें ना कि लंच में क्यों कि इस समय उसे पचने का पूरा समय मिल जाएगा।

7 सही तरह पकाए-

7 सही तरह पकाए-

अपने हाथों और मांस को पकाने से पहले अच्छों तरह धो लें। बच्चे के लिए प्रोसेस्ड मीट ना खरीदें।

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