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आपके बच्चे नहीं है अनुशासित, तो आप भी हो सकते हैं इसके जिम्मेदार!
हम सभी अपने बच्चे में अच्छी आदतों का संचार करना चाहते हैं और इसकी नींव बचपन में ही रख दी जाती है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने और सफलता पाने के लिए अनुशासित होना बेहद जरूरी होता है। अगर बच्चे कम उम्र में ही अनुशासन का महत्व नहीं सीखते हैं तो इससे उन्हें आगे चलकर भी बहुत अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में हमेशा पैरेंट्स को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों को अनुशासन में रहना सिखाएं। आखिरकार घर बच्चे का सबसे पहला स्कूल होता है। हर पैरेंट अपने बच्चे को अनुशासन में रखने की कोशिश करता है। लेकिन इस दौरान कई बार वे कुछ ऐसी मिसटेक्स कर देते हैं, जिससे बच्चे पर उसका नेगेटिव असर होता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको डिसिप्लीन से जुड़ी कुछ ऐसी ही गलतियों के बारे में बता रहे हैं-

बहुत अधिक नेगेटिव होना
अमूमन यह देखने में आता है कि जब पैरेंट्स बच्चे को अनुशासन में रहना सिखाते हैं तो वे उस दौरान बहुत अधिक नेगेटिव हो जाते हैं। वे अक्सर बच्चे से कहते हैं कि ये मत करो, वो मत करो। इस तरह की नेगेटिव बातों या फिर उसे लगातार हर चीज के लिए मना करते रहने से बच्चे के मन में भी नेगेटिविटी बढ़ने लगती है। इसलिए, कोशिश करें कि आप बच्चे को यह बताएं कि उन्हें क्या करना चाहिए, ना कि उन्हें किन चीजों को नहीं करना चाहिए। अगर बच्चा कुछ अच्छा करता है तो उसकी तारीफ करना बिल्कुल भी ना भूलें। इससे बच्चे को मोटिवेशन मिलता है।
खुद फॉलो ना करना
यह एक कॉमन मिसटेक है, जिसे अधिकतर पैरेंट्स करते हैं। वे बच्चे को अनुशासित रखने के लिए उनके लिए कुछ नियम बनाते हैं, लेकिन खुद उन्हें फॉलो नहीं करते हैं। मसलन, अगर आपने यह रूल बनाया है कि बच्चा सप्ताह में एक बार ही बाहर का खाना खाए या फिर उसे अपने लंच में सलाद को शामिल करना चाहिए तो आपको भी वैसा ही करना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो बच्चा कभी भी अनुशासित जीवन जीना नहीं सीखेगा।
कंसिस्टेंट ना होना
अनुशासन सिर्फ एक दिन, एक सप्ताह या एक महीने का प्रोसेस नहीं है। बल्कि यह जीवन जीने के तरीके को बेहतर बनाता है। इसलिए, इसे लेकर कंसिस्टेंट होना बेहद जरूरी है। हालांकि, अधिकतर पैरेंट्स ऐसा नहीं करते हैं। वे बच्चे को अनुशासित रखने के लिए घर में कुछ नियम बनाते हैं। लेकिन पांच-सात दिनों में वे उन नियमों को खुद की तोड़ना शुरू कर देते हैं। हो सकता है कि उनके लिए भी अनुशासित जीवन जीना मुश्किल हो और इसलिए वे ऐसा कर रहे हो। लेकिन अगर आप कंसिस्टेंट नहीं होते हैं तो बच्चा खुद भी कभी भी अनुशासित जीवन जीना नहीं सीख पाता है।
रिश्वत देना
यह भी एक बड़ी गलती है, जो अक्सर पैरेंट्स अपने बच्चे को अनुशासन में रखने के लिए करते हैं। यह कहना कि यदि आपका बच्चा रोना बंद कर दे तो आप उसे बाद में आइसक्रीम खरीद कर देंगे, किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। अनुशासन वास्तव में जीवन जीने का एक तरीका है और आपके बच्चे को यह समझना व सीखना होगा। जब वह इसके महत्व को समझेगा तो अपने जीवन को बेहतर बना पाएगा। किसी भी लिहाज से बच्चे को अनुशासन में रखने के लिए रिश्वत देना उचित नहीं है।
हर बच्चे के साथ एक ही तरीका अपनाना
यह पैरेंट्स द्वारा की जाने वाली सबसे बड़ी गलतियों में से एक है। अमूमन पैरेंट्स मानते हैं कि एक बच्चे को अनुशासन में रखने के लिए जो तरीका अपनाया गया है, वही सब पर लागू होता है। जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। हर बच्चा अलग है और इसलिए आपको उनके हिसाब से ही उन्हें डील करना होगा। मसलन, अगर एक बच्चा स्वभाव से समझदार है, तो वह सिर्फ आपके समझाने से ही समझ जाएगा। लेकिन अगर उसका भाई या बहन अधिक एग्रेसिव है तो आपको उन्हें अनुशासन में रखने के लिए कुछ वक्त तक टीवी बंद करने या फिर चॉकलेट ना देने की जरूरत पड़ सकती है।



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