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कहीं आपका बच्चा भी ऑनलाइन गेमिंग की लत में तो नहीं? जानें चेतावनी संकेत और बचाव के उपाय
Online Gaming Addiction: हाल ही में गाजियाबाद से एक ऐसी दुखद खबर सामने आई है, जिसने सबको चौंका दिया। दरअसल, गाजियाबाद में ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते तीन नाबालिग बहनों से एक साथ सुसाइड कर लिया। इस घटना के सामने आने के बाद से ही एक बार फिर इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि ऑनलाइन गेम्स का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है। आजकल बच्चे ऑनलाइन गेम्स के प्रति बहुत ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन इस तरह के गेम्स की लत बच्चों के दिमाग और मेंटल हेल्थ के लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकती है। इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने दिल्ली स्थित धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल की साइकोलॉजिस्ट संध्या शर्मा से बात की। तो आइए, जानते हैं कि ऑनलाइन गेम्स बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर कैसे बुरा असर डाल रहे हैं और पेरेंट्स अपने बच्चों को इससे कैसे बचाएं?

ऑनलाइन गेम्स का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
साइकोलॉजिस्ट संध्या शर्मा के अनुसार, पैंडेमिक के बाद ये ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम्स बच्चों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। मल्टीप्लेयर और प्रतिस्पर्धात्मक प्रारूप उन्हें आकर्षित करते हैं। ये गेम्स सोचने-समझने और प्रतिक्रिया देने के तरीके को नियंत्रित करने में सक्षम हैं, जिससे मानसिक और भावनात्मक संतुलन बिगड़ जाता है। टास्क-बेस्ड गेम्स चिंता, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स और सामाजिक अलगाव को जन्म देते हैं। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से नींद प्रभावित होती है, एकाग्रता कम होती है। इससे कई बच्चों में व्यवहारिक लत विकसित हो जाती है, जहां गेमिंग के बिना बेचैनी महसूस होती है। ये प्रभाव शैक्षणिक प्रदर्शन गिराते हैं और भावनात्मक जरूरतों को दबाते हैं।
ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के बर्ताव को कैसे प्रभावित करती है?
ऑनलाइन गेम्स इस तरह बनाए जाते हैं कि बच्चा एक टास्क पूरा करते ही अगले टास्क में फंसता चला जाता है। हर जीत या रिवॉर्ड दिमाग में खुशी का अहसास पैदा करता है, जिससे गेम छोड़ना मुश्किल हो जाता है। धीरे-धीरे बच्चा गेम के नियमों के हिसाब से सोचने लगता है और असली दुनिया से उसका जुड़ाव कम होने लगता है। ज्यादा और अनियंत्रित गेमिंग से चिड़चिड़ापन, बेचैनी और भावनात्मक असंतुलन भी बढ़ सकता है।
बच्चों में गेमिंग की लत के चेतावनी संकेत
अगर बच्चा हर समय गेम के बारे में ही सोचता है, घंटों मोबाइल या लैपटॉप पर रहता है, पढ़ाई में ध्यान कम हो रहा है या दोस्तों से दूरी बना रहा है, तो यह चेतावनी संकेत हो सकते हैं। गेम बंद करने पर गुस्सा आना, नींद और खाने में लापरवाही, बात-बात पर झूठ बोलना या चुप-चुप रहना, आंखों में थकान और व्यवहार में अचानक बदलाव को हल्के में न लें।
बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की लत कैसे छुड़ाएं?
सबसे जरूरी है कि माता-पिता बच्चों से खुलकर बात करें और उन्हें समझें, न कि डांटें। स्क्रीन टाइम के लिए साफ और संतुलित नियम बनाएं। बच्चों को बाहर खेलने, एक्सरसाइज और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करें। खाने के समय और सोने से पहले गेम न खेलने की आदत डालें। एक नियमित दिनचर्या बनाएं और बच्चे के निजी समय का सम्मान करते हुए उसे सही दिशा दिखाएं। समय रहते ध्यान देने से गेमिंग की लत को रोका जा सकता है।



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