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प्रसव पीड़ा के दौरान एपिड्यूरल न बन जाए जीवन भर का दर्द
कहते है जब एक औरत माँ बनती है तो उसका खुद का भी नया जन्म होता है।पूरे नौ महीने तरह तरह की मुश्किलों का सामना करके वह बच्चे को जन्म देती है इतना ही नही नौ महीने पूरे होने पर प्रसव के दौरान जो पीड़ा वो सहती है उसका अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता ।ऐसे में इस पीड़ा से होने वाली माँ को राहत दिलाने के लिए डॉक्टर्स एपिड्यूरल अपनाते है।
कुछ महिलाएं प्रसव पीड़ा से बचने के लिए एपिड्यूरल का सहारा लेती है लेकिन जैसे हर सिक्के के दो पहलू होते है ठीक उसी प्रकार इन एपिड्यूरल के भी कुछ प्रभाव ऐसे होते है जो इसके इस्तेमाल के या तो फ़ौरन बाद दिखने लगते है या फिर कुछ समय बाद। आज इस लेख में हम आपको एपिड्यूरल के कुछ साइड इफेक्ट्स के विषय में बताएंगे।

डिलीवरी के बाद बैक पेन
प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के दर्द होते है कुछ तो डिलीवरी के तुरंत बाद बिलकुल ठीक हो जाते है लेकिन कुछ दर्द ऐसे भी होते है जो लम्बे समय तक परेशानी का सबब बन जाते है। इन्ही में से है बैक पेन की समस्या। एपिड्यूरल एक प्रकार का इंजेक्शन होता है जो प्रसव के दौरान दर्द को कम करने के लिए रीढ़ की हड्डी में लगाया जाता है। कुछ मामलों में डिलीवरी के बाद रीढ़ की हड्डी में दर्द आम बात होती है हालाँकि कई औरतों का दर्द डिलीवरी के कुछ समय बाद गायब हो जाता है। ऐसा उन औरतों के साथ होता है जो डिलीवरी के बाद अपने शरीर की बेहतर देखभाल करती है नाकि अपने शरीर पर किसी भारी काम का दबाव डालती है ।
एपिड्यूरल का प्रभाव
एपिड्यूरल के कारण कई महिलाएं दर्द से पीड़ित रहती है। जहाँ कुछ औरतों को तकलीफ कम होती है वहीँ कई औरतें इसके दर्द को सहन नही कर पाती। कई बार यह दर्द इतना बढ़ जाता है कि औरतों को अपने रोज़मर्रा के काम करने में दिक़्क़तों का सामना करना पड़ता है। इसका प्रभाव स्त्री की सेहत पर पड़ता है जिसके कारण पीठ दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
हालाँकि इस तरह के दर्द से छुटकारा पाने के लिए महिलाओं को अपनी सही देखभाल करनी चाहिए।
डिलीवरी के बाद इन तरीकों से पा सकती है आप पीठ दर्द की समस्या से छुटकारा।
- उचित मुद्रा
- सही स्तनपान
- जीवनशैली में बदलाव
- इस समय हो जाएं सावधान
उचित मुद्रा
डिलीवरी के बाद अपनी मुद्रा बदलते समय आप पेट और श्रोणि की मांसपेशियों को कसने के लिए विशेष देखभाल करें। याद रखिये यह कम से कम दो महीनों तक आपको करना है इसके कारण होने वाले हल्के दर्द से आपको राहत तो मिलेगी ही साथ ही आपका यह दर्द लम्बे समय तक नहीं रहेगा । साथ ही बिस्तर से उठते वक़्त भी आपको ख़ास ध्यान रखना होगा। इसके अलावा आपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि डिलीवरी के तुरंत बाद आप व्यायाम शुरू न करें। आपको यह समझना होगा कि बच्चे को जन्म देने के बाद आपको अपने शरीर को उतना समय देना होगा जितने की उसे ज़रूरत है।
सही स्तनपान
अपने नन्हे शिशु की देखभाल में वे इतनी व्यस्त हो जाती है कि अपने बारे में सोचना भूल जाती है और इसी वजह से यह दर्द उनके लिए लम्बे अरसे का दर्द बन जाता है। इसलिए स्तनपान क कराने वाली माताओं के लिए सही मुद्रा में बैठना बेहद ज़रूरी होता है। इसके लिए आपको कुर्सी पर बैठना चाहिए और अपने पीठ के निचले हिस्से में सपोर्ट के लिए तौलिये को मोड कर लगा लेना चाहिए साथ ही आपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि आपके पैर ज़मीन पर अच्छे से टीके हो और आप आराम महसूस करें। अगर ज़रुरत पड़े तो आप समायोज्य ऊंचाई वाली कुर्सी का इस्तेमाल कर सकती है।
जीवनशैली में बदलाव
डिलीवरी के बाद का समय एक महिला के लिए बेहद नाज़ुक होता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में कई तरह के बदलाव आते है जिनके प्रभाव से निपटने के लिए आपके शरीर को थोड़ा समय चाहिए होता है। डिलीवरी के कुछ समय बाद तक की आप ज़्यादा हाई हील्स की चप्पलें न पहने क्योंकि इससे आपके पीठ पर ज़्यादा ज़ोर पड़ेगा जिससे आपका दर्द बढ़ सकता है इसलिए आपके लिए बेहतर होगा कि आप अपनी पीठ को ज़्यादा से ज़्यादा आराम दें ।
इस समय हो जाएं सावधान
यह सच है कि के कारण हल्का फुल्का दर्द रहता है। यदि सही देखभाल की जाए तो यह दर्द समय के साथ ठीक हो जाता है और बड़ी से बड़ी समस्या टल जाती है लेकिन कुछ मामलों में यह एक गंभीर समस्या के रूप में खड़ी हो जाती है इसलिए एक औरत होने के नाते आपको यह जानकारी होनी बहुत ज़रूरी है कि किस स्तिथि में आपको सावधान हो जाना चाहिए ताकि खतरा बढ़ न जाए। इसके लिए आपको अपने शरीर पर ध्यान देना होगा आपको खुद ही समझ आ जाएगा कि कब चीज़ें आपके हाथ से निकल रही है। इसके अलावा अगर डिलीवरी के एक महीने बाद भी आपको लग रहा हो कि आपके पीठ का दर्द रोज़मर्रा के कामों में बाधा उत्पन्न कर रहा है तो फ़ौरन अपने डॉक्टर से सलाह लें। यदि आपने जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया है तो ऐसे में आप कम से कम दो महीने तक इंतज़ार करें।
याद रखिये सही समय पर इसका इलाज करवा कर आप इस दर्द को जीवन भर की समस्या बनने से रोक सकती है ।



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