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प्री-मैच्योर बेबी को चाहिए होता है एक्स्ट्रा केयर, जानें किन छोटी-छोटी बातों का रखना है ध्यान
एक प्री-मेच्योर बेबी को घर ले जाना और घर पर उसकी देखभाल करना यकीनन एक चुनौतीपूर्ण काम है। एक प्री-टर्म बेबी की देखभाल करना, विशेषकर न्यू पैरेंट्स के लिए काफी चैलेजिंग हो सकता है, क्योंकि यह एक सामान्य न्यू बॉर्न बेबी की देखभाल करने की तुलना में बहुत अधिक भिन्न होता है। यह माता और पिता दोनों के लिए ही जीवन के नए चरण की तरह होता है। समय से पहले जन्मे बच्चे का वजन महज 1-1.5 किलोग्राम होता है और यह आपके लिए काफी परेशानी भरा हो सकता है क्योंकि बच्चे पहले से ही इतने छोटे आकार के होते हैं।
हालांकि, नए परिवेश में शिशु को सहज महसूस कराने के लिए आपको बस अपने वातावरण में कुछ बदलाव करने की आवश्यकता है। इसके अलावा आपका बाल रोग विशेषज्ञ आपको इन परिवर्तनों के बारे में मार्गदर्शन कर सकता है, जिसकी आपको जरुरत महसूस हो सकती है। आप एक शिशु विशेषज्ञ से प्री-मेच्योर बेबी के लिए भोजन, नींद और अन्य पहलुओं के बारे में उपयोगी सलाह ले सकते हैं। आइए जानते है प्री-मेच्योर बेबी से जुड़े केयरिंंग टिप्स-

समय से पहले जन्मे बच्चे की देखभाल कैसे करें?
एक सामान्य गर्भावस्था 40 सप्ताह की होती है, लेकिन एक प्री-मेच्योर बेबी 37 वें सप्ताह से पहले ही जन्म ले लेता है। जल्दी डिलीवरी से जुड़ी कई जटिलताएं हैं, इसलिए बच्चे को हमेशा वार्म और खुश महसूस करना चाहिए। नवजात शिशु के साथ-साथ, न्यू पैरेंट्स को भी आपको अपने आहार और नींद की दिनचर्या का ध्यान रखना चाहिए।

तापमान का ध्यान रखें
शिशुओं को बहुत जल्द बीमार होने का खतरा होता है, इसलिए हमें समय से पहले जन्मे बच्चों पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए क्योंकि वे अधिक नाजुक होते हैं। हमें बच्चे के शरीर के तापमान के साथ-साथ आसपास के तापमान को आदर्श रूप से 27°c पर बनाए रखना चाहिए। कमरे का तापमान 24-28° के बीच हो सकता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में शरीर किसी भी ऊर्जा को बर्बाद न करे। बच्चे को ठंडे वातावरण से दूर रखने से उसे निमोनिया और ठंड से बचाने में भी मदद मिलती है। शरीर का तापमान दिन में कम से कम 3-4 बार नोट किया जाना चाहिए, ताकि हम जल्द से जल्द जान सकें कि बच्चा कब ठीक नहीं है, और इस तरह वह समय रहते उचित चिकित्सा उपचार प्राप्त करें। बच्चे को अधिक समय तक धूप में ले जाने से भी बचना चाहिए।

करें कंगारू प्रैक्टिस
स्किन टू स्किन टच और स्किन टच कॉन्टैक्ट मनुष्यों के लिए खासतौर से नवजात शिशु के लिए बेहद आवश्यक है। यह आपको अपने बच्चे के साथ कनेक्ट होने और बॉन्ड शेयर करने में मदद करता है। इस लिहाज से कंगारू प्रैक्टिस बेहद ही महत्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया में मां की छाती पर बेबी को नंगा (केवल डायपर के साथ) लेटाया जाता है ताकि बच्चे की स्किन मां की स्किन को छुए। इस स्थिति में हम आम तौर पर बच्चे को कंबल से ढँक देते हैं जो बहुत ही थैली में बच्चे जैसा दिखता है और इसलिए कंगारू प्रैक्टिस नाम दिया गया है। यह बच्चे में दिल की धड़कन और सांस लेने को रेग्युलेट करने में मदद करता है। साथ ही यह बच्चे के शरीर के तापमान को बनाए रखने में भी मदद करता है। ऐसा देखा गया है कि इससे बच्चे को बेहतर नींद आती है और बच्चा सही तरह से स्तनपान करता है। यह बच्चे को रोने से रोकने और माँ के साथ बेहतर भावनात्मक बंधन में भी मदद करता है। कंगारू देखभाल ने शिशुओं में हेल्दी वेट गेन में भी मदद करता है।

अपने बच्चे को सुरक्षित रूप से नहलाना
नवजात शिशुओं की त्वचा बहुत नाजुक होती है इसलिए यह बहुत जल्दी सूख जाती है। इसलिए 2-4 दिनों में उन्हें नहलाना पर्याप्त से अधिक है। पैरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब तक शिशु से गर्भनाल अटैच्ड है, तब तक बच्चे को नहलाना नहीं चाहिए, हालांकि उनकी क्लीनिंग के लिए आप उन्हें स्पॉन्ज बाथ दे सकती हैं। इस दौरान भी आपको अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। हमेशा बच्चे को पोंछने के लिए नरम सूती कपड़े का ही उपयोग करें। साथ ही शिशु पर किसी भी शैंपू या साबुन का उपयोग न करें। उन्हें सुरक्षित रूप से नहलाएं और बच्चे के बाथ सेशन के लिए एक गर्म स्थान चुनें। शिशु स्नान करने के बाद थका हुआ और नींद महसूस करता है, इसलिए आप उसे बाद में अच्छी और गहरी नींद लेने के लिए स्नान करने के बाद दूध पिला सकती हैं। अपने नवजात शिशु पर किसी भी स्नान उत्पादों का उपयोग करने से बचें क्योंकि इस समय के दौरान उसकी त्वचा बेहद संवेदनशील होती है और यह बाथ प्रॉडक्ट्स उन पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं।



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