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'लाखों बच्चियों की भ्रूण हत्या'
शोध के मुताबिक पिछले दशक में गर्भ मे लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या का चलन सबसे ज़्यादा रहा है. एक नए अनुसंधान के मुताबिक भारत में पिछले 30 सालों में कम से कम 40 लाख बच्चियों की भ्रूण हत्या की गई है.
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अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका 'द लैन्सेट' में छपे इस शोध में दावा किया गया है कि ये अनुमान ज़्यादा से ज़्यादा 1 करोड़ 20 लाख भी हो सकता है. सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च के साथ किए गए इस शोध में वर्ष 1991 से 2011 तक के जनगणना आंकड़ों को नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों के साथ जोड़कर ये निष्कर्ष निकाले गए हैं.
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शोध में ये पाया गया है कि जिन परिवारों में पहली सन्तान लड़की होती है उनमें से ज़्यादातर परिवार पैदा होने से पहले दूसरे बच्चे की लिंग जांच करवा लेते हैं और लड़की होने पर उसे मरवा देते हैं. लेकिन अगर पहली सन्तान बेटा है तो दूसरी सन्तान के लिंग अनुपात में गिरावट नहीं देखी गई.
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इस पर काम करने वाले प्रोफेसर प्रभात झा कहते हैं, "समय के साथ बेटे की चाहत कम नहीं हुई है लेकिन छोटे परिवारों का चलन तेज़ी से बढ़ा है, इसीलिए पहले बेटी होने पर दूसरे बच्चे की लिंग जांच करवाकर परिवार ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनका एक बेटा तो ज़रूर हो."
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इस अनुसंधान में भारत में पिछले तीन दशकों में हुए ढाई लाख जन्मों के बारे में जानकारी जुटाई गई. शोध में मांओं की शिक्षा दर और परिवार के आर्थिक स्तर की जानकारी का अध्ययन भी किया गया जिसके मुताबिक शिक्षित और समृद्ध परिवारों में लड़कों के मुकाबले लड़कियों के अनुपात में ज़्यादा गिरावट देखी गई.
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बच्चियों की भ्रूण हत्या पर कई सालों से काम कर रहे शोधकर्ता साबू जॉर्ज के मुताबिक ये निष्कर्ष नए नहीं है और शिक्षित और समृद्ध परिवारों में ये चलन पिछले अनुसंधानों में भी सामने आए हैं.
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इन आंकड़ों को देखकर वो कहते हैं, "हमारे देश के अलग-अलग राज्यों को देखकर ये साफ हो जाता है कि पिछले दस सालों में शिक्षा की दर, संपत्ति, जाति या समुदाय किसी एक पैमाने पर नहीं, बल्कि सभी तरह के परिवारों में गर्भ में लिंग चुनाव करना आम हो गया है."
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भारत सरकार ने 17 साल पहले ही एक कानून पारित किया था जिसके मुताबिक पैदा होने से पहले बच्चे का लिंग मालुम करना गैरकानूनी है. लेकिन राष्ट्रीय जनसंख्या स्थिरता कोष की पूर्व कार्यकारी निदेशक शैलजा चंद्रा के मुताबिक इस कानून को लागू करना बेहद मुश्किल है. चन्द्रा कहती हैं, "कानून को लागू करने वाले ज़िला स्वास्थ्य अफसर के लिए लिंग जांच करने वाले डॉक्टर पर नकेल कसना बहुत मुश्किल है क्योंकि डॉक्टरों के पास नवीनतम तकनीक उपल्ब्ध है."
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उनके मुताबिक कानून को लागू करने के लिए राज्य स्तर पर मुख्यमंत्रियों को ये बीड़ा उठाना होगा और इसे प्राथमिकता देनी होगी, तभी अफसर हरकत में आएंगे और डॉक्टरों को पकड़ने के तरीके निकालेंगे.



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