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प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए पिलेट्स के लाभ
प्रेग्नेंसी के दौरान पिलेट्स एक सुरक्षित एक्सरसाइज होती है। गर्भावस्था के दौरान होने वाली दिक्कतों जैसे मोटापा, थकान, पैरों में होने वाली सूजन या कमर में होने वाला दर्द आदि से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिलाएं इस व्यायाम को कर सकती हैं।
पिलेट्स एक बॉडी बिल्डिंग विधि है जो शरीर के शक्ति प्रशिक्षण ( खासकर पेट के हिस्से ) और सांस लेने की प्रक्रिया को गर्भवती महिलाओं में स्ट्रांग बनाती है। हर महिला अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार, पिलेट्स के को कर सकती है। यहां हम आपको गर्भवती महिलाओं के लिए पिलेट्स के 9 फायदे बता रहे है।

वजन सही रहता है।
जब आप गर्भवती होती है तो आपको वजन घटाने के लिए डाइट की सलाह नहीं दी जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने बढ़ते वजन पर ध्यान ही न दें। पिलेट्स व्यायाम आपके बढ़ते वजन को कंट्रोल करने में मदद करता है।

शरीर से थकान को दूर भगाना
पिलेट्स, शरीर की सहनशक्ति को बनाए रखता है। अगर गर्भवती औरत के शरीर में सहनशक्ति होगी तो वह थकान नहीं महसूस करेगी।

पैरों में ऐंठन और सूजन दूर करे
पिलेट्स के दौरान पैरों में मूवमेंट करवाने से शरीर में रक्त संचार बढ़ता है। पिलेट्स एक्सरसाइज से मांसपेशियां बढ़ती है और एडि़यां भी बढ़ती है। इससे खून का संचार बेहतरीन तरीके से होता है, पैर की सूजन में आराम मिलता है और ऐंठन भी नहीं होती है।

आपके पॉश्चर को बनाए रखता है
प्रेग्नेसी के दौरान, महिला के शरीर में स्वाभाविक परिवर्तन होते है। शरीर में बड़ा हुआ पेट, शरीर का बीचों - बीच हिस्सा होता है। इन तरह के शारीरिक परिवर्तन का असर महिला के ज्वाइंट पर भी पड़ता है और मांसपेशियों पर भी। पिलेट्स से शरीर के पॉश्चर को मेंटन रखा जा सकता है। इसे करने से शरीर में कोई बीमारी या दिक्कत भी नहीं होती है।

आसानी से अपनी बॉडी शेप को वापस पाएं
कई महिलाएं गर्भावस्था के कारण मोटा होना पसंद नहीं करती हैं। अगर आप वाकई में अपने शरीर के शेप को बनाएं रखना चाहती है तो पिलेट्स को करें। गर्भावस्था में मांसपेशियों को आराम मिलेगा। हांलाकि, गर्भवती स्त्री को ध्यान रखना चाहिए कि गर्भावस्था के दौरान मांसपेशिया लगातार काम करती रहे। ताकि आप आसानी से गर्भावस्था के पहले वाला बॉडी शेप दुबारा पा सके।

मूड बनाएं रखता है।
गर्भावस्था के दौरान सांस लेने में दिक्कत आती है और चलने में तकलीफ होती है। हर दिन की गतिविधियां और मूड खराब होने लगता है। पिलेट्स, लिम्ब को सक्रिय करता है। शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान शरीर को फिट रखता है।

सोने की प्रक्रिया में सुधार आएगा
आमतौर पर गर्भावस्था के तीसरे महीने से गर्भवती महिला को सोने में हल्की - हल्की दिक्कत होने लगती है। उसके सोने के तरीके में परिवर्तन आने से, सांस लेने में दिक्कत होने से या बॉडी के सर्कुलेशन सिस्टम में गर्भावस्था के कारण कई बदलाव होते है जिससे महिला आरामदायक नहीं महसूस करती है। फलस्वरूप, अगर आप ज्यादा रिलैक्स और आरामदायक तरीके से रहना चाहती है तो पिलेट्स करें, शायद आपको आराम मिले।

बच्चे के जन्म के बाद का तनाव दूर करे
प्रसव के बाद महिला की सहनशक्ति वापस आने में समय लग जाता है। नौ महीने की गर्भावस्था, शरीर से सारी ताकत निचोड़ लेती है बल्कि बच्चे के जन्म के दौरान भी बहुत ताकत खर्च होती है। ऐसे में अगर आप खुद को फिट नहीं रखती है तो गर्भावस्था से प्रसव तक आपका शरीर कमजोर पड़ जाएगा। अपने शरीर को मजबूत बनाए रखने के लिए आपको पिलेट्स करना चाहिए। प्रसव के बाद भी इसे करने से लाभ मिलता है।

दर्द - रहित
क्योंकि आपका बच्चा बढ़ रहा है इसलिए आपका पेट भी बढ़ रहा है। इस प्रभाव से कमर में भारीपन आ जाता है। पिलेट्स शरीर को बैलेंस करने में हेल्प करता है, इससे पेट की मांसपेशिया सही रहती है, उन पर पड़ने वाले खिचांव से आराम मिलता है। शरीर में ऊर्जा रहती है और गर्भावस्था में भी शरीर फिट रहता है।



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