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नेचुरल डिलवरी टिप्स और गर्भावस्था सलाह
गर्भावस्था, किसी भी महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है, इस स्टेज में उसकी फीलिंग्स और सोच बिलकुल अलग होती है। आजकल के कठिन लाइफस्टाइल के कारण अक्सर महिलाओं को नेचुरल प्रसव में काफी दिक्कत आती है और उन्हे ऑपरेशन करवाना पड़ता है, इसी के बारे में दिल्ली की गॉयनकोलॉजिस्ट बता रही है कि किन बातों को ध्यान में रखने से नेचुरल प्रसव हो सकता है -
जानकारी ना होने की वजह से गर्भवती महिलाएं कई ऐसी गलतियां कर बैठती हैं जिनके बारे में उन्हें अंदाजा ही नहीं होता। प्रेगनेंसी की शुरुआत में बहुत सारी सावधानियां रखनी पड़ती हैं जैसे, भारी सामान ना उठाना, स्मोकिंग या शराब का सेवन ना करना और गलत आहार ना खाना आदि। यदि आप शुरुआत से ही खुद का बचाव करेगी और समझदारी दिखाएंगी तो आपकी डिलवरी में कोई परेशानी नहीं आएगी और वह नार्मल होगी।

1) प्री - प्रेग्नेंसी स्टेज पर फिटनेस
प्री - प्रेग्नेंसी स्टेज पर फिटनेस का ध्यान रखा जाएं तो इससे नेचुरल प्रसव के चांसेस बढ़ जाते है। जब पेट में बच्चे का विकास हो रहा हो, तो आपको नियमित रूप से एक्सरसाइज करना चाहिए और साथ ही साथ दूसरी शारीरिक गतिविधियां भी करते रहना चाहिए, ताकि आपकी बॉडी में हमेशा मूवमेंट होता रहे। ऐसा करने से हड्डियों और मांसपेशियां मजबूत होती है।

2) शुरूआत के दिनों के लिए व्यायाम
व्यायाम हर फीमेल के लिए जरूरी होता है, फिर चाहें वह मां बनने वाली हो या मां बनने की तैयारी में हो। अगर आप एक्सरसाइज करना शुरू कर रही है तो शुरूआत के कुछ दिनों तक हल्की एक्सरसाइज करें। आप वार्म अप व एक्सरसाइज करें, अगर कहीं दर्द है या सांस लेने में तकलीफ है तो एक्सरसाइज को कम करें या बंद कर दें। अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें और उसके बाद ही एक्सरसाइज शुरू करें।

3) प्रेग्नेंट मां के लिए एक्सरसाइज
प्रेग्नेंसी के टाइम सुरक्षित एक्सरसाइज को चुनें और चोट लगने वाली एक्सरसाइज को भूल से भी न करें। स्वीमिंग, वॉकिंग, एरोबिक्स और बाइकराइडिंग कर सकती है लेकिन प्रति सप्ताह इन्हे कम से कम 4 से 5 बार करें। इन्हे करने से स्पाइन मजबूत होगी और उसमें ताकत आएगी। ऐसा किसी के साथ होने पर ही करें। अकेले में आपको दिक्कत हो सकती है।

4) पहले और दूसरे तिमाही के लिए एक्सरसाइज
प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने में फीमेल, एरोबिक्स, योगा और रिलैक्स होने वाले काम, केगल एक्सरसाइज और वजन प्रशिक्षण कर सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसे सभी काम करने से बचें जिनसे आपको चोट लगने का खतरा हो, जैसे - स्कीईंग, घुडसवारी, पर्वतोराहण और कॉन्टेक्ट स्पोर्ट जैसे - फुटबाल और बास्केटबॉल आदि।

5) तीसरे तिमाही के लिए एक्सरसाइज
इस स्टेज पर आप फिट रहने के लिए वॉक करना सबसे अच्छी एक्सरसाइज होती है। खड़े - खड़े थोड़ा डांस करना भी आपको खुश कर सकता है। घर के काम करते समय कुछ अपबीट म्यूजिक चलाएं, जिससे आपका मन लगा रहे और खुश रहें। ऐसा करने से हार्ट रेट भी मेंटेन रहता है।

6) प्रेग्नेंसी और फिटनेस के लिए टिप्स
प्रेग्नेंसी का आधा समय बीत जाने के बाद से आपको भारी एक्सरसाइज लगभग न के बराबर करनी चाहिए। इससे आपको कमर में दिक्कत हो सकती है। लेकिन अगर स्पाइन में स्ट्रेस हो रहा हो, तो उसके लिए आपको थोड़ा वॉक कर लेना चाहिए। दिन में काफी मात्रा में पानी पिएं। गर्म मौसम में बाहर निकलने से बचें। बॉडी को हमेशा ओवरहीटिंग होने से बचाएं। ढीले - ढाले कपड़े पहने, ज्यादा टाइट कपड़े न पहने, इससे आपको ही उलझन होगी। प्रेग्नेंसी के दौरान सर्पोटिंग ब्राईट पहने, इससे ब्रेस्ट में मूवमेंट ज्यादा नहीं होगा।

7) योगा करने के दौरान सेफ्टी टिप्स:
- योगा के दौरान पीछे मुड़ने वाले पोज से बचें।
- पेट के बल लेटने से बचें।
- अगर आपको एक्सरसाइज के बाद दर्द हो, असहज महसूस हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें।
- हल्के - हल्के गहरी सांस ले।
- प्रैक्टिस योगा के दौरान अपने कमरे का तापमान सामान्य रखें, इससे आपको आराम मिलेगा। कमरा गर्म होने पर आपको चक्कर आ सकते है।
- अन्न से बना हुआ भोजन जैसे - रोटी, ब्रेड, पास्ता और नूडल्स आदि का सेवन करें।
- प्रेग्नेंसी के दौरान सबसे जरूरी होता है कि आप खाने में ताजे फलों और हरी सब्जियों का सेवन करें। बल्कि भोजन में इन्हे शामिल करने की आदत हमेशा के लिए डाल लें।
- हाई कैलोरी और फैटी फूड न लें। कम कैलोरी वाले डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करें, इससे ताकत आएगी और शरीर में वजन भी नहीं बढ़ेगा।
- हाई सुगर वाले खाने का सेवन न करें। इससे बॉडी में सुगर लेवल बढ़ जाएगा और प्रेग्नेंसी के दौरान डायबटीज होने का खतरा होगा।
- एल्कोहल : प्रेग्नेंसी के दौरान, शराब के सेवन से बचें। इससे बच्चे के आईक्यू लेवल पर असर पड़ता है।
- ज्यादा कैलोरी वाले भोज्य पदार्थ का सेवन न करें। खाने में कम ऑयल का इस्तेमाल करें।
- पैकेट वाले जूस पीने से बचें। इसमें सुगर और प्रीजरवेटिव ज्यादा मात्रा में मिले होते है।
- अपनी डायट को बैलेंस रखे।

8) प्रेग्नेंसी के दौरान डायट
प्रेग्नेंसी के दौरान फिटनेस के अलावा, आपके शरीर में पल रहे बच्चे के विकास के लिए सही पोषक तत्वों वाला भोजन भी आवश्यक होता है। पौष्टिक आहार और डेयरी उत्पाद, शरीर के विकास को बढ़ाने में मदद करता है।

9) प्रेग्नेंसी के दौरान लिया जाने वाला भोजन

10) प्रेग्नेंसी के दौरान क्या - क्या खाने से बचें
बहुत सीधी सी बात है, आप प्रेग्नेंसी के दौरान वो सबकुछ न खाएं, जिससे आपको दिक्कत हो या आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो।

11) प्रसव के लिए महत्वपूर्ण एक्सरसाइज और सही खुराक
प्रेग्नेंसी के दौरान, कई शारीरिक गतिविधियों से बचें। सिर्फ टहलें, खाने में पोषक तत्वों से भरपूर भोजन सामग्री को शामिल करें। कैल्सियम और विटामिन की भरपूर मात्रा लें, इससे पेल्विक बोन्स और मांसपेशियां मजबूत होगी। इससे बच्चे के पैदा होने में कम दिक्कत होती है।

12) प्रसव के लिए रिस्क फैक्टर
नेचुरल प्रसव में बच्चे की बॉडी में पोजिशन दिक्कत कर सकती है।
महिला का वजन बहुत कम या बहुत ज्यादा होने पर या पेल्विस या लोअर लिम्ब ( रिकेट, पोलियो, एक्सीडेंट से लगने वाली चोट ) में दिक्कत होने पर भी नेचुरल प्रसव में दिक्कत होती है और ऑपरेशन करना पड़ सकता है।

13) एक्सरसाइज में कमी और खराब भोजन का सेवन
प्रेग्नेंसी के दौरान अगर महिला सही तरीके से एक्सरसाइज नहीं करेगी तो उसकी बॉडी में कई दिक्कतें पैदा हो सकती है, जिससे उसे बच्चे को प्राकृतिक रूप से पैदा करने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे समय में डॉक्टरी सलाह से एक्सरसाइज करें। भोजन में उच्च पोषक तत्वों वाले आहार को शामिल करें। वॉक करें। फास्ट फूड के सेवन से बचें। एसिड बनाने वाले या वादी भोजन का न खाएं। ड्राई फ्रूट्स, खाना आदि को खाएं।



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