Latest Updates
-
Heatwave Alert: दिल्ली समेत कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट, जानें भीषण गर्मी का सेहत पर असर और बचाव के टिप्स -
Guru Bhairavaikya Mandira: कर्नाटक का गुरु भैरवैक्य मंदिर क्यों है इतना खास? जिसका पीएम मोदी ने किया उद्घाटन -
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न खरीदें ये 5 चीजें, दरवाजे से लौट जाएंगी मां लक्ष्मी -
डायबिटीज में चीकू खाना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट -
Aaj Ka Rashifal 16 April 2026: सर्वार्थ सिद्धि योग से चमकेगा तुला और कुंभ का भाग्य, जानें अपना भविष्यफल -
Akshaya Tritiya पर किस भगवान की होती है पूजा? जानें इस दिन का महत्व और पौराणिक कथा -
Parshuram Jayanti 2026 Sanskrit Wishes: परशुराम जयंती पर इन संस्कृत श्लोकों व संदेशों से दें अपनों को बधाई -
कौन हैं जनाई भोंसले? जानें आशा भोसले की पोती और क्रिकेटर मोहम्मद सिराज का क्या है नाता? -
Amarnath Yatra Registration 2026: शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन, घर बैठे कैसे करें आवेदन, क्या हैं जरूरी डॉक्यूमेट्स -
Akshaya Tritiya पर जन्म लेने वाले बच्चे होते हैं बेहद खास, क्या आप भी प्लान कर रहे हैं इस दिन डिलीवरी
प्रेगनेंसी में बीपी की समस्या के लिये घरेलू उपचार
उच्च रक्ताचाप गर्भस्थ शिशु के साथ-साथ माता के लिये भी घातक होता है। जब आप गर्भवती हों तो रक्तचाप को नियन्त्रित होना चाहिये।
जब रक्तचाप 140/90 के ऊपर होता है तो यह कई समस्याओं को जन्म देता है। अगर रक्तचाप नियन्त्रित न रहे और गर्भावस्था के 20वें सप्ताह तक सामान्य दर पर न आये तो ऐसी अवस्था में प्री-एकलैमप्सिया का रूप ले सकता है जिसे टॉक्सेमिया और गर्भावस्था जनित उच्च रक्तचाप कहते हैं।
यह एक गम्भीर स्थिति है जिसके कारण आपके मस्तिष्क तथा वृक्क पर प्रभाव पड़ने के साथ ही शरीर के अन्य अंगों को भी क्षतिग्रस्त करता है।
उच्च रक्तचाप जिससे कि अकसर प्री-एकलैमप्सिया हो जाता है और यह मूत्र में प्रोटीन, हाथ एवं पैरों में असमान्य सूजन और लगातार सिरदर्द जैसे लक्षण उत्पन्न करता है।
यह गर्भस्थ शिशु की वृद्धि दर को भी प्रभावित करता है और शिशु कम भार वाला हो जाता है। इसलिये सबसे अच्छा यह है कि माँ हर सम्भव प्रयास से उच्च रक्तचाप को नियन्त्रित रखे। यदि रक्तचाप नियन्त्रण की दवायें दी गई हों तो उन्हें लेना न भूलें।
और यदि डॉक्टर ने घरेलू उपायों की ओर ध्यान देने को कहे तो गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप को नियन्त्रित करने के सर्वश्रेष्ठ उपाय निम्नलिखित हैं।

अपने नमक की मात्रा पर नजर रखें
गर्भावस्था में अधिक नमक खाना खराब होता है। यदि आप उच्च रक्तचाप से पीड़ित है तो 3 ग्राम से अधिक नमक न लें।

तरल सहायक हैं
दिन भर में पर्याप्त मात्रा में तरल लेने की आदत डालें क्योंकि रक्तचाप कम करने के लिये यह सबसे अच्छी आदत है। आप नमक या शर्करा रहित फलों तथा सब्जियों के रसों को ले सकते हैं।

स्वस्थ आहार लें
क्या आपको पता है कि जितना पोषक तत्व आप लेंगी उतनी ही स्वस्थ आप गर्भस्थ शिशु के लिये होंगी। एल्फा-लिनोइक अम्ल सोयाबीन, अखरोट, अलसी तथा पालक जैसी गहरे हरे रंग वाली पत्तेदार सब्जियों से प्राप्त की जा सकती हैं।

ओमेगा-3 भोज्य पदार्थों को बढ़ायें
गर्भावस्था के दौरान यदि आप उच्च रक्तचाप को नियन्त्रित करने के लिये जूझ रही हैं तो ओमेगा-3 वसीय अम्ल की मात्रा बढ़ाना आवश्यक है। कॉड लिवर ऑयल, अखरोट का टोफू, सारडीन आदि कुछ अच्छे विकल्प हो सकते हैं।

रक्तचाप को कम करने वाले प्राकृतिक पूरक
गर्भावस्था में रक्तचाप को कम करने वाला सबसे अच्छा प्राकृतिक पूरक कोका है। कोका की एक खुराक में फ्लैवोनॉइड होते हैं जोकि शरीर में नाइट्रिक अम्ल उत्पादन को प्रेरित करते हैं जो कि मस्तिष्क तथा शरीर के अन्य भाग में रक्त प्रवाह बढ़ा देता है और रक्तचाप को नियन्त्रित करता है।

जड़ी बूटियों से प्यार कीजिये
क्या आप को पता है कि कुछ जड़ी बूटियाँ चमत्कारी रूप से रक्तचाप नियन्त्रण में सहायक हैं। लहसुन धमनियों की थकान को कम करता है, हृदय के दर को नियन्त्रित करता है और धड़कन को कम करता है जिससे कि रक्तचाप कम हो जाता है।

टहलें
टहलनें से कई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्यायें दूर हो सकती हैं, खासतौर से उच्च रक्तचाप। जब आप टहलें तो गहरी साँस लेकर छोड़ें। छोटे-छोटे कदम लें और सकारात्मक चीजें सोचें जिससे कि आपका उच्च रक्तचाप कम हो जायेगा।

किसी जीव को पालें
किसी पालतू जीव द्वारा अपने मस्तिष्क का ध्यान भटकायें। ग्रभावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप नियन्त्रण का यह सबसे बढ़िया प्राकृतिक साधन है। पालतू जीव आपके मन को शान्त करते हैं और सभी प्रकार के तनाव तथा चिन्ता से ध्यान भटकाने में सहायक होते हैं।



Click it and Unblock the Notifications











