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गर्भावस्था के समय स्त्री के शरीर का हारमोनल प्रोफाइल बदलता है और इससे त्वचा में बदलाव आ सकता है। Dr. के अनुसार गर्भावस्था के दौरान त्वचा पर कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।
गर्भावस्था के समय स्त्री के शरीर का हारमोनल प्रोफाइल बदलता है और इससे त्वचा में बदलाव आ सकता है। त्वचा में आए परिवर्तन से बहुत ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, बस जरूरत है थोड़ी-सी अतिरिक्त देखभाल की।
आइए जानें डाॅक्टर और सौंदर्य विशेषज्ञ त्वचा में आए इस परिवर्तन का क्या कारण मानते हैं और क्या है इस दौरान त्वचा की देखभाल का सही तरीका। डाॅ के अनुसार गर्भावस्था के दौरान त्वचा पर कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।

1. मुँहासे
गर्भावस्था के शुरू में कुछ महिलाओं को मुंहासे हो जाते हैं, खासकर तब जब आपको बहुत थकन और मिचली आती हो। लगातार तनाव होने से तेल ग्रंथि अधिक तेल बनाने लगती है और त्वचा का पीएच लेवल बिगड़ने लगता है जिससे मुंहासे हो जाते हैं।
उपाए
खूब सारा पानी पाएं और अपने शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालें। मुँहासे को रोकने के लिए जितना हो सके मीठा ना खाएं और अगर इसके बाद भी मुहांसे हो तो उसे छुएं या दबाएं नहीं। अपने चेहरे को लैक्टिक क्लीनर से साफ़ करें और टी ट्री आयल लगाएं।

2. सूखी त्वचा
बढ़ते हुए बच्चे को पोषण और हाइड्रैशन की जरुरत पड़ती है और इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि वो यह सब आपके शरीर से लेगा। इससे आपके शरीर में पानी की कमी होगी जिससे त्वचा सूखी हो जायेगी।
उपाए
खूब सारा पानी पीने के अलावा अपने चहरे को लैक्टिक युक्ति क्लेन्ज़र से साफ़ करें जिससे त्वचा पर नमी बनी रहे।

3. खुजली
इस खुजली का मुख्य कारण पेट के फैलने की वजह से त्वचा का खिंचना है। जिससे त्वचा सुखी हो जाती है।
उपाए
त्वचा पर तेल से मालिश करने से पेट, कूल्हे और जांघों की त्वचा को नमी दी जा सकती है। यही नहीं इसके लिए आप खूब पानी पीएं जिससे आपकी त्वचा रूखी ना हो।

4. संवेदनशील त्वचा
गर्भावस्था के दौरान त्वचा अधिक संवेदनशील होती है। जो स्क्रब आप इस्तेमाल कर रहीं थी उससे अब त्वचा पर सूजन आजाती है साथ ही डीओडरन्ट से आपकी त्वचा पर खुजली होने लगती है।
उपाए
गर्भावस्था के दौरान अलग अलग कॉस्मेटिक उत्पादनो का इस्तेमाल ना करें। इसके बजाये प्राकृतिक उत्पादनो का इस्तेमाल करें। यही नहीं बदलते हार्मोन की वजह से आपकी त्वचा पर सनबर्न होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए सनस्क्रीन या मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं।

5. झाइयां
हार्मोन में परिवर्तन की वजह से शरीर में अस्थायी रूप से मेलेनिन बढ़ने लगता है जिससे कभी-कभी हाइपरपिग्मेंटेशन होने लगता है। गर्भावस्था के दौरान गर्दन और हाथों पर कालापन आने लगता है।
उपाए
हाइपरप्ग्मेंटेशन को रोके ने लिए आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं। इसके लिए जितना हो सके सूरज की तेज़ रौशनी से बचे। यही नहीं जब भी बाहर जाएँ अच्छे एसपीएफ़ के साथ सनब्लॉक का उपयोग करें।



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