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इन 7 वजहों से प्रेग्नेंसी में रात के समय नहीं आ पाती नींद
प्रेग्नेंसी के दौरान नींद में दिक्कत आना आम समस्या है लेकिन् प्रेग्नेंसी के तीसरे चरण में स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है।
मां बनना न केवल इस दुनिया की सबसे बड़ी खुशी है बल्कि सबसे बड़ी चुनौती भी है। प्रेग्नेंनसी के दौरान महिलाओं को शारीरिक के साथ-साथ मानसिक पीड़ा से भी गुज़रना पड़ता है।
इस दौरान महिलाओं को भरपूर आराम की जरूरत होती है। शिशु के जन्म लेने के बाद रातभर मां को जागना पड़ता है लेकिन डिलीवरी से पहले प्रेग्नेंसी के दौरान भी सही नींद ले पाने में दिक्कत आती है।
जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी का समय बीतता है वैसे-वैसे आपको महसूस होने लगता है कि जिस चीज़ की आपको सबसे ज्यादा जरूरत है वही आपको नहीं मिल पा रही है।
प्रेग्नेंसी के दौरान नींद में दिक्कत आना आम समस्या है लेकिन् प्रेग्नेंसी के तीसरे चरण में स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है। ऐसे समय में जो भी परेशानियां आती हैं वो आपको प्रसव के लिए ही तैयार कर रही होती हैं। इस वजह से आपमें डिप्रेशन और बेचैनी दोनों ही बढ़ने लगती हैं।

बार-बार पेशाब आना
गर्भावस्था के दौरान किडनी सामान्य से ज्यादा तेज गति से कार्य करने लगती है। सामान्य की तुलना में गर्भावस्था के समय किडनी खून को फिल्टर करने का काम 50 प्रतिशत अधिक करती है। जिसके परिणामस्वरूप बार-बार पेशाब आता है। गर्भावस्था के तीसरे चरण में वजन बढ़ने की वजह से आपके ब्लैडर पर भी दबाव पड़ता है जिसकी वजह से परिस्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है। बार-बार पेशाब आने की वजह से भी रात में नींद नहीं आ पाती है। ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए आपको रात की तुलना में दिन के समय अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए। ये समाधान तो नहीं है लेकिन इससे आपको थोड़ा-बहुत आराम तो जरूर मिलेगा।

सीने में जलन और अपच की समस्या
ऐसोफेगस और पेट के बीच में लोअर ऐसाफेगल स्फिंक्टर होता है। इसका प्रमुख कार्य खाने और पेट के एसिड्स को एसोफेगस में जाने से रोकना होता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्ट्रॉन नामक हार्मोन का स्राव होता है जिससे मांसपेशियों को राहत मिलती है। इस हार्मोन के स्राव के कारण लोअर ऐसाफेगल स्फिंक्टर को भी आराम मिलता है और इस वजह से सीने में जलन महसूस होती है। रात में नींद टूटने का एक ये भी कारण है। गर्भावस्था के दौरान अधिक खाने की वजह से भी अपच होती है। गर्भावस्था के दौरान तैलीय, मसालेदार, वसायुक्त भोजन का सेवन न करें। धीरे-धीरे खाएं और सही पोजीशन में सोने की कोशिश करें।

बच्चे के हिलने की वजह से
जब शिशु आपके गर्भ में कोई हरकत करता है तो आपको थोड़ी बेचैनी सी महसूस होती है। ऐसे में आपको नींद आ पाना बहुत मुश्किल होता है। रात के समय अगर शिशु कोई हलचल करता है तो इस वजह से भी आपकी नींद टूट जाती है। शिुश के हरकत करने के विषय में आप कुछ भी नहीं कर सकती हैं। गर्भ में बच्चे के हिलने-डुलने से ही पता चलता है कि बच्चा स्वस्थ और एक्टिव है। जल्दी ही आपको इसकी आदत हो जाएगी और फिर आप आराम से सो भी पाएंगीं।

पैरों में ऐंठन
पैरों में ऐंठन और दर्द काफी परेशान करता है। गर्भावस्था के दौरान ये समस्या काफी आम होती है। शिशु के कुछ तंत्रिकाओं पर दबाव डालने के कारण पैरों में रक्तप्रवाह बाधित होता है जिसकी वजह से पैरों में ऐंठन होती है। रात के समय ये दर्द आपको सोने नहीं देता। इस दर्द को कम करने के लिए अपनी मांसपेशियों में थोड़ा खिंचाव करें और आइस पैक भी लगाएं। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।

पैरों में कमज़ोरी
गर्भावस्था के दौरान आपको पोषणयुक्त आहार और सप्लीमेंट्स लेनी चाहिए ताकि आपकी और आपके शिशु की सेहत ठीक रहे। गर्भावस्था में आयरन की कमी की वजह से भी पैरों में कमज़ोरी आने लगती है। इस वजह से आपको पैरों में झुनझुनाहट महसूस होती है और बार-बार पैर हिलाने का मन करता है। ऐसी स्थिति में पैरों को थोड़ा स्ट्रेच करें। हो सके तो थोड़ा पैदल भी चल सकती हैं। इसके बाद आपको आराम से नींद आने की संभावना है। अगर आपको बहुत ज्यादा परेशानी है तो डॉक्टर से अवश्य परामर्श लें।

आरामदायक पोजीशन न मिलने की परेशानी
गर्भावस्था में पेट के बड़े आकार की वजह से सोने की किसी भी पोजीशन में आराम नहीं मिल पाता है। नींद आ भी जाए तो हल्का सा भी पोजीशन बदलने पर नींद में खलल पड़ ही जाती है। गर्भावस्था के दौरान आपको मुलायम गद्दे और तकिये का प्रयोग करना चाहिए जिससे आपके पेट को सहारा मिले। बाईं तरफ सोने की आदत डालें क्यों कि इसी तरफ से शिशु के लिए बेहतर तरीके से रक्त प्रवाह हो पाता है।

तनाव
अकसर महिलाएं प्रसव और मां बनने के बाद की चुनौतियों को लेकर परेशान रहती हैं। प्रसव की तकलीफ को लेकर भी मन बेचैन होने लगता है। बस यही बातें गर्भावस्था के दौरान रात को चैन की नींद नहीं लेने देती। जब भी आपको बेचैनी हो तो गहरी सांस लें और रिलैक्स करें। हल्का म्यूजिक सुनें और कोई किताब पढ़ें। इससे आपका ध्यान दूसरी चीज़ों में लगेगा और आप प्रसव की पीड़ा के बारे में नहीं सोचेंगीं। रिलैक्स होने के बाद आपको चैन नींद आएगी।



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