प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में क्या क्या सोचती हैं महिलाएं

गर्भावस्‍था का समय हर महिला के लिए बहुत खास होता है। इसमें उसे बस इंतज़ार होता है कि कब उसका शिशु उसकी गोद में आएगा लेकिन प्रेगनेंसी का समय बहुत मुश्किल होता है। खासतौर पर गर्भावस्‍था के अंतिम चरण में ज़्यादा मु‍श्किलें आती हैं। आप चाहे कितनी भी तैयारी कर लें लेकिन फिर भी ये बात मानने में मुश्किल होती है कि आपके अंदर बच्‍चा पल रहा है।

पहली बार मां बन रही महिलाओं के लिए ये सफर बहुत अलग होता है। प्रेगनेंसी के खत्‍म होते-होते उनके मन में कई तरह के ख्‍याल आते हैं। इस दौरान हार्मोंस बदलने की वजह से वो काफी इमोशनल भी हो जाती हैं। अगर आप इस दौर से गुज़र रही हैं तो अच्‍छी तरह से समझ सकती हैं कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं।

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आज हम आपको बताएंगे कि प्रेगनेंसी के आखिरी चरण में महिलाओं के दिमाग में कैसे ख्‍याल आते हैं।

दर्द होगा

शिशु को जन्‍म देने में मां को असहनीय पीड़ा होती है। प्रसव पीड़ा इस दुनिया की सबसे मुश्किल प्रक्रिया में से एक है जिसमें सबसे ज़्यादा दर्द होता है। इसे लेकर गर्भवती स्त्रियां सबसे ज़्यादा परेशान रहती हैं। अच्‍छी बात ये है कि आजकल की महिला इस दर्द को बर्दाश्‍त कर लेती हैं। अपने दर्द को सहने के लिए सांस लेने के कुछ व्‍यायाम और मेडिटेशन सीखें।

बच्‍चे की सेहत

पूरी प्रेगनेंसी के दौरान मां के मन में एक ही बात रहती है और वो है बच्‍चे की सेहत। जैसे-जैसे बच्‍चे के जन्‍म का समय पास आता है मां की चिंता बढ़ती जाती है। अगर आप बच्‍चे की सेहत को लेकर बहुत ज़्यादा चिंतित हैं तो अपने डॉक्‍टर से बात करें। चेकअप और अल्‍ट्रासाउंड से आप अपने बच्‍चे की सेहत के बारे में जान सकती हैं। भगवान से अपने बच्‍चे के लिए प्रार्थना ज़रूर करें।

पति इतने बेफिक्र हैं

गर्भावस्‍था के दौरान आपको बहुत तकलीफ सहनी पड़ती है जबकि आपके पुरुष शारीरिक रूप से फ्री होते हैं। ऐसे में महिलाएं सोचने लगती हैं कि अगर उनके पति को बच्‍चा पैदा करना होता तो कितना अच्‍छा होता।

बच्‍चा किस पर जाएगा

इस समय तक आप कुछ ज़्यादा ही रहस्‍यमयी होने लगती हैं। जैसे-जैसे प्रेगनेंसी खत्‍म होने लगती है आपके मन में बच्‍चे की तस्‍वीर बनने लगती है और आप सोचने लगती हैं कि वो किस पर गया है। अचानक से आप अपनी और अपने पति के बचपन की तस्‍वीरें निकाल लेती हैं और उससे बच्‍चे को मिलाने लगती हैं।

बच्‍चे को वेलकम करना

डिलीवरी की डेट पास आने लगती है तो आप बेचैन हो जाती हैं कि कब वो दिन आएगा जब आप अपने बच्‍चे के साथ घर में प्रवेश करेंगी। उसके वेलकम के लिए घर को साफ करने लगती हैं। उसके लिए नई-नई चीज़ें खरीदती हैं। इसे नेस्टिंग इंस्टिंक्‍ट कहते हैं जो कि आपकी बॉडी को बच्‍चे के आने के लिए तैयार होने की खबर देता है। इसकी वजह से आपको डिलीवरी से पहले बहुत थकान भी हो सकती है इसलिए थोड़ा सावधान रहें।

वजाइना की स्थिति

अगर आपका सामान्‍य प्रसव होने वाला है तो आपको अपनी वजाइना की चिंता होना लाज़िमी है। बच्‍चे के जन्‍म से पहले वजाईना में थोड़ा खिंचाव होने लगता है। आपको डर लगने लगता है कि अगर आपकी वजाइना को कोई नुकसान हो गया है तो फिर आपकी मैरिड लाइफ बर्बाद हो सकती है।

आपके सारे डर झूठ साबित होते हैं क्‍योंकि वजाइना बहुत लचीली होती है और कुछ ही हफ्तों में ये वापस अपनी वास्‍तविक स्थिति में आ जाती है। प्रसव के दौरान कोई घाव हो तो वो भी भर जाता है। प्रेगनेंसी के बाद आपके पार्टनर को भी ज़्यादा फर्क नहीं लगेगा। फिर भी वजाइना को टाइट करने के लिए आप कीगेल एक्‍सरसाइज़ कर सकती हैं।

मां कहां है?

डिलीवरी की डेट पास आते-आते आपकी नज़रें अपनी मां को ढूंढने लगती हैं। प्रसव के दौरान मां का साथ बहुत ज़रूरी होता है। गर्भावस्‍था को लेकर आपके मन में जो भी सवाल होते हैं उनका जवाब आपको अपनी मां के पास मिलता है।

क्‍या होगा जब आप प्रसव के दौरान तैयार ना हों तो

ऐसा हो सकता है कि डॉक्‍टर द्वारा बताई गई डेट से पहले या बाद में बच्‍चे का जन्‍म हो जाए। आपको डर लगने लगता है कि कहीं प्रसव वाले दिन आप ट्रैफिक या मॉल में ना फंस जाएं।

वाकई में ये रिस्‍क वाली बात है लेकिन इस पर आपका या किसी और का कोई कंट्रोल नहीं है। ऐसी किसी परिस्थिति से निपटने के लिए अपने साथ कुछ कपड़े और अन्‍य कपड़े रखें। प्रसव के चरण में अपने साथ ज़रूरी नंबर रखें। अपने पति, माता-पिता और डॉक्‍टर का नंबर साथ रखें।

Story first published: Monday, July 16, 2018, 11:45 [IST]
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