Latest Updates
-
लंच में बनाएं उत्तर प्रदेश की चना दाल कढ़ी, उंगलिया चाटते रह जाएंगे घरवाले -
Gangaur Ke Geet: 'आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै'...इन मधुर गीतों के बिना अधूरी है गौरा पूजा, यहां पढ़ें पूरे लिरिक्स -
प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीनों में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, वरना बच्चे की सेहत पर पड़ेगा बुरा असर -
Viral Video: टीम इंडिया की T20 वर्ल्ड कप जीत पर पाकिस्तान में जश्न, काटा केक और गाया 'जन-गण-मन' -
कौन हैं Mahieka Sharma? जिसके प्यार में 'क्लीन बोल्ड' हुए Hardik Pandya, देखें वायरल वीडियो -
कौन हैं Aditi Hundia? T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद Ishan Kishan के साथ डांस Video Viral -
काले और फटे होंठों से हैं परेशान? तो पिंक लिप्स पाने के लिए आजमाएं ये घरेलू नुस्खे -
Chaitra Navratri 2026: 8 या 9 दिन जानें इस बार कितने दिन के होंगे नवरात्र? क्या है माता की सवारी और इसका फल -
Gangaur Vrat 2026: 20 या 21 मार्च, किस दिन रखा जाएगा गणगौर व्रत? नोट करें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त -
घर में लाल चीटियों का दिखना शुभ है या अशुभ? जानें शकुन शास्त्र के ये 5 बड़े संकेत
डिलीवरी प्लान करने से कम हो सकती हैं हाइपरटेंशन से जुड़ी दिक्कतें, स्टडी
गर्भवती महिलाओं को कई सारे सलाह दी जाती हैं लेकिन उन्हें कभी ये नहीं बताया जाता कि उन्हें अपने डिलीवरी भी प्लान करनी चाहिए। एक नई स्टडी में पाया गया है कि अगर महिलाएं प्री-टर्म प्री क्लैंपसिआ से पीड़ित हैं तो इन्हें अपनी डिलीवरी प्लान करके रखनी चाहिए। इससे डिलीवरी में आने वाली मुश्किलें और हाइपरटेंशन का खतरा कम हो जाता है। अध्ययन में 34-37 सप्ताह की गर्भवती महिलाओं में प्री-एक्लेमप्सिया के वर्तमान और नए तरीकों की तुलना करते हुए एक परीक्षण से यह निष्कर्ष निकाला गया। यह अध्ययन 'द लैंसेट' पत्रिका में प्रकाशित किया गया था।

शोधकर्ताओं ने पाया कि प्री-टर्म प्रीएक्लेंपिआ के पता चलने के 48 घंटे के भीतर ही डिलीवरी प्लान करने से (नॉर्मल या जरूरत पड़ने पर सिजेरियन डिलीवरी) डिलीवर में होने वाली मुश्किलों जैसे कि हाइपरटेंशन से बचा जा सकता है।
जिन महिलाओं ने प्रेगनेंसी के दौरान देखभाल की वर्तमान पद्धति का इस्तेमाल किया उनमें नॉर्मल डिलीवरी होने की ज्यादा संभावना थी। वर्तमान पद्धति से तुलना करने पर शिशु को किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं थी जैसे कि सांस लेने में दिक्कत होना आदि।
प्री-एक्लेमप्सिया एक ऐसी स्थिति है जो 20 में से 1 गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के मध्य चरण में प्रभावित करती है। अगर इसका इलाज न किया जाए इसकी वजह से महिला को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जिसमें महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचना, दौरे पड़ना शामिल है। साथ ही ये मां और बच्चे के लिए घातक भी हो सकता है। वैश्विक स्तर पर हर दिन इसकी वजह से 100 महिलाओं की मृत्यु होती है।
किंग्स कॉलेज लंदन से प्रमुख लेखक प्रोफेसर लुसी चैपल ने बताया, "हम यह पता लगाना चाहते थे कि प्री-एक्लेमप्सिया से ग्रस्त महिला के लिए डिलीवरी का सबसे सही समय क्या हो सकता है। " अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि इस स्थिति में डिलीवरी के लिए जो समय तय किया गया था उससे बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।



Click it and Unblock the Notifications











