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सानिया मिर्जा और शोएब मालिक की तलाक की वजह से बेटे पर पड़ा बुरा असर, डिवोर्स में बच्चों को कैसे करें हैंडल
सानिया मिर्जा और शोएब मलिक का तलाक हर तरफ सुर्खियां बटोर रहा है। शोएब मलिक ने पाकिस्तानी एक्ट्रेस सना जावेद से शादी करके सबको चौंका दिया। यह शोएब की तीसरी और सना जावेद की दूसरी शादी थी। उनकी शादी पहले उमैर जसवाल से हुई थी। इस निकाह के बाद से ही नेटिज़न्स शोएब मलिक को ट्रोल कर रहे हैं। हालांकि, इस तलाक का अगर सबसे बुरा असर किसी पर पड़ा है तो वह है सानिया मिर्जा और शोएब मलिक के पांच साल के बेटे इज़ान पर।
किसी भी बच्चे के लिए अपने पैरेंट्स को अलग होते हुए देखना मानसिक व भावनात्मक रूप से काफी परेशान करने वाला होता है। इतना ही नहीं, घर से बाहर की दुनिया में उस बच्चे से कई तरह के सवाल किए जाते हैं और उसे कई बार तो उसे बुरी तरह से ट्रोल भी किया जाता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि एक पैरेंट्स के रूप में बच्चे को बेहद ही प्यार के साथ हैंडल किया जाए।

तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स के बारे में बता रहे हैं, जो इस विपरीत परिस्थिति में बच्चे को संभालने में काफी मदद करेंगे-
इमोशनली हो जाते हैं डिस्टर्ब
जब किसी बच्चे के पैरेंट्स का तलाक होता है तो इससे उनके मन में कई तरह की नेगेटिव फीलिंग्स आने लगती हैं। वे इमोशनली काफी डिस्टर्ब हो जाते हैं। यह संभव है कि उन्हें हरवक्त उदासी, गुस्सा, चिंता और यहां तक कि अपराध बोध का अहसास हो। इस स्थिति में वे कई बार तलाक के लिए खुद को दोषी मान सकते हैं। ऐसे में पैरेंट्स की यह जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों को इमोशनल सपोर्ट दें। उनके साथ ओपन कम्युनिकेशन करें। जिससे उन्हें अपनी फीलिंग्स को जताने का मौका मिल सके।
स्टडीज पर फोकस ना कर पाना
अमूमन यह देखा जाता है कि पैरेंट्स के तलाक का स्ट्रेस कहीं ना कहीं बच्चे की पढ़ाई पर भी अपना प्रभाव दिखाता है। ऐसे बच्चे पढ़ाई पर सही तरह से फोकस नहीं कर पाते हैं और इससे उनकी परफार्मेंस पर बहुत अधिक नेगेटिव असर पड़ता है। अगर बच्चे के साथ ऐसा हो रहा है तो आप टीचर्स व स्कूल काउंसलर से इस विषय में बात करें और उनके साथ मिलकर बच्चे को सपोर्ट करें। आप बच्चे को ऐसा माहौल देने की कोशिश करें, जिससे वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगा सके।
को-पैरेंटिंग चैलेंज
अमूमन बच्चा माता-पिता के तलाक से इसलिए भी परेशान हो जाता है, क्योंकि उसे लगता है कि अब उसे किसी एक को चुनना पड़ेगा। इतना ही नहीं, पैरेंट्स भी बच्चे की कस्टडी के लिए लड़ते हैं, जिससे बच्चे के मन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए, बच्चे की भलाई के लिए यह जरूरी है कि आप को-पैरेंटिंग का रास्ता अपनाएं। आप आपस में मिलकर यह तय कर सकते हैं कि बच्चे को किसके साथ रखना बेहतर ऑप्शन होगा। कभी भी बच्चे के सामने कोई नेगेटिव बातें ना करें। अगर आप बच्चे की कस्टडी व को-पैरेंटिंग को लेकर सहमत नहीं हो पा रहे हैं तो ऐसे में काउंसलर की मदद भी ली जा सकती है।
अकेलेपन की भावना
जब किसी भी बच्चे के पैरेंट का तलाक होता है तो ऐसे में बच्चा खुद को अकेला फील करने लगता है। उसके अंदर कई तरह की नेगेटिव फीलिंग्स आने लगती हैं। हो सकता है कि इसकी वजह से उसके व्यवहार में भी बदलाव आने लगे। ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चे के साथ समय बिताएं और उसे यह समझाने का प्रयास करें कि आप दोनों हमेशा उसके साथ हैं। जब आप बच्चे को आश्वस्त कर पाते हैं तो ऐसे में उसके मन का अकेलापन काफी हद तक दूर होता है। हालांकि, अगर आप बच्चे को समझा नहीं पा रहे हैं तो ऐसे में चाइल्ड काउंसलर की मदद ली जा सकती है।



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