Social Media Ban: 16 साल से कम उम्र के बच्चे नहीं चला पाएंगे Facebook-Instagram? इन 2 राज्यों में बैन की तैयार

Social Media Ban For Children Under 16 Years: आजकल के दौर में बच्चों के हाथों में खिलौनों से ज्यादा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ऐप्स नजर आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह डिजिटल दुनिया बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए कितनी खतरनाक साबित हो रही है? इसी चिंता को देखते हुए सरकार अब एक नया कानून लाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Instagram, Facebook, और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल प्रतिबंधित हो सकता है।

आस्ट्रेलिया में तो पहले से ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन था अब भारत के दो राज्य भी इस राह पर निकल पड़े हैं। आइए जान लेते हैं कि वो कौन से दो राज्य हैं और आखिर सरकार को इतना सख्त फैसला क्यों लेना पड़ रहा है...

क्यों लग रहा है सोशल मीडिया पर प्रतिबंध?

डिजिटल क्रांति ने सोशल मीडिया को हर हाथ तक पहुंचा दिया है, लेकिन इसकी सहज पहुंच ने नए संकट भी पैदा कर दिए हैं। वर्तमान में सोशल मीडिया पर उपलब्ध कंटेंट की गुणवत्ता एक बड़ा सवाल बनी हुई है। जहां एक ओर यह ज्ञान का स्रोत है, वहीं दूसरी ओर अशोभनीय और भ्रामक जानकारी (Fake News) का अंबार लगा है। इसी के चलते अब दुनिया भर में सोशल मीडिया के नियमन को लेकर एक नई और गंभीर बहस छिड़ गई है।

बच्चों की मानसिक सुरक्षा पर उठे सवाल

नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता बच्चों का भविष्य है। सोशल मीडिया का एल्गोरिदम बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। इसी चिंता के बीच, ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस कदम ने भारत में भी यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या हमारे बच्चों को भी इस डिजिटल जोखिम से बचाने के लिए ऐसे ही सख्त कानून की जरूरत है?

इन दो राज्यों में हो सकता है सोशल मीडिया बैन

भारत में डिजिटल सुरक्षा के नियम मुख्य रूप से केंद्र के अधीन हैं, लेकिन इस बार पहल राज्यों की ओर से होती दिख रही है। जी हां, आस्ट्रेलिया के बाद अब गोवा के आईटी मंत्री रोहन खाउंटे ने स्पष्ट किया है कि उनका विभाग ऑस्ट्रेलिया के कानून का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। सरकार यह देख रही है कि भारतीय परिस्थितियों में इसे कैसे लागू किया जा सकता है। वहीं आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने भी ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर विचार करने की बात कही है। राज्य सरकार ने इसके कानूनी पहलुओं की जांच के लिए मंत्रियों की एक समिति भी गठित कर दी है।

मद्रास हाईकोर्ट का सुझाव

दिसंबर 2025 में मद्रास हाईकोर्ट ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि सरकार को ऑस्ट्रेलिया जैसे सख्त कानूनों पर विचार करना चाहिए। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इंटरनेट और टेलीकॉम केंद्र का विषय है, इसलिए राज्यों के लिए अकेले इस प्रतिबंध को लागू करना एक बड़ी कानूनी चुनौती होगी।

भारत में वर्तमान स्थिति

भारत में 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' (DPDP) के तहत बच्चों के डेटा को लेकर नियम पहले से मौजूद हैं। इसके अनुसार, बच्चों का डेटा जुटाने के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है। बच्चों को लक्षित (Targeted) विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक है। इन नियमों को पूरी तरह लागू करने के लिए साल 2027 तक का समय तय किया गया है।

Story first published: Wednesday, January 28, 2026, 16:00 [IST]
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