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मम्मी नहीं, बच्चों के लिए पापा बेहतर तरीके से कर सकते हैं ये चीजें
कहते हैं कि बच्चे को दुनिया में सबसे ज्यादा मां प्रेम करती हैं, क्योंकि वह उसे नौ महीने तक अपनी कोख में रखती है। लेकिन पिता का प्यार भी अपने बच्चे के लिए उतना ही होता है, बस वह उसे जताता नहीं है। इतना ही नहीं, जितनी फिक्र एक मां को अपने बच्चे की होती है, उतनी ही पिता को भी होती है। वह अपने बच्चे की खुशी व उसकी भलाई के लिए कुछ भी कर सकता है। वास्तव में, ऐसे कई काम भी होते हैं, जो एक पिता मां से कहीं अधिक बेहतर तरीके से कर सकता हैं।
जी हां, अमूमन यह माना जाता है कि एक मां ही अपने बच्चे के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहती है। जबकि एक पिता भी अपने बच्चे के लिए सबकुछ करने को तैयार रहता है और वह ऐसा करता भी है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि वो कौन सी चीजें हैं, जो एक पिता मां से कहीं अधिक बेहतर तरीके से कर सकता है-

बच्चों को अनुशासित करना
यूं तो हर पैरेंट अपने बच्चे का सुखद भविष्य देखना चाहता है, लेकिन इसके लिए जब बच्चों को अनुशासित करने की बात आती है तो पिता अधिक बेहतर साबित होते हैं। दरअसल, कई बार जब बच्चों के साथ थोड़ा सख्ती बरतने की जरूरत होती है तो अक्सर मां थोड़ी नरम हो जाती है। जिसके कारण बच्चे अनुशासित नहीं होते हैं। जबकि पिता अपने बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए उनके साथ कठोर होने से भी गुरेज नहीं करते हैं। उन्हें थोड़ी तकलीफ तो होती है, लेकिन वह उसे अपने बच्चे के सामने दर्शाते नहीं है।
एक्टिव गेम्स खेलना
यूं तो अमूमन मम्मी-पापा अपने बच्चे के साथ वक्त बिताना और खेलना पसंद करते हैं। लेकिन खेलों के चयन को लेकर दोनों की सोच अलग हो सकती है। मसलन, मम्मी अक्सर बच्चों के साथ बैठकर गेम खेलना पसंद करती हैं या फिर बैडमिंटन आदि को प्राथमिकता देती हैं, जबकि पिता उनके साथ क्रिकेट व रनिंग जैसी एक्टिविटीज में शामिल होते हैं। इस तरह की एक्टिविटीज ना केवल बच्चे को बेहद पसंद आती हैं, बल्कि इससे उनकी फिजिकल फिटनेस भी बेहतर होती है।
बच्चे को टफ होना सिखाना
जीवन में सफलता हासिल करने के लिए बच्चे का शुरू से ही टफ होना बेहद जरूरी है और बच्चों को ऐसा बनाने में पिता की अहम् भूमिका होती है। माताएं आमतौर पर चिंता करती हैं और कभी-कभी अपने बच्चों से जुड़ी छोटी-छोटी बातों पर भी भड़क जाती हैं। अगर बच्चा किसी तरह की मुश्किल में होता है तो वह बहुत अधिक परेशान हो जाती हैं। लेकिन डैड इस मामले में थोड़े अलग होते हैं। मसलन, अगर खेल खेलते समय कट या खरोंच लग जाती है तो पिता कहते हैं कि यह खेल का हिस्सा है। अगर बच्चा कुछ समय से नहीं खा रहा है तो पिताजी को विश्वास होगा कि जब भूख लगेगी तो खा लेंगे।

हौसला बढ़ाना
पिता भले ही स्वभाव से सख्त हों, लेकिन वह हमेशा अपने बच्चे के लिए किसी पिलर की तरह की होते हैं। अक्सर पिता किसी भी परेशानी में अपने बच्चे से कहते हैं कि घबरा मत, मैं हूं। पिता द्वारा कहे गए ये शब्द बच्चे के मन को एक हौसला देते हैं। ऐसे में बच्चा किसी भी तरह की विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहता है और वह किसी से भी बेवजह डरता या घबराता नहीं है।
रिस्क लेने को प्रोत्साहित करना
आमतौर पर, माताओं की सुरक्षात्मक प्रवृत्ति हमेशा ही बच्चे को किसी तरह के रिस्क लेने से रोकती है, वहीं पिता इस मामले में बिल्कुल अलग होते हैं। पिता अक्सर बच्चों को उनके कम्फर्ट जोन से बाहर जाने के लिए दबाव डालते हैं। शारीरिक चुनौतियां ना केवल बच्चों की स्ट्रेन्थ को बढ़ाती हैं, बल्कि इससे उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता है। इसके जरिए बच्चे कई महत्वपूर्ण स्किल्स को सीख पाते हैं, जो उन्हें भविष्य में गंभीर संकट में पड़ने से रोक सकते हैं।



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