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ये तो हम सभी जानते हैं कि नवजात शिशु के लिए मां के दूध से बढ़कर कोई खुराक नहीं हैं। शिशु के जन्म के साथ ही मां के स्तनों में भी स्वाभाविक रूप से दूध बनने लगता हैं। लेकिन ये जरुरी नहीं है कि हर मां बच्चें को जन्म देने के बाद स्तनपान करवाने में सक्षम होती है, खासकर नई माएं।
जब स्तनपान के साथ परेशानियों की बात आती है, तो हम दूध की आपूर्ति और मां के सामने आने वाली अन्य समस्याओं के बारे में जानते हैं। क्या आप जानते हैं कि मांओं में दूध ना बनने के अलावा नवजात शिशुओं को दूध चूसने में भी परेशानी हो सकती है? ऐसे में बच्चों को मां का दूध या डिब्बे वाला दूध बोतल या चम्मच से पिलाया जाता है।

कई माएं अपने बच्चों को फीड करवाने के लिए फीडिंग बोतल का सहारा लेती हैं। वहीं कई डॉक्टर शिशुओं में स्तनपान को प्रोत्साहित करने के लिए बोतल से दूध पिलाने की जगह चम्मच से दूध पिलाने की सलाह देते हैं। कई डॉक्टर और अस्पताल फीडिंग पॉलिसी के तहत नवजात शिशु को बोतल से दूध पिलाने के खिलाफ हैं। आइए जानते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग के अलावा इमरजेंसी स्थितियों में नवजात शिशु को बोतल से फीड करवाना चाहिए या चम्मच से।
चम्मच से दूध पिलाने के फायदे
* यह एक पुरानी पारंपरिक प्रथा है और इसलिए ज्यादात्तर लोग दूध को चम्मच से पिलाने के पक्ष में रहते हैं।
* इसे नई मां भी आसानी से सीख सकती है।
* स्पून फीडिंग बोतल की तुलना में अधिक स्वच्छ और आसानी से स्टरलाइज्ड यानी कीटाणुरहित किया जा सकता है।
* ्री-मैच्योर और कम वजन वाले बच्चों को जल्दी वजन बढ़ाने में मदद करता हैं। स्पून फीडिंग प्रैक्टिस को तब तक जारी रखा जा सकता है जब तक कि बच्चें में चूसने की क्षमता विकसित नहीं हो जाती है और पर्याप्त वजन प्राप्त नहीं कर लेता।
* समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चे शुरू में स्तनपान नहीं कर पाते हैं और आसानी से थक जाते हैं, जिससे मांओं में बच्चों के वजन बढ़ने को लेकर चिंता बढ़ जाती हैं। ऐसे में मां के दूध को वैकल्पिक रूप से चम्मच से पिलाने से वजन तेजी से बढ़ता है।

बोतल से दूध पिलाने के नुकसान
हाल के अध्ययनों से पता चला है और कई बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि...
* बोतल से दूध पिलाना शिशुओं में दस्त का एक प्रमुख कारण है।
* संक्रमण का खतरा अधिक होता है, सूक्ष्मजीव बोतल की गर्दन और निप्पल पर चिपक सकते हैं और बोतल के पुन: उपयोग के साथ शिशु में आसानी से फैल सकते हौ।
* बोतल से दूध पिलाने से जो वैक्यूम पैदा होता है, उसके परिणामस्वरूप कान की भीतरी श्रवण नली में द्रव का निर्माण हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप बार-बार कान में संक्रमण हो सकता है।
* बोतल से दूध पिलाने से आपके बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
* बच्चे को दूध पिलाने के लिए बोतल का उपयोग करने के सबसे बुरे परिणामों में से एक है बच्चों में बोतल से दूध पीने की आदत बन जाती हैा। बच्चे इतने सहज हो जाते हैं कि अगर आप अपने बच्चे को चम्मच से दूध पिलाने की कोशिश करते हैं, तो भी वे चम्मच को अस्वीकार कर देते हैं, जिसके चलते बोतल से छुटकारा पाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

किन स्थितियों में पिलाएं चम्मच से दूध
डिलीवरी के बाद ऐसी कई स्थितियां हो सकती है, जिसमें माएं किसी कारणवश शिशु को स्तनपान करवाने में असमर्थ होती हैं, ऐसी स्थितियों में बच्चों को बोतल की जगह स्पून फीडिंग करवाना बेहतर माना जाता है। जैसे:
* जन्म के समय बहुत कम वजन या समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में चूसने की पर्याप्त शक्ति नहीं होती है या चूसने और निगलने के बीच समन्वय की कमी हो सकती है। चम्मच ( Spoon), सीरिंज (syringe),पल्लाडा (syringes) और कटोरी से बच्चे को चूसने की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए इन्हें बेहतर फीडिंग टूल माना जाता है।
* मां बीमार है या स्तन में गांठ या फोड़ा होने पर बच्चों को इंफेक्शन से बचाने के लिए स्पून फीडिंग करवाना सही रहता है।
* सी-सेक्शन के बाद मांएं अक्सर तुरंत स्तनपान कराने में सक्षम नहीं होती है।
* शिशुओं में जन्म दोष जैसे कटा हुआ होंठ और जन्म श्वासावरोध आदि। इन मामलों में, बच्चे को दूध चूसने और निगलने में कठिनाई होती है। ऐसे में बच्चों को स्पून फीडिंग करवाना ही विकल्प होता है।
कैसे कराएं शिशु को स्पून फीडिंग
नवजात शिशु को चम्मच से मां का दूध पिलाना एक बच्चे को चम्मच से सॉलिड या सेमी-सॉलिड फूड खिलाने से बहुत अलग होता है। अपने बच्चे को सफलतापूर्वक स्पून फीडिंग के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें-
* मां के दूध को एक साफ और कीटाणुरहित कटोरी या कप में निकाल लें। आप ब्रेस्ट पंप का उपयोग कर सकते हैं या अपने हाथों का उपयोग कर सकते हैं। ब्रेस्ट मिल्क नहीं आने की स्थिति में आप डॉक्टर द्वारा सुझाया गया फॉर्मूला मिल्क भी ले सकते हैं। बस, फॉर्मूला मिल्क का सही अनुपात ध्यान में रखकर दूध तैयार कर लें।
* अपने बच्चे को बांहों में स्तनपान की स्थिति में पकड़ें।
* 3/4 चम्मच दूध लें और चम्मच से निचले होंठ पर दबा कर बच्चे को पिलाएं। ध्यान रखें कि बच्चें की जीभ हल्की सी दबाएं।
* अब धीरे-धीरे दूध को मुंह के किनारों से डालें। यदि आप इसे सीधे गले में डालते हैं, तो बच्चा केवल उसे गले में चॉक कर लेगा, जिससे वह निगल या सांस नहीं ले पाएगा।
* चम्मच को जीभ और निचले होंठ से तब तक न हटाएं जब तक कि बच्चा सारा दूध न निगल जाए। यदि आप दूध के मुंह में रहते हुए चम्मच लेते हैं, तो बच्चा अपना मुंह बंद कर लेगा, जिससे वह उल्टी या थूक सकता है।
* आधा दूध पिलाने के बाद, बच्चे को डकार दिलवाएं और फिर से दूध पिलाना जारी रखें।

इन बातों का भी ध्यान रखें
* बच्चे को ज्यादा भूख लगें और वो बेसुध होकर रोना शुरू कर दें, उससे पहले ही उसे दूध पिलाना शुरू कर दें।
* बच्चें को दूध पिलाने के लिए कप या कटोरी में 5 मिली अतिरिक्त दूध लें, क्योंकि दूध चम्मच से आसानी से गिर सकता है।
* स्पून फीडिंग के लिए छोटे चम्मच का प्रयोग करें ये पकड़ने में आसान होता है।
* दूध को बच्चें पर छलकने से बचाने के लिए हमेशा अपनी तरफ से एक बर्प कपड़ा साथ में रखें।
* बच्चे के सिर को बहुत पीछे की ओर न झुकाएं क्योंकि इससे वह चुप हो जाएगा।
यदि आप या आपका बच्चा स्तनपान करने में असमर्थ हैं, तो दूध पिलाने के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने में कोई बुराई नहीं है और बच्चे को चम्मच से दूध पिलाना उनमें से एक है। मां का दूध अगर उपलब्ध हो तो बच्चे की फीडिंग के लिए पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हालाँकि, दूध पिलाने के साधन और तरीके वास्तव में तब तक मायने नहीं रखते जब तक कि बच्चे को स्थिति के आधार पर मां के दूध या फॉर्मूला दूध का आवश्यक पोषण मिल रहा हो।
( डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई सभी जानकारी और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। Boldsky Hindi इसकी पुष्टि नहीं करता है। इन चीजों पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। )



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