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सुधा मूर्ति के इन पैरेंटिंग आइडियाज को अपनाकर टीनेज बच्चे की करें परवरिश
Sudha Murthy Tips For parenting : टीनेज एक ऐसी उम्र होती है, जब बच्चे के भटकने की संभावना सबसे अधिक होती है। इस उम्र में बच्चा कई नई चीजों को एक्सपीरियंस करता है और कई नई चीजों का एक्सप्लोर करना चाहते हैं। वहीं, दूसरी ओर अधिकतर पैरेंट्स भी यह सोचते हैं कि अब उनके बच्चे बड़े हो गए हैं तो वे उनके प्रति थोड़े लापरवाह हो जाते हैं।
कभी-कभी पैरेंट्स बच्चे को काफी कुछ समझाना चाहते हैं, लेकिन टीनेज में बच्चे किसी की सुनना पसंद नहीं करते हैं। ऐसे में बच्चे के भविष्य के अंधकारमय होने की आशंका कहीं अधिक बढ़ जाती है। हो सकता है कि आपका बच्चा भी टीनेज उम्र में हो और आप उसके भविष्य को लेकर चिंतित रहते हों, तो आपको सुधा मूर्ति के इन पैरेंटिंग टिप्स को फॉलो करना चाहिए-

दें उन्हें स्पेस
टीनेज वह उम्र होती है, जब बच्चे खुद से काफी कुछ करना चाहते हैं। ऐसे में एक पैरेंट के रूप में आपको उन्हें अपने जुनून और रुचियों को खुद आगे बढ़ाने की आजादी देनी चाहिए। कई पैरेंट्स अपने विचार बच्चों पर थोपना शुरू कर देते हैं। लेकिन ऐसा करने से बचें। इसके बजाय, उन्हें स्वाभाविक रूप से बढ़ने दें। जब आप उन्हें स्पेस देते हैं तो इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे खुद को खोज पाते हैं।
सेट करें उदाहरण
यह देखने में आता है कि पैरेंट्स अपने टीनेज बच्चों पर कई तरह के नियम लागू करते हैं। लेकिन वास्तव में ऐसा करने से आपको कोई रिजल्ट नहीं मिलने वाला है। बेहतर होगा कि आप खुद ही उनके सामने एक उदाहरण सेट करें। सुधा मूर्ति का मानना है कि पैरेंट्स को अपने टीनेज बच्चों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहिए। अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे के व्यक्तित्व में कोई खास गुण आए, तो पहले आपको खुद में उस मूल्य को स्थापित करना होगा। जब आप वैसा ही करते हैं, तो इससे बच्चे में भी वह गुण विकसित होते हैं। आप अपने टीनेज बच्चों वे मूल्य दिखाएं जो आप उनमें चाहते हैं, जैसे पढ़ने के प्रति लगाव या विनम्रता आदि।
खुद से कॉम्पीटिशन करना सिखाएं
आज के समय में पैरेंट्स ही नहीं, बल्कि बच्चे भी अपनी तुलना दूसरों से करते हैं और ऐसे में उनके मन में निराशा और नकारात्मकता बढ़ने लगती है। इतना ही नहीं, तुलना के कारण उनका आत्मसम्मान भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए, यह जरूरी है कि आप टीनेज बच्चे को एक दूसरे के बजाय खुद से कॉम्पीटिशन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्हें उनकी अचीवमेंट के लिए सराहना करें और एक अलग तरह से डेवलपमेंट में मदद करें। यह उन्हें खुद की वैल्यू करना सिखाएगा और वे अपने काम पर गर्व महसूस करेंगे।
साधारण जीवन जीएं
टीनेज एक ऐसी उम्र होती है, जब बच्चे अपने आसपास के माहौल से बहुत अधिक प्रभावित होते हैं। वे अपने साथ के बच्चों को देखकर उनके जैसा लाइफस्टाइल अपनाना चाहते हैं। ऐसे में माता-पिता के रूप में आपको अपने बच्चों को सादगी और विनम्रता का मूल्य सिखाा चाहिए। उन्होंने बाहर की चकाचौंध की वास्तविकता के बारे में बताएं। अपने टीनेज बच्चे को जीवन की छोटी-छोटी खुशियों, जैसे परिवार, दोस्तों और प्रकृति का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें जीवन में छोटी-छोटी चीज़ों का आनंद लेने से मिलने वाली संतुष्टि सिखाने का प्रयास करें। इससे वह अधिक उदार बनते हैं।
सुनें और करें कम्युनिकेट
टीनेज ऐसी उम्र होती है, जब बच्चे के मन में कई तरह की उथल-पुथल चलती है। ऐसे में एक पैरेंट के रूप में यह आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उन्हें ध्यान से सुनें और उनके साथ ओपन कम्युनिकेट करें। इस उम्र मंे माता-पिता के लिए बच्चे का दोस्त बनना, उन्हें समझना और प्रोत्साहित करना बेहद ही जरूरी है। आप बच्चे के लिए एक ऐसा स्पेस क्रिएट करें जहां आपके बच्चे को खुद के जज किए जाने की चिंता ना हो और वह बिना किसी झिझक के अपनी परेशानी आपके साथ शेयर कर सके। अपने किशोर के साथ ओपन कम्युनिकेशन करना और उसके साथ ईमानदार रहना रिश्ते को मजबूत बनाता है।



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