Snoring in children:आपका बच्‍चा भी लेने लगा है खर्राटे, एक्‍सपर्ट ने बताई वजह और इलाज

Toddler Snoring in Sleeping : थकान या मोटापे की वजह से सोते हुए खर्राटे लेना सामान्‍य सी बात है, लेक‍िन बच्चों का खर्राटे लेना सामान्य बात नहीं होती है। रात को सोते हुए खर्राटे लेना या सांस लेते हुए कुछ आवाज आने का मतलब कोई बीमारी भी हो सकती है।

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आइए जानते हैं बच्‍चों के लिए खर्राटे लेना कितना सही है और किन तरीकों से इस समस्‍या से छुटकारा पाया जा सकता है।

ये होती है वजह
बच्चों में एक ग्रंथि होती है जिसको एडिनोइड कहते हैं. एडिनोइड उम्र के साथ सिकुड़ते जाते हैं। अगर ये छोटे नहीं होते हैं तो सांस लेने में दिक्कत होती है। क्‍योंक‍ि गले के आसपास के ऊतकों में कंपन की वजह से खर्राटों की आवाज आने लगती है। खर्राटे लेने के ये वजह मुख्‍य हो सकती हैं-

- इंफेक्‍शन की वजह से टॉन्सिल्‍स बढ़ सकते हैं जिसमें श्‍वसन मार्ग में अवरोध आने लगता है। इसकी वजह से खर्राटों की आवाज सुनाई देती है।

- वजन बढ़ने या ओबेसिटी होने पर भी खर्राटे आ सकते हैं। ओबेसिटी गले के श्‍वसन मार्ग को छोटा कर देती है, जिससे सांस लेने में दिक्‍कत होने लगती है।

- जुकाम की वजह से नाक जम जाती है और नासिका मार्ग में ब्‍लॉकेज हो जाती है। इससे भी खर्राटे आ सकते हैं।

- धूल-मिट्टी से एलर्जी होने पर जुकाम हो जाता है और नाक बंद हो जाती है। यह भी खर्राटों का कारण बन सकता है।
- स्‍लीप एप्‍निया की वजह से भी बच्‍चों को खर्राटे आते हैं।

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हो सकती है बच्‍चों को ये समस्‍याएं
जुकाम या टांसिल की वजह से खर्राटे आते है तो बहुत अलग बात है लेक‍िन बच्‍चा लगातार खर्राटे ले रहा हैं तो ये चिंता का विषय है। लगातार खर्राटे आना स्‍लीप एप्निया का संकेत हो सकता है। इससे सांस लेने में दिक्‍कत होती है। बच्‍चों को खर्राटों की वजह से थकान, सिरदर्द, डिप्रेशन और सुस्‍ती हो सकती है।

कब जाना चाह‍िए डॉक्‍टर के पास?
जयपुर स्थित इटरनल हॉस्पिटल के सीनियर पीड्रियाटिशियन डॉक्‍टर विवेक शर्मा बताते है क‍ि अगर बच्‍चा रोजाना खर्राटे ले रहा है, और उसका वजन अचानक से बढ़ गया है और वो काफी समय से चिड़चिड़ा भी हो रहा है। इसके अलावा अगर बच्‍चें की नींद भी पूरी नहीं हो रही है, तो बिना देर क‍िए आपको डॉक्‍टर को दिखाना चाह‍िए।

इसके साथ ही बच्चों में खर्राटे की परेशानी दूर करने के लिए एडीनोटोनसिलेक्टोमी सर्जरी की जाती है। इसके जरिए टॉन्सिल्स और एडि‍नोइड्स को हटाकर हवा का फ्लो ठीक किया जाता है। जिससे नाक में सांस लेने वाली रुकावट को दूर क‍िया जा सकता है। अगर समस्‍या मामूली है तो दवाईयों और नेजल स्‍प्रे से भी इसे ठीक क‍िया जाता है। लेक‍िन समस्‍या गंभीर होने पर नेजल सर्जरी ही एक उपाय है।

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